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रात में लाइन में लगे थे 200 सिलिंडर, 24 घंटे बाद कर्मचारी बोले - यहां ऑक्सीजन नहीं मिलेगी

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अंकित चौहान
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सोनीपत। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच ऑक्सीजन की किल्लत से हालात खराब हो रहे हैं, लेकिन अपनों की जिंदगी बचाने के लिए लोग 24-24 घंटे तक ऑक्सीजन लेने के लिए खड़े रहते हैं। उसके बाद भी ऑक्सीजन नहीं मिली तो उनकी आंखों से आंसू निकलने लगते हैं। सोनीपत में इस समय कुछ ऐसा ही हाल है और ऑक्सीजन लेने को जिमखाना क्लब में आधी रात को करीब 200 सिलिंडर लाइन में लगा दिए जाते हैं। उनकी परेशानी को समझे बिना ही अचानक ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं देने की बात कहकर मरीजों के परिजनों को वापस भेज दिया जाता है। वहां से सोमवार को ऐसे ही सैकड़ों लोगों को वापस भेज दिया गया, जबकि वह अपनों की जिंदगी बचाने के लिए एक सिलिंडर लेने को गिड़गिड़ाते रहे। उसके बाद भी उन्हें सिलिंडर नहीं दिया गया।
कोरोना का प्रकोप बढ़ने पर जहां ऑक्सीजन की कमी में मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है, वहीं अब लोगों ने मरीजों के लिए घर में ऑक्सीजन सिलिंडर रखकर उपचार शुरू करा दिया है। वहीं किसी अस्पताल में मरीज को इस शर्त पर भर्ती किया जा रहा है कि ऑक्सीजन की व्यवस्था उनके परिजनों को करनी होगी। ऐसे ही होम आइसोलेशन में उपचार करा रहे मरीजों व अस्पताल में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने तीन दिन पहले एक व्यवस्था कराई थी। इसके तहत अगर किसी कोरोना मरीज का ऑक्सीजन लेवल गिरता है तो उसके परिजनों को डॉक्टर से पर्चे पर यह लिखवाकर लाना होगा कि मरीज की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत है। यह लिखवाकर लाने वाले मरीजों के परिजनों को जिमखाना क्लब से सिलिंडर दिए जा रहे थे। वहां करीब 50 सिलिंडर प्रतिदिन दिए जा रहे थे, जबकि वहां करीब 200 मरीजों के परिजन सिलिंडर लेने पहुंच रहे थे। इस तरह सिलिंडर के लिए 24 घंटे तक भी वहां रहना पड़ता था। जिमखाना क्लब में सोमवार सुबह भी मरीजों के परिजनों ने सिलिंडर की लंबी लाइन लगाई हुई थी, जिनमें कई ऐसे लोग भी थे, जो रविवार सुबह वहां सिलिंडर लेने पहुंचे थे तो कोई रविवार रात को सिलिंडर लेने के लिए वहां पहुंच गया था। उन सभी ने अपने सिलिंडरों को लाइन में लगाया हुआ था और उनको उम्मीद थी कि इतने घंटों से वहां खड़े होने के बाद जरूर अपनों की जान बचाने के लिए एक सिलिंडर मिलेगा, लेकिन जिमखाना क्लब में सिलिंडर बांटने में लगाए गए कर्मियों ने लोगों को अचानक इनकार कर दिया कि अब वहां से ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं मिलेंगे। इससे वहां सिलिंडर लेने पहुंचे लोग मायूस हो गए और अपनों की जिंदगी बचाने की बात कहते हुए गिड़गिड़ाने लगे। उसके बावजूद किसी को सिलिंडर नहीं दिया गया और वहां से लोग आंखों में आंसू लिए लौट गए।
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यह बोले मरीजों के तीमारदार
मैं सुबह छह बजे से यहां खड़ा हुआ था। हमारे रिश्तेदार अस्पताल में भर्ती हैं। यहां पांच घंटे तक खड़ा रखने के बाद कहा जा रहा है कि अब यहां से सिलिंडर नहीं मिलेगा। हम भटकते हुए यहां इस उम्मीद में आए थे कि आखिर यहां ऑक्सीजन मिल जाएगी, लेकिन अब यहां भी मना कर दिया गया।
- मोहित, निवासी रोहिणी दिल्ली
मेरे परिवार के सदस्य बीमार हैं और उनकी हालत खराब है। इसलिए ऑक्सीजन लेने को कल सुबह नौ बजे आया था और उसके बाद से यहां खड़े हुए हैं। अब अचानक बोल दिया कि सिलिंडर नहीं मिलेगा, जबकि कल से यह आश्वासन दिया जा रहा था कि सिलिंडर मिल जाएगा। - अजय, निवासी ओमेक्स सिटी
सरकारी सिस्टम पूरी तरह से फेल हो चुका है। मैं दिन निकलते ही यहां आ गया था, लेकिन उसके बावजूद सिलिंडर नहीं मिल सका। यहां मुझसे पहले भी रात से लोग ऑक्सीजन लेने के लिए खड़े हुए हैं। प्रशासन की ओर से सही जानकारी नहीं दी जाती है और प्रशासन के कारण लोगों की जान जा रही है।
- जतिन, डेंबला निवासी गीता भवन
मेरे भाई की बेटी बीमार है और उसका ऑक्सीजन लेवल गिरता जा रहा है। मैं सुबह ही सिलिंडर लेकर यहां आ गया था, लेकिन उसके बाद भी सिलिंडर नहीं दिया गया। हर कोई एक-दूसरे पर टालकर अपना पीछा छुड़ा रहा है। डीसी कार्यालय भी फोन करके जानकारी मांगी, लेकिन वह बात भी नहीं सुनते हैं। अधिकारियों की लापरवाही के कारण व्यवस्था बिगड़ी हुई है।
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- अमित निवासी सेक्टर 15
ऑक्सीजन का गलत इस्तेमाल हो रहा था : डीसी
ऑक्सीजन का गलत इस्तेमाल हो रहा था, इसलिए ही जिमखाना क्लब से ऑक्सीजन सिलिंडर देने बंद कर दिए गए हैं। इस तरह किसी को सिलिंडर नहीं दिए जाएंगे। मरीजों को भर्ती करने के लिए ऑक्सीजन बेड तैयार कराए जा रहे हैं और किसी को दिक्कत होगी तो वहां भर्ती किए जाएंगे।
- श्यामलाल पूनिया, डीसी
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