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प्रमोशन टेस्ट में पहले फेल हो चुके असिस्टेंट प्रोफेसरों ने लिखी राज्यपाल को चिट्ठी

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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल छात्रों को शिक्षा देने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर अपने प्रमोशन के टेस्ट में खुद ही फेल हो चुके हैं। उनकी इस शिक्षा प्रणाली की पोल उस समय खुली, जब उन असिस्टेंट प्रोफेसरों ने राज्यपाल के साथ ही सरकार व वीसी के नाम चिट्ठी लिखी। यह चिट्ठी अब दोबारा प्रमोशन के लिए इंटरव्यू होने के बाद बंद हुए लिफाफे नहीं खोलने का आरोप लगाते हुए लिखी गई थी। जिसके बाद उनका रिकार्ड निकलवाया गया तो उनके पुराने टेस्ट की कहानी सामने आ गई। हालांकि वीसी जल्द ही होने वाली ईसी की अगली मीटिंग में लिफाफे खुलवाकर इंटरव्यू पास करने वाले असिस्टेंट प्रोफेसरों के प्रमोशन पर मुहर लगाने की बात कह रहे हैं।
प्रमोशन के लिए 100 में 50 नंबर लाना अनिवार्य
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी में समय-समय पर असिस्टेंट प्रोफेसरों के प्रमोशन के लिए कमेटी गठित करके टेस्ट किया जाता है, जिसमें उनका इंटरव्यू लेने के साथ ही शिक्षा के स्तर को देखा जाता है। प्रमोशन के लिए यूजीसी व यूनिवर्सिटी के नियम बने हुए हैं और उन नियमों के आधार पर प्रमोशन किया जाता है। इनमें रिसर्च में भागीदारी के आधार पर 50 नंबर, शिक्षा के क्षेत्र में जानकारी के आधार पर 30 नंबर तो इंटरव्यू के 20 नंबर निर्धारित होते हैं। इस तरह 100 नंबर का पूरा टेस्ट होता है, जिसमें से 50 नंबर लाने वाले को प्रमोशन के लायक समझा जाता है और उसकी स्वीकृति दी जाती है।
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दोबारा टेस्ट के बाद प्रमोशन लिफाफे में बंद
यूनिवर्सिटी में तीन साल पहले असिस्टेंट प्रोफेसर के प्रमोशन के लिए यह पूरी प्रक्रिया की गई, जिसमें ऐसे कई असिस्टेंट प्रोफेसर थे जो प्रमोशन का टेस्ट पास नहीं कर सके थे। हालात यहां तक थे कि टेस्ट पास करने के लिए जरूरी 50 नंबर के आसपास तक भी वे नहीं पहुंच सके। यह सब कुछ उस समय खुलकर सामने आया, जब उन असिस्टेंट प्रोफेसरों के एक महीने पहले ही प्रमोशन के लिए दोबारा टेस्ट हुए और उनका प्रमोशन लिफाफे में बंद कर दिया गया। उन लिफाफों को अचानक की गई ईसी की मीटिंग में नहीं खोला गया था। प्रमोशन नहीं करने के आरोप लगाते हुए उन्होंने राज्यपाल, सरकार, वीसी व रजिस्ट्रार के नाम पत्र लिख दिया गया। उसके बाद ही वीसी प्रो. टंकेश्वर कुमार ने उनका रिकार्ड निकलवाया और उसमें पता चला कि वह पहले फेल हो चुके हैं। यह खुलासा होने से ऐसे असिस्टेंट प्रोफेसरों की शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है।
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मेरे पास एक पत्र आया है जो राज्यपाल के नाम है। उसे मैंने रख लिया है और उसका जवाब भी दे दिया गया है। उस पत्र को भेजने वालों में ऐसे भी असिस्टेंट प्रोफेसर हैं जो पहले टेस्ट में फेल हो चुके हैं। उस पत्र में यह नहीं लिखा गया कि वह पहले फेल हो चुके थे। हालांकि अगली ईसी की मीटिंग में प्रमोशन के लिफाफे खोले जाएंगे और जिनके प्रमोशन होने होंगे, उन पर मुहर लगा दी जाएगी।
-प्रो. टंकेश्वर कुमार, वीसी
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