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हांसी से जीप में लटककर रोहतक पहुंचा, वहां से प्राइवेट बस में सोनीपत, टेंपू में नांदनौर पहुंचे

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अमर उजाला ब्यूरो
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सोनीपत। सरकार की ओर से प्राइवेट बसों के लिए परमिट जारी किए जाने के विरोध में रोडवेज कर्मियों की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी रही। पांच दिन से रोडवेज बसों का चक्का जाम होने से यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही रही है। उन्हें प्राइवेट वाहनों में लटककर सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है। विभाग की ओर से प्राइवेट बसें चलाने के बाद भी यात्रियों को सुविधा पूरी तरह नहीं मिल सकी। वहीं कई रूटों पर यात्री नहीं मिलने से एक दिन चलकर ही 17 प्राइवेट बसें बंद हो गई। इस तरह 88 स्कूली व प्राइवेट बसों में केवल 71 ही सड़कों पर चल सकीं।
रोडवेज बसों की हड़ताल के कारण स्कूली व प्राइवेट बसें जरूर चला दी गई है, लेकिन ऐसे भी रूट है। जिनपर बस में यात्री सफर नहीं कर पा रहे है। इनमें लंबे रूट सबसे ज्यादा है, क्योंकि जिन बसों को हायर किया गया है। उनको छोटे रूटों पर ज्यादा चलाया जा रहा है। ऐसे में दूर जाने वाले यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ऐसे में यात्री घर से जरूर निकले, लेकिन उनको अपने रिश्तेदारों या परिजनों के पास तक पहुंचने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी।
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अब तक एक करोड़ रुपये का नुकसान, 17 प्राइवेट बसें हुई बंद
पांच दिन की हड़ताल के चलते रोडवेज को अब तक करीब एक करोड़ रुपये का चूना लग चुका है। विभाग की ओर से शुक्रवार को लोगों की सुविधा के लिए 54 प्राइवेट बसें चलाई गई थी। विभिन्न मार्गों पर यात्री नहीं मिलने के करण उसमें से शनिवार को 17 बसें बंद करनी पड़ी। लोगों को आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शनिवार को पांचवें दिन कर्मियों के धरने पर गन्नौर से कांग्रेस विधायक कुलदीप शर्मा ने समर्थन दिया।
बस में ज्यादा यात्री बैठाई, होमगार्ड नहीं काट सका टिकट
विभाग की ओर से शुक्रवार को प्राइवेट बस चलाई गई। जिसमें परिचालक के तौर पर एक होमगार्ड को तैनात किया गया। सोनीपत से प्राइवेट बस में होमगार्ड ने सवारियां बैठाई। बहालगढ़ जाकर बस में क्षमता से ज्यादा सवारी भर ली। सभी यात्रियों से पैसे तो ले लिए, लेकिन होमगार्ड यात्रियों की चार टिकट काट पाया। खेवड़ा के पास रोडवेज के इंस्पेक्टर रामधारी ने जब बस की चेकिंग की तो यह बात सामने आई। इस पर इंस्पेक्टर रामधारी ने मामले की शिकायत जीएम रोडवेज को दी। रोडवेज ने कार्रवाई के लिए पत्र होमगार्ड के कमांडेंट को लिखा।
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परेशान होकर बोले यात्री-
हांसी से नांदनौर में रिश्तेदार से मिलने आया था। रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के चलते हांसी से जीप में लटककर रोहतक पहुंचा। इसके बाद रोहतक से प्राइवेट बस में सवार होकर सोनीपत आया। फिर सोनीपत से टेंपू में सवार होकर नांदनौर रिश्तेदार के पास पहुंचा। रोडवेज बस नहीं मिलने से परेशानी हुई। इस तरह वापस जाते समय टेंपू में बैठकर सोनीपत पहुंचा हूं। -अमन कुमार निवासी हांसी
किसी काम से कोर्ट में जाना है। घर से सोनीपत कोर्ट में आने के लिए हड़ताल के चलते रोडवेज बस नहीं मिली। कई जगहों पर प्राइवेट वाहन पकडने में परेशानी हुई। पानीपत से मुरथल के लिए इको वैन में सवार हुआ। इसके बाद मुरथल से आटो में सवार होकर सोनीपत पहुंचा। बस अड्डे के बाहर आटो पकड़कर कोर्ट में जाना पड़ा। -प्रमोद कुमार निवासी पानीपत
गांव से रोजाना शहर में कोचिंग लेने आना पड़ता है। पांच दिन से रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के चलते आने-जाने में परेशानी हो रही है। प्राइवेट बसों में जगह नहीं मिलने पर कई बार खिड़कियों में लटककर सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। -सुखसागर निवासी गांव बरोणा
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बैंक में सीपीओ के पद पर तैनात हूं। सोनीपत के एक बैंक में किसी काम से आया था। करनाल से सोनीपत आने के लिए तीन बार वाहनों को बदलने को मजबूर होना पड़ा। पहले करनाल से पानीपत प्राइवेट बस में सवार हुआ। इसके बाद इको वैन में सवार होकर मुरथल हाइवे पर पहुंचा। वहां से आटो में सवार होकर सोनीपत पहुंच पाया। -राजेंद्र निवासी करनाल
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