सोनीपत। नगर निगम से जिन 13 गांवों को एक साल पहले नगर निगम से बाहर किया गया था, उनकी लगभग 2200 एकड़ जमीन को निगम ने पंचायतों के नाम वापस कर दिया है। पंचायतों के 157 करोड़ रुपये का हिसाब और इसमें से कोई रुपया अभी तक किसी पंचायत के खाते में नहीं पहुंचाया गया है। निगम से भले ही इन गांवों को बाहर कर दिया गया हो। लेकिन इन गांवों में अब स्थिति विकट है। यहां किसी भी गांव में एक साल से कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ है और इन गांवों में सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमराई हुई है। सीएम मनोहर लाल तक गांवों के लोग गए और उनको स्थिति से अवगत कराने पर डीसी व हुडा के अधिकारियों को सफाई के साथ ही अन्य कार्य कराने के निर्देश दिए गए। इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ अब दोबारा से गांवों के लोग सीएम से मिलकर अफसरों की शिकायत करेंगे।
क्या है पूरा मामला
नगर निगम जुलाई 2015 में बनने के साथ ही 26 गांवों को इसमें शामिल किया था। उसके बाद गांवों के कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि निगम ने गांवों का 157 करोड़ रुपया और 3700 एकड़ पंचायती जमीन को ट्रांसफर कराकर अपने पास रख लिया है। उसके बावजूद गांवों में विकास कार्य नहीं कराए गए तो गांवों में प्रापर्टी टैक्स, बिलों में एमसी टैक्स आदि लगाने शुरू कर दिए। इस कारण गांवों को निगम से बाहर निकालने की मांग की गई थी और सभी जन प्रतिनिधियों व नेताओं से मिलकर ज्ञापन दिया था। वहीं समिति के लोग हरियाणा भवन में सीएम से मिले थे और उसके बाद 52 दिन तक शहर के अग्रसेन चौक पर धरना दिया था। इस मामले में 13 गांवों को निगम से बाहर करने की 2 जून 18 को घोषणा कर दी गई थी और इसमें कुछ समय बाद ही अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। तभी से गांवों की हालत खराब हो रही है, क्योंकि नगर निगम ने पंचायतों का रुपया नहीं लौटाया।
ऐसे हुआ दोबारा से निगम की सीमा का निर्धारण
नगर निगम से मुकीमपुर, दिपालपुर, खेवड़ा, हरसाना, नसीरपुर बांगर को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है। वहीं मुरथल, नांगल खुर्द, कुमासपुर, किशोरा, चौहान जोशी, बहालगढ़, असावरपुर, बैंयापुर गांव की आबादी वाला क्षेत्र बाहर किया गया है, लेकिन इनकी खेती व अन्य कुछ जमीन नगर निगम में रहेगी। इनके अलावा बढ़खालसा, ककरोई, महलाना, भिगान, हसनपुर, इब्राहिमपुर कुराड के कुछ हिस्से को नगर निगम में शामिल किया गया है।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
नगर निगम से गांवों को बाहर निकालने को लेकर कुमासपुर गांव के प्रेम, अजय, जयसिंह, किशोरा के महिपाल, राजेश ने हाईकोर्ट में केस भी डाला है। जिन्होंने अपने केस में मुरथल, कुमासपुर, किशोरा व नांगल खुर्द का जिक्र करते हुए कहा है कि इन गांवों को नगर निगम क्षेत्र से गलत बाहर किया गया है। जबकि नगर निगम में रहते हुए हर तरह से बेहतर सुविधा मिल रही थी और वहां विकास भी काफी शुरू हो गया था। वहीं दूसरा केस कुमासपुर के सतपाल, जगबीर, ओमप्रकाश, प्रेम, चरण सिंह, राजू आदि ने हाईकोर्ट में डाला है, जिसमें सभी गांवों को लेकर कहा गया है कि नगर निगम में शामिल करके गांवों पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिया गया है। दोनों याचिकाओं में गांवों को फिर से निगम में शामिल करने की मांग की गई है।
पहले गांवों को निगम से बाहर कराने के लिए आंदोलन करना पड़ा था और अब गांवों में विकास कार्य कराने के लिए लगे हुए है। अधिकारियों और सीएम से मुलाकात के बाद भी समाधान नहीं किया जा रहा है। गांवों में अभी तक विकास कार्य नहीं हुए, यहां सफाई व्यवस्था भी ठप पड़ी है।
- रामकिशन फौजी, खेवड़ा।
सीएम से मिलकर बताया गया था कि किस तरह से अधिकारी गांवों की समस्याओं का समाधान नहीं कर रहे है। जिसपर सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि गांवों में कार्य कराए जाए। इसके बावजूद अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है, जबकि असावरपुर गांव को हुडा ने गोद लिया है। अधिकारी काम अधूरे छोड़कर ध्यान नहीं दे रहे है। - हरिप्रकाश आंतिल, असावरपुर।
गांवों को निगम से बाहर कर दिया गया, लेकिन इनमें एक साल बाद भी कोई विकास नहीं कराया गया है। गांवों का रुपया भी निगम ने अभी तक नहीं दिया है, जिससे उस रुपये से कुछ विकास हो सके। इस तरह से अधिकारी काम में लापरवाही बरत रहे है तो सफाई व्यवस्था भी नहीं दिख रही है।
- हवा सिंह पहलवान, दीपालपुर।
गांवों में एक साल से कोई विकास कार्य नहीं कराया गया है। बल्कि मुरथल में कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है, जिससे गांव को कूड़ाघर बनाया जा सके और उसकी बदबू व मक्खियों से लोग परेशान हो जाए। इस तरह से अधिकारी ही लोगों को परेशान कर रहे है, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
-नरेंद्र कोच, मुरथल।
नगर निगम से बाहर किए गए गांवों में ग्राम सचिव तैनात कर दिए गए हैं। उनके लिए बजट आते ही विकास कार्य शुरू करा दिए जाएंगे। निगम की ओर से अभी तक कोई रुपया भी नहीं मिला है, जिससे विकास शुरू करा सके। -एनएस धनखड़, डीडीपीओ।