अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। लिवासपुर के किसान के बेटे को डेंगू बताकर छह दिन अपने यहां भर्ती रखकर साढ़े चार लाख रुपये वसूलने वाले दिल्ली रोड स्थित अस्पताल की परेशानी बढ़ सकती है। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग की टीम की जांच को अटकाने के लिए आरोपी अस्पताल ने अब नई कहानी तैयार कर दी है और अस्पताल के डायरेक्टर ने उस डॉक्टर के वहां से छोड़कर चले जाने की बात कही है, जिसने युवक को डेंगू बताकर उपचार किया है। इस मामले की जांच कर रही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल डायरेक्टर के बयान लिए तो उसने अपने बयान में यह बात टीम को बताई। अस्पताल डायरेक्टर के अलावा भी बहालगढ़ के एक अस्पताल, लैब संचालक समेत पांच के बयान दर्ज किए गए है और इन सभी ने जांच टीम को 300 पेज का रिकार्ड सौंपा है। डॉक्टरों की टीम अभी इसकी जांच कर रही है और इसमें जल्द ही रिपोर्ट सौंपने की बात कही गई है।
लिवासपुर के रहने वाले किसान जगत सिंह ने अपने बेटे विजय को डेंगू की शिकायत होने पर सबसे पहले बहालगढ़ के अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उसे डेंगू बताकर दूसरे अस्पताल में लेकर जाने के लिए कहा गया। उसके बाद 27 सितंबर को किसान जगत सिंह ने अपने बेटे को दिल्ली रोड स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया था। उसका आरोप है कि उस अस्पताल में डॉक्टर उसके बेटे की कम प्लेटलेट्स बताकर इलाज करते रहे और उनसे लगातार रुपये लेते रहे। उस अस्पताल में उनका बेटा 3 अक्टूबर तक भर्ती रहा, लेकिन वह खुद ही घूमता-फिरता रहा और उसके बावजूद डॉक्टर उसकी प्लेटलेट्स केवल 5 हजार बताते रहे। इस तरह अस्पताल में केवल 6 दिन के साढ़े चार लाख रुपये का बिल भरवा लिया गया। इस तरह शक होने पर जब उन्होंने बेटे की जांच एक लैब पर कराई तो उसकी प्लेटलेट्स 51 हजार निकली। उसके बाद उसने बेटे का दूसरी जगह उपचार कराया और वह दो दिन में ठीक हो गया। जगत सिंह की इस शिकायत के आधार स्वास्थ्य विभाग की कमेटी मामले की जांच कर रही है, जिसमें शुक्रवार को कमेटी ने दिल्ली रोड स्थित अस्पताल के डायरेक्टर, बहालगढ़ के अस्पताल, लैब संचालक समेत छह को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था।
300 पेज का रिकार्ड सौंपा, डॉक्टर के अस्पताल छोड़कर जाने की बात कही
स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम में शामिल उप सिविल सर्जन डा. आदर्श शर्मा, डा. सीताराम ने बताया कि जिन अस्पताल संचालकों व लैब संचालकों को बुलाया गया था, उन सभी ने अपने बयान दर्ज कराए है। इन सभी ने 300 पेज का रिकार्ड सौंपा है, जिसकी जांच की जाएगी और उनकी जांच के लिए टीम में फिजीशियन डा. सुशील जैन व ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण क ो भी शामिल किया गया है। वहीं डा. आदर्श शर्मा ने बताया कि दिल्ली रोड स्थित अस्पताल के मेडिसिन डायरेक्टर ने अपने बयान दर्ज कराए है, जिसने कहा है कि जिस डॉक्टर ने डेंगू पीड़ित का उपचार किया था। वह अस्पताल से नौकरी छोड़कर चला गया है, जिसपर टीम ने उसके ज्वाइन करने से लेकर नौकरी छोडने तक के सभी कागजात मांगे है। इस तरह उस छोड़कर जाने वाला डॉक्टर व अस्पताल का लैब टैक्रिशियन जांच में शामिल नहीं हुआ है, जिनको जल्द ही जांच में शामिल होने के लिए कहा गया है।
अस्पताल पर होनी चाहिए कड़ी कार्रवाई: शिकायतकर्ता
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बयान दर्ज कराने के लिए शिकायतकर्ता जगत सिंह व उनके बेटे विजय को भी बुलाया था। जहां विजय ने बताया कि उसके लिए जितने लोगों का खून निकाला जा रहा था, उसे सभी की जानकारी है और उसको ज्यादा खून लेकर आधा भी नहीं चढ़ाया गया। वहीं उसके पिता जगत सिंह ने अधिकारियों से अस्पताल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही है। अब जांच कमेटी एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और उसके बाद ही तय होगा कि अस्पताल के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।