निरंकारी बाबा अवतार सिंह ने गद्दी छोड़ सात साल साधारण जीवन बिताकर की थी समाजसेवा
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। निरंकारी मिशन का इतिहास भी विशाल रहा है, जिसके सभी महाराज ने हमेशा समाज सेवा को अपना जीवन का आधार समझा और समाज के उत्थान के लिए कार्य किया। निरंकारी मिशन के इतिहास को देखा जाए तो गद्दी छोड़कर साधारण जीवन जीते हुए भी बाबा अवतार सिंह ने अपना पूरा जीवन समाजसेवा में बिताया था। निरंकारी मिशन भी यही समाजसेवा माना जाता है और अब इस निरंकारी मिशन को सद्गुरु माता सुदीक्षा आगे बढ़ाने में जुटी हुई हैं। वह पूर्वजों के पद्चिन्हों पर ही आगे बढ़ रही है, जिन्होंने निरंकारी मिशन से देश व विदेश के लाखों लोगों को जोड़कर समाज सेवा की राह पर चलाया हुआ है।
निरंकारी मिशन के प्रेस एवं पब्लिसिटी इंचार्ज कृपा सागर बताते हैं कि सद्गुरु माता सुदीक्षा निरंकारी मिशन की छठीं महाराज हैं जो निरंकारी मिशन को आगे बढ़ाने के लिए गद्दी पर बैठी हैं। जबकि इस निरंकारी मिशन की शुरूआत 1929 में बाबा बूटा सिंह महाराज के सानिध्य में हुई थी। उनके बाद 1943 में बाबा अवतार सिंह ने निरंकारी मिशन की गद्दी संभाली जो 1962 तक गद्दी पर रहते हुए समाज सेवा में जुटे रहे तो दुनिया को एकजुटता का संदेश देते रहे। निरंकारी मिशन में बाबा बूटा सिंह ऐसे महाराज रहे हैं, जिन्होंने 1962 में गद्दी छोड़ने के बाद 1969 तक रहते हुए साधारण जीवन जिया और वह उस साधारण जीवन में रहते हुए समाज की सेवा में जुटे रहे। बाबा बूटा सिंह ने 1962 में बाबा गुरुवचन सिंह महाराज को गद्दी सौंपी थी, जिनके बाद बाबा हरदेव सिंह ने 1980 में गद्दी संभाली। बाबा हरदेव सिंह महाराज लंबे समय 36 साल तक निरंकारी मिशन को आगे बढ़ाते रहे। बाबा हरदेव सिंह ही ऐसे महाराज रहे, जिन्होंने विदेशों तक निरंकारी मिशन को बढ़ाया और साध संगत को मिशन से जोड़कर समाज की सेवा के लिए बड़ी राह बनाई। जिससे उस राह पर चलकर समाज का हर व्यक्ति खुद का उत्थान करने के साथ ही दूसरों को मानवता का पाठ पढ़ा सके और उनको निरंकारी मिशन के सहारे समाज सेवा से जोड़ सके। जिनके बाद माता सविंदर हरदेव महाराज को गद्दी मिली, लेकिन वह केवल दो साल ही गद्दी पर रहीं और उन्होंने अपने निधन से 20 दिन पहले ही 16 जुलाई 2018 को गद्दी छोड़ दी थी। उसके बाद से सद्गुरु माता सुदीक्षा निरंकारी मिशन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। सद्गुरु माता सुदीक्षा भी पूर्वजों के पद्चिन्हों पर आगे बढ़ रही हैं, जिन्होंने उनको मानवता की भलाई की सीख दी थी और वही सीख अब सद्गुरु माता सुदीक्षा जनमानस को दे रही हैं। समाज से द्वेष भावना, जात-बिरादरी, छोटे-बड़े की दीवार को गिराने में निरंकारी मिशन जुटा हुआ है और यह सीख ही निरंकारी संत समागम में हर किसी को दी जा रही है।
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युवाओं व महिलाओं को सशक्त बना रहा निरंकारी मिशन
निरंकारी मिशन का मानना है कि युवा अवस्था में सबसे ज्यादा सतर्कता रखनी जरूरी होती है, क्योंकि वह ऐसी उम्र होती है जब युवा भटक सकते हैं। इसलिए ही युवाओं के लिए निरंकारी मिशन ने युवा सशक्तिकरण कार्यक्रम चलाया है जो 2017 से शुरू किया गया है। उनकी पर्सनलिटी डेवलपमेंट की जाती है तो कैरियर काउंसलिंग कराई जाती है। युवाओं को इंटरव्यू के अलावा उनके हक व जिम्मेदारियों के बारे में बताया जाता है। इसके अलावा भी उनको मानसिक रूप से तैयार किया जाता है, जिससे वह भविष्य में बेहतर कर सकें। वहीं महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए निरंकारी मिशन काम कर रहा है। जिसके तहत देश में अलग-अलग जगहों पर 72 सिलाई केंद्र चल रहे हैं, जिनके सहारे महिलाएं खुद परिवार की जीविका चला रही हैं। वहीं महिला की प्राथमिक शिक्षा से लेकर गांवों में प्रोजेक्ट उपकार के सहारे भी महिला शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इनके अलावा ब्लड डोनेशन कैंप मिशन की ओर से लगाए जा रहे हैं तो शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्कूल व कालेज खोले गए हैं। इस तरह समाज की हर कड़ी को मजबूत करने के लिए निरंकारी मिशन काम कर रहा है और यही कारण है कि लाखों लोग उससे जुड़ रहे हैं।