अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
शहर में पिछले कई सालों से सर्दी शुरू होते ही लगने वाले गर्म कपड़ों का तिब्बत बाजार को लेकर इस बार फिर से विवाद शुरू हो गया है। तिब्बती व्यापारियों ने डीसी से बाजार लगाने के लिए जगह की अनुमति मांगी तो इसका पता चलते ही शहर के व्यापारी विरोध में खड़े हो गए। इसको लेकर भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी राजीव जैन के आवास पर बुधवार शाम को मीटिंग भी हुई, लेकिन उसमें भी बात नहीं बन सकी। अब व्यापारियों ने साफ कर दिया है कि शहर में तिब्बती बाजार लगा तो वह अपनी दुकानों को बंद करके उनकी चाबियां सरकार को सौंप देंगे। हालांकि शहर के व्यापारी कुंडली में तिब्बती बाजार लगवाने के साथ ही उसके लिए सहयोग करने को तैयार है, जिससे शहर का व्यापार प्रभावित न हो और तिब्बती व्यापारियों का काम भी चल सके। इसपर अभी कोई सहमति नहीं बन सकी और विवाद बना हुआ है।
सर्दी का सीजन शुरू होते ही तिब्बत के गर्म कपड़े के व्यापारी शहर में तीन महीने के लिए बाजार लगाते है। यह बाजार पिछले 5-6 साल से सेक्टर 14 की हुडा मार्केट में लगाया जा रहा है। इसको लेकर पिछले साल विवाद खड़ा हो गया था, क्योंकि शहर के व्यापारियों ने इस बाजार की खिलाफत शुरू कर दी थी। उस समय किसी तरह विवाद को सुलझाया गया था और तिब्बत बाजार को शहर में महाराणा प्रताप चौक के पास हुडा की जगह में लगवाया गया था। इस बार फिर से सर्दी की शुरूआत होते ही तिब्बत के व्यापारी अपना बाजार लगाने के यहां आ गए है और उन्होंने सेक्टर 14 में हुडा मार्केट की जगह के लिए डीसी से अनुमति मांगी है। जिसपर डीसी ने इसको लेकर व्यापारियों की राय जानी तो वह इस बाजार के विरोध में खड़े हो गए। इसका विरोध बढ़ता देख मंत्री कविता जैन के पति भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी राजीव जैन के साथ शहर के व्यापारियों व तिब्बत के कपड़ा व्यापारियों की मीटिंग हुई। उसमें समस्या का हल निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन यह विवाद खत्म नहीं हो सका। अब जिला व्यापार मंडल एसोसिएशन की इसको लेकर मीटिंग हुई, जिसमें व्यापारियों ने साफ कर दिया कि वह तिब्बत बाजार को शहर में नहीं लगने देंगे। एसोसिएशन के प्रधान संजय सिंगला ने कहा कि वह बाजार को कुंडली में लगवाने के लिए तैयार है और उसके लिए तिब्बत के व्यापारियों की मदद भी करेंगे। क्योंकि शहर में बाजार लगने से कपड़ा व्यापारियों का सर्दी का सीजन पूरी तरह से खराब हो जाता है और उनका व्यापार ठप हो जाता है। यह समस्या पिछले कई साल से आ रही है और उसको देखते हुए ही व्यापारी इसका विरोध कर रहे है। व्यापारियों ने मीटिंग में साफ कहा कि अगर तिब्बत बाजार को शहर में लगने की अनुमति दी गई तो वह अपनी दुकानों को बंद करके चाबियां सरकार को सौंप देंगे। इस दौरान संजय सिंगला, पवन तनेजा, राकेश कालड़ा, राकेश चोपड़ा, राकेश छाबड़ा आदि मौजूद रहे।
शहर में किराये की दुकान देंगे, जीएसटी नंबर लेना पड़ेगा
शहर के कपड़ा व्यापारियों ने तिब्बती व्यापारियों से साफ कहा है कि अगर वह व्यापार करना चाहते है तो वह पूरे साल यहां रहकर व्यापार कर सकते हैं। इसके लिए वह उनको किराये पर दुकान दिलाएंगे और उनको जीएसटी नंबर भी लेना होगा। व्यापारियों का कहना है कि सरकार हमपर जीएसटी के अलावा भी नगर निगम के कई टैक्स लगाती है, जबकि तिब्बती व्यापारियों को जगह भी मुफ्त में दी जाती है और उनसे कोई टैक्स भी नहीं लिया जाता है। इस तरह सभी व्यापारी तीन-तीन महीने के लिए व्यापार करने लगेंगे तो सरकार को टैक्स ही नहीं जाएगा।
--
शहर में किसी भी हालत में तिब्बत बाजार नहीं लगने दिया जाएगा। वह शहर में बाजार लगाना चाहते है तो वह किराये की दुकान लेकर पूरे साल व्यापार करें। इसके लिए उनको जीएसटी नंबर लेना होगा और सरकार को टैक्स भी देना होगा। अगर शहर में उनको तीन महीने के लिए जगह दी जाती है तो सभी व्यापारी अपनी दुकानें बंद करके सरकार को चाबी सौंप देंगे। संजय सिंगला, प्रधान जिला व्यापार मंडल एसोसिएशन
--
तिब्बती व्यापारी हर बार सर्दी के सीजन में तीन महीने के लिए आते हैं। यह सीजन ही शहर के व्यापारियों के लिए व्यापार करने का होता है, लेकिन इनके आने से व्यापार पूरी तरह से ठप हो जाता है। इस तरह से होता रहेगा तो व्यापारी भूखे मर जाएंगे और उनके सामने परिवार चलाने तक की समस्या खड़ी हो जाएगी। इसलिए तिब्बती व्यापारियों को शहर की जगह कुंडली में जगह दी जाए तो बेहतर होगा। राकेश चोपड़ा, प्रधान कच्चे क्वार्टर मार्केट