अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। राई औद्योगिक क्षेत्र में पेंट की फैक्टरी में आग लगने का कारण जिस वायरिंग के तारों में शॉर्ट सर्किट होना बताया जा रहा है। उन तारों में पहली बार शॉर्ट सर्किट होने से चिंगारी नहीं निकली है। बल्कि पहले भी वायरिंग के तारों में कई बार चिंगारी निकल चुकी थी। उस कारण खतरे को भांपते हुए कर्मियों ने मालिक व मैनेजर से कई बार वायरिंग ठीक कराने के लिए बोला था और यहां तक कहा था कि इन चिंगारी से किसी दिन हादसा हो सकता है। जिसपर हर बार मालिक कह देता था कि मैं भी यहां रहता हूं और हादसा होगा तो उसे भी दिक्कत होगी, इसलिए वह क्यों डर रहे है। इस तरह हर बार कर्मियों की शिकायत को नजर अंदाज किया गया और इस कारण ही फैक्टरी में आग लगने से इतना बड़ा हादसा हो गया।
पेंट की फैक्टरी में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मेठी गांव का राकेश पहले पांच साल काम कर चुका था और वह उसके बाद घर चला गया था। वह सात महीने घर रहने के बाद अब दोबारा से दो महीने पहले ही फैक्टरी में काम करने के लिए आया था। वह पेंट बनाने के लिए केमिकल को मिक्स करने वाली मशीन पर काम करता था और उस मशीन को राकेश ही चलाता था। राकेश ने बताया कि फैक्टरी में तारों की कुछ फीटिंग दीवारों के अंदर है तो कई जगह तार बाहर निकले हुए थे। उन बाहर निकले हुए तारों से जोड़कर ही मिक्सर मशीन चलाई जाती थी। उन तारों से कई बार दिन में चिंगारी निकलती थी तो उसने मालिक गुलशन माटा व मैनेजर से इस बारे में बताया और उन तारों को ठीक कराने के लिए भी कहा। राकेश ने पुलिस को बताया कि उसके बार-बार वायरिंग ठीक कराने के लिए कहने के बावजूद मालिक व मैनेजर उसकी बात को नजर अंदाज कर देते थे। राकेश के अनुसार उसने मालिक को यहां तक कहा था कि जिस तरह से वायरिंग में चिंगारी उठती है, उससे किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। उसके बावजूद उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया और इस हादसे में सबसे बड़ी लापरवाही मालिक व मैनेजर की रही तो मालिक के बेटे व सुपरवाइजर तक ने हालात नहीं सुधारे। अगर राकेश की बात पर ध्यान दिया जाता और वायरिंग ठीक करा दी जाती तो शायद फैक्टरी में इतना बड़ा हादसा नहीं होता।
परिजन व पुलिस को अंदर सांस नहीं आया, लोगों की आंखों में जलन होने लगी
जिस तरह से फैक्टरी में आग लगी और उसमें कर्मी जिंदा जलकर मर गए। उस मंजर को देखकर हर कोई सिंहर उठता था। हालात यहां तक थे कि जब आग पर काबू पाकर कर्मियों के परिजन व पुलिस अंदर शव देखने पहुंची तो एक शव दिखाई दिया। वह भी पुरुष कर्मी का शव बताया जा रहा है, क्योंकि उसके शरीर पर काफी मांस था। लेकिन अन्य की तलाश शुरू की गई तो वहां कुछ नहीं मिल सका। वहां अंदर काफी धुआं व दीवारें तपने के कारण अंदर ज्यादा देर तक रुकना नामुमकिन था। इस कारण ही कर्मियों के परिजनों को लेकर पुलिस बार-बार अंदर जाती थी और वहां धुएं के कारण हालत खराब होने पर तुरंत बाहर आ जाती थी। इस तरह का क्रम बार-बार चलता रहा और इसी बीच दो शवों के अवशेष दिखाई दिए। उन अवशेष को पॉलिथीन में एकत्र करके लाया गया। जिनमें एक बच्चे तो एक महिला के अवशेष होने की बात कही जा रही है। वहां धुंए के कारण सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था तो केमिकल में आग लगने से बनी गैस से आसपास तक लोग परेशान थे। किसी की आंखों में जलन होने लगी तो चेहरे पर जलन की शिकायत भी होने लगी। क्योंकि फैक्टरी के अंदर काफी ज्वलनशील केमिकल बताए जा रहे थे और वहां लगभग आठ केमिकल मिलाकर पेंट बनता है जो सभी ज्वलनशील होने की बात बताई गई।