फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिजली के 950 बिलों को कर्मियों ने सड़क पर फेंका, लोग इंतजार करते रहे, आखिरी तारीख निकलने से लगा लेट चार्ज

विज्ञापन
विज्ञापन
बिजली के 950 बिलों को कर्मियों ने सड़क पर फेंका, ड्यू डेट तक इंतजार करते रहे लोग
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। बिजली निगम के अधिकारी बिलों को लेकर किस तरह लापरवाही वाला रवैया अपना रहे हैं। इसका इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है उपभोक्ताओं के घरों तक बिल नहीं पहुंच रहे हैं और कर्मी उनको सड़क पर फेंक देते है। यहां गोहाना बाईपास पर रविवार को ऐसे ही बिजली के 950 बिल पड़े हुए मिले। इन बिलों को बांटने की जगह सड़क पर फेंक दिया गया और इस कारण ही बिल भरने की आखिरी तारीख निकल गई। जिससे उपभोक्ताओं पर 200 रुपये तक लेट चार्ज लग गया। इस तरह बिल सड़क पर फेंकने का मामला डीसी के पास पहुंचा तो डीसी ने बिजली निगम के अफसरों की क्लास लगाई।
गोहाना रोड बाईपास पर पूर्व पार्षद के पति बिजेंद्र सिंह मलिक को रविवार को बिजली के काफी बिल पड़े हुए दिखाई दिए। बिजेंद्र सिंह ने उन बिलों को उठाकर देखा तो वह शास्त्री नगर के अप्रैल-जून 18 के बिल थे और उनकी गिनती करने पर पता चला कि वह 950 बिल हैं। यह बिल 14 जून को जारी किए गए थे, जिनको भरने की आखिरी तारीख 2 जुलाई थी। इसके बावजूद बिजली निगम के ठेका कर्मियों ने बिलों को बांटने की जगह सड़क पर फेंक दिया गया। उन बिलों को बिजेंद्र मलिक शास्त्री नगर में लेकर पहुंचे और वहां उनमें से लगभग 200 बिल बांट दिए। लेकिन बिल भरने की आखिरी तारीख होने के कारण उपभोक्ता उनको भर नहीं सके और उनपर 100-200 रुपये तक लेट चार्ज लग गया। वहीं बिजली निगम की इस तरह की लापरवाही के कारण बिजेंद्र मलिक सड़क पर फेंके गए बिलों को लेकर डीसी के पास पहुंच गए। वहां डीसी को पूरे मामले के बारे में बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई। डीसी विनय सिंह ने बिजली निगम के अधिकारियों की क्लास लगाई और इस तरह की लापरवाही करने वाले ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए गए।
विज्ञापन

--
ठेका कर्मी न रीडिंग लेते, न बिजली के बिल बांटते
बिजली निगम ने घर-घर जाकर मीटर से रीडिंग लेने के साथ ही बिल बांटने का ठेका दिया हुआ है। लेकिन ठेकेदार के कर्मी इस कदर उपभोक्ताओं का उत्पीड़न कर रहे हैं कि उपभोक्ताओं को बिजली निगम के कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं और उनको हर महीने लेट चार्ज लगने पर ज्यादा बिल भरना पड़ता है। ठेका कर्मी किसी भी जगह मीटर की रीडिंग लेने नहीं जाते है और वह खुद ही अंदाजे से रीडिंग दर्ज कराकर बिल जारी करा देते हैं। जिससे रीडिंग बढ़ती जाती है और जब कभी मीटर की कोई कर्मी जाकर रीडिंग लेता है तो वह बहुत ज्यादा होने से बिल कई गुना पहुंच जाता है। इस तरह एक साथ भारी भरकम बिल आने से उपभोक्ताओं की हालत खराब हो जाती है। वहीं शहर में किसी भी जगह बिल नहीं बांटे जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को पहले बिल निकलवाने को चक्कर काटने पड़ते है और उसके बाद भी लेट चार्ज लग जाता है।
विज्ञापन

--
बिलों पर उपभोक्ताओं का पता गलत है, जिस कारण वह घरों तक नहीं पहुंच रहे हैं। उनका लेट चार्ज माफ किया जाएगा। वहीं बिल सड़क पर फेंकने के बारे में पता किया जा रहा है और इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- जेसी शर्मा, एक्सईएन सिटी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें