फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्राइवेट स्कूलों में कटने लगी जेब, फार्म 6 भरे बिना बढ़ाई फीस, अन्य चार्ज भी वसूल रहे

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

सोनीपत।
स्कूलों में नया शिक्षण सत्र 2017-18 अभी शुरू भी नहीं हुआ है और प्राइवेट स्कूलों में लोगों की जेब कटनी शुरू हो गई है। जहां स्कूलों ने पुराने एडमिशन वाले छात्रों की फार्म 6 भरे बिना ही फीस बढ़ा दी है और स्कूल के बाहर नई फीस का नोटिस तक लगा दिया गया है। उनसे एग्जाम व अन्य एक्टीविटी चार्ज के नाम पर भी रुपये वसूलने का नोटिस जारी कर दिया गया है। वहीं नए एडमिशन वालों की ज्यादा जेब काटी जा रही है, जिनपर नए-नए चार्ज के नाम पर 50 हजार से एक लाख तक रुपये जमाए कराए जा रहे हैं।
जबकि नियम के अनुसार प्राइवेट स्कूल फार्म 6 भरकर पहले अधिकारियों से स्कूल का ऑडिट कराएंगे और ऑडिट में स्कूल में फीस बढ़ाने की जरूरत की बात सामने आएगी तो उसके बाद ही फीस बढ़ाई जा सकती है। इस स्कूलों की मनमानी को देखते हुए छात्र-अभिभावक संघ भी आंदोलन की तैयारी कर रहा है तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सरकार के नियम के विरुद्ध फीस बढ़ाने पर कार्रवाई करने की बात कही है।
विज्ञापन

किसी भी प्राइवेट स्कूल को फीस बढ़ानी होती है तो उसे सरकार के नियम के अनुसार पहले फार्म 6 भरकर जमा कराना होगा। वह फार्म 6 भरने के बाद शिक्षा विभाग के माध्यम से जिले के अधिकारियों के पास भेजा जाएगा। उसके बाद जिले के अधिकारी स्कूल का ऑडिट करके यह देखेंगे कि स्कूल में फीस बढ़ाने की जरूरत है या नहीं और उसके बाद ही फीस बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी। यह फीस भी 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं बढ़ाई जा सकती है। लेकिन स्कूलों ने नए सत्र को देखते हुए पहले ही फीस में बढ़ोतरी कर दी है, जबकि अभी तक फार्म 6 भरे भी नहीं गए है। स्कूलों की ओर से 200-800 रुपये महीने की फीस बढ़ाकर अपने यहां नोटिस लगा दिया गया है कि वर्ष 2017-18 के लिए स्कूल का फीस स्ट्रक्चर यह होगा।
वह नोटिस देखकर अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है, क्योंकि इस तरह एक बच्चे को स्कूल में पढ़ाने पर 200-500 रुपये हर महीने का खर्च बढ़ गया है। स्कूलों ने केवल यह नोटिस नहीं लगाया है, बल्कि 3800-4800 रुपये एग्जाम व अन्य एक्टिविटी चार्ज जमा कराने के लिए नोटिस जारी कर दिए है। इनके अलावा कई स्कूलों ने एन्युअल चार्ज व बिल्डिंग फीस के नाम पर भी 10 हजार रुपये से ज्यादा की वसूली के लिए अभिभावकों को पहले से आगाह कर दिया है। ऐसे हालात में बच्चों को किस तरह बेहतर शिक्षा दी जा सकती है, इसका अंदाजा खुद लगाया जा सकता है।
एडमिशन कराने पर भी कट रही जेब
प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इस एडमिशन की प्रक्रिया के साथ ही लोगों की जेब काटी जाने लगी है। लोगों से एडमिशन फीस, एनुअल चार्ज, बिल्डिंग फंड, एग्जाम फीस, अन्य एक्टीविटी फीस के नाम पर मोटी रकम वसूलनी शुरू कर दी गई है। लोगों से यह रकम वसूलकर इसका कोई रिकार्ड तक नहीं दिया जा रहा है, जिससे साफ है कि इस तरह लोगों की जेब काटी जा रही है। जिले के कई बड़े स्कूलों में 50 हजार से एक लाख रुपये तक नए एडमिशन पर लिए जा रहे हैं।
फार्म 6 भरना हुए शुरू
सरकार की ओर से स्कूलों के लिए फार्म 6 जारी कर दिए गए है। जिससे स्कूल उनको जल्द से जल्द भरकर जमा कराए और किसी स्कूल की ओर से फीस बढ़ाने के लिए आवेदन आता है तो उसका ऑडिट कराया जा सके। इस फार्म में स्कूल अपने यहां नुकसान दिखाकर दस प्रतिशत तक की फीस बढ़ाने का दावा कर सकते हैं और यह फार्म अगले महीने के आखिर तक भरना होगा। इस फार्म को नहीं भरने वाले स्कूल एक रुपया फीस भी नहीं बढ़ा सकते।

धारा 158 के तहत कोई भी प्राइवेट स्कूल अपने यहां एडमिशन, एन्युअल चार्ज, बिल्डिंग फीस व कोई अन्य फीस नहीं वसूल सकते है। स्कूल बिना फार्म 6 भरे फीस भी नहीं बढ़ा सकता है। स्कूल नुकसान में चल रहा हो तो वह फीस बढ़ा सकता है, लेकिन पहले फार्म 6 भरकर स्कूल की आय-व्यय का ब्यौरा देना होगा। उसके बाद डीईओ से ऑडिट कराना होगा और उनकी ओर से केवल 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने की अनुमति मिल सकती है। किसी भी स्कूल ने छात्रों से एडमिशन, एन्युअल, बिल्डिंग या अन्य कोई फीस वसूली और बिना अनुमति के फीस बढ़ाई तो उसके खिलाफ आंदोलन करने के साथ ही शिकायत की जाएगी।
विज्ञापन

-विमल किशोर, संयोजक छात्र-अभिभावक संघ


सरकार का नियम है कि कोई भी स्कूल नुकसान में होने पर फीस बढ़ाना चाहता है तो उसे पहले फार्म 6 भरना होगा। उसके बाद ऑडिट कराना होगा और वहां फीस बढ़ाने की जरूरत को देखकर ही अनुमति दी जाती है। किसी स्कूल ने बिना अनुमति के फीस बढ़ाई और सरकार के नियमों का पालन नहीं किया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर जल्द ही सभी स्कूलों को एक पत्र जारी किया जाएगा।
सुमन नैन, डीईओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें