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दवा कंपनी मालिक से सीजीएसटी के इंस्पेक्टरों और सुपरिटेंडेंट ने छापे का डर दिखाकर 3 लाख वसूले, मुकदमा दर्ज

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सीजीएसटी कर्मियों के साथ फैक्टरी में मनोज कालरा। - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। राई औद्योगिक क्षेत्र की एक दवा कंपनी में रोहतक के सेंट्रल जीएसटी कार्यालय के दो इंस्पेक्टरों और दो सुपरिटेंडेंट ने दस दिन पहले छापा मार जीएसटी चोरी में कार्रवाई का डर दिखाकर 12 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। कंपनी मालिक ने 9 लाख रुपये तय करके 3 लाख रुपये सीजीएसटी टीम को दे दिए और बाकी रुपये बाद में देने की बात कही। इसके बाद मामले की शिकायत सीबीआई, चंडीगढ़ कार्यालय में कर दी। सीजीएसटी के दो सुपरिटेंडेंट बाकी 6 लाख रुपये शुक्रवार की रात को राई औद्योगिक क्षेत्र के गेट पर लेने पहुंचे तो सीबीआई को पीछे लगे होने का शक होने पर उन्होंने कंपनी मालिक को गाड़ी में बैठाकर दौड़ा दी। बहालगढ़ के पास गाड़ी को छोड़कर दोनों सुपरिटेंडेंट भाग गए और गाड़ी में पहले से रखे लगभग तीन लाख रुपये भी पास ही खेत में फेंक दिए। रुपये वहां से सीबीआई ने बरामद किए। सीबीआई ने इस मामले में सीजीएसटी के सुपरिटेंडेंट गुरविंदर सिंह सोहल, सुपरिटेंडेंट कुलदीप हुड्डा, इंस्पेक्टर रोहित मलिक व इंस्पेक्टर प्रदीप पर मामला दर्ज किया है। इसमें एक सुपरिटेंडेंट को गिरफ्तार किया है और उसके घर पर छापा मारकर लाखों रुपये व जेवर बरामद किए हैं। सीबीआई की अन्य की गिरफ्तारी को दिल्ली व बहादुरगढ़ में कार्रवाई जारी है।
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सोनीपत के सेक्टर 14 में रहने वाले मनोज कालरा की राई औद्योगिक क्षेत्र में रिसर्च मेडिसन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से दवाई कंपनी है। कंपनी मालिक मनोज कालरा ने चंडीगढ़ सीबीआई कार्यालय में शिकायत भेजी कि 6 अगस्त को लगभग 11 बजे रोहतक सीजीएसटी से टीम जांच के लिए उनकी फैक्टरी में पहुंची। जिसमें सुपरिटेंडेंट गुरविंदर सिंह सोहल, सुपरिटेंडेंट कुलदीप हुड्डा, इंस्पेक्टर रोहित मलिक व इंस्पेक्टर प्रदीप शामिल थे। उन्होंने कहा कि सैनिटाइजर का जीएसटी पूरा जमा नहीं कराया हुआ है। उनके जांच करने पर पता चला कि पहले 12 प्रतिशत के हिसाब से जीएसटी जमा कराया गया था और वह बाद में 18 प्रतिशत किया गया था तो उस हिसाब से लगभग 4.5 लाख रुपये का जीएसटी उसी समय ऑनलाइन जमा करा दिया गया। मनोज कालरा का आरोप है कि उसके बाद उनकी अन्य दो कंपनी में छापा मारकर मोटा जुर्माना लगाने की बात कहते हुए डराया गया और उसके बदले में 12 लाख रुपये में मामला निपटाने की बात कही। मनोज कालरा ने कुछ कम रुपये करने के लिए कहा तो उनकी बात 9 लाख रुपये में तय हो गई। उसी समय मनोज कालरा ने उनको तीन लाख रुपये दे दिए। बाकी रुपये बाद में देने की बात कही और 10 अगस्त को मनोज कालरा ने मामले में सीबीआई कार्यालय चंडीगढ़ में शिकायत कर दी। जिसके सभी सबूत भी सीबीआई कार्यालय भेज दिए गए। मनोज कालरा 11 अगस्त को रोहतक क्लीयरेंस प्रमाण पत्र लेने के लिए गए तो उनको कहा गया कि शुक्रवार को सोनीपत आकर ही देंगे। मनोज कालरा ने बताया कि उनके पास शुक्रवार रात को सुपरिटेंडेंट गुरविंदर सिंह सोहल का फोन आया और उन्होंने उनको राई औद्योगिक क्षेत्र के गेट पर बुलाया। उस समय सीबीआई की टीम भी पूरी तैयारी के साथ वहां लग चुकी थी और वहां छह लाख रुपये लेकर पहुंचे मनोज कालरा के साथ सीबीआई कर्मी भी मौजूद था। मनोज कालरा ने बताया कि गाड़ी में सुपरिटेंडेंट गुरविंदर सिंह सोहल व कुलदीप हुड्डा मौजूद थे। मनोज कालरा को दोनों ने गाड़ी में बैठा लिया और सीबीआई कर्मी को धक्का देकर गिराने के बाद गाड़ी को दौड़ा दिया। मनोज कालरा ने बताया कि उनको शक हो गया कि उनके पीछे सीबीआई लग गई है। इसलिए ही गुरविंदर ने कुलदीप हुड्डा को बहालगढ़ फ्लाईओवर के पास उतारकर फिर गाड़ी दौड़ा दी और वहां से थोड़ा आगे जाकर गाड़ी को रोकते ही उसमें रखी एक पॉलीथिन को लेकर खेतों में भाग गया। उसने पॉलीथिन से खेत में कुछ सामान गिराया, जो वहां पास ही होटल में लगे सीसीटीवी कैमरे में दिखाई दिया। मनोज कालरा ने बताया कि सीबीआई के तलाशने पर वहां लगभग तीन लाख रुपये पड़े मिले। वहीं गाड़ी के अंदर से उसके लाए हुए छह लाख रुपये, सोने की चैन व अन्य सामान बरामद हुआ।
मोबाइल सर्विलांस से सुपरिटेंडेंट को पकड़ा, रोहतक के साथ ही दिल्ली व बहादुरगढ़ में छापे मारे
मनोज कालरा ने बताया कि सीबीआई ने मोबाइल सर्विलांस के आधार पर रोहतक में छापे मारे। जहां से सुपरिटेंडेंट कुलदीप हुड्डा को पकड़ा गया और उसके घर छानबीन करने पर लाखों रुपये की नकदी व सोने के जेवर बरामद किए गए हैं। इसके अलावा रोहतक में एक इंस्पेक्टर के घर और दिल्ली के पश्चिम विहार में छापे मारे गए। इसके लिए सीबीआई की चार टीमें लगी हुई थी। सीबीआई टीम गाड़ी, रुपये, जेवर, वीडियो व ऑडियो रिकार्डिंग सभी को चंडीगढ़ अपने साथ लेकर चली गई है।
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