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12 घंटे तक धधकती रही आग, 15000 लीटर का टैंक फटता तो तबाह हो जाता राई औद्योगिक क्षेत्र

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अमर उजाला ब्यूरो
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सोनीपत। पेंट फैक्टरी में लगी आग की वजह से राई औद्योगिक क्षेत्र राख हो सकता था। पेंट फैक्टरी के बेसमेंट में 15 हजार लीटर का केमिकल टैंक था। अगर घटना के दौरान वह फट जाता तो राई औद्योगिक क्षेत्र ही तबाह हो जाता। वहीं फैक्टरी में रखे केमिकल के भरे ड्रम और पेंट के डिब्बों में आग पकड़ने से फायर ब्रिगेड को आग पर काबू पाने में काफी परेशानी हुई। पहले चार घंटे तक तो आग लगातार बढ़ती ही रही। केमिकल व पेंट के जलने के बाद ही आग कम होनी शुरू हुई।
रीयल पेंट फैक्टरी में रविवार तड़के चार बजे आग लगने के बाद भगदड़ मच गई। कुछ देर में ही फैक्टरी से उड़ता काला धुआं हाईवे तक आसमान में फैल गया। आग बढ़ती देख फायर ब्रिगेड की टीम ने सोनीपत के अलावा गन्नौर, गोहाना व दिल्ली के नरेला से भी फायर बिग्रेड की गाड़ियों को बुलाया गया। लगातार गाड़ियां आग बुझाने के लिए पानी लेकर आ रही थी। जब गाड़ियों के पहुंचने में थोड़ा समय लगने लगा तो तुरंत रोहतक व पानीपत के समालखा से भी फायरब्रिगेड की गाड़ियां बुलवाई गई। पहले चार घंटे तो फैक्टरी क्षेत्र में हालात बेकाबू ही रहे। आग फैक्टरी में रखे पेंट के डिब्बों व ड्रम में पहुंच चुकी थी। उनके जलने के बाद ही आग का रौद्र रूप कुछ कम होना शुरू हुआ। करीब 17 गाड़ियों के लगातार प्रयास करने से दोपहर के एक बजे तक आग शांत हो सकी। हालांकि उसके बाद भी कमरों के अंदर से धुआं निकलने व अंदर के क्षेत्र में आग की लपट उठने का सिलसिला जारी रहा। जिन पर फायरब्रिगेड की टीम पानी की बौछार करती रही। देर शाम तक आग पर काबू पाया गया, लेकिन हल्का धुआं निकालता दिखाई दिया।
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टैंक में लगती आग तो तबाह हो जाता क्षेत्र
पेंट फैक्टरी के अंदर अंडर ग्राउंड करीब 15 हजार लीटर का केमिकल टैंक बना हुआ बताया गया। वहां मौजूद लोगों का कहना था कि अगर आग की लपटे टैंक तक पहुंच गई तो इससे राई औद्योगिक क्षेत्र का बड़ा हिस्सा बर्बाद हो जाएगा। टैंक में आग लगने से वह फट जाता तो आसपास का पूरा क्षेत्र तबाह हो जाता। हालांकि फायर ब्रिगेड के कर्मियों ने काफी सूझबूझ दिखाई और बेसमेंट की आग पर पहले काबू पाया।

आसपास की कई फैक्टरियां भी चपेट में आई
पेेंट फैक्टरी में काफी ज्वलनशील केमिकल व पेंट होने के कारण ही आग शुरुआत में लगातार बढ़ती ही चली गई। जिससे आग के कारण आसपास की फैक्टरी में भी चपेट में आ गई। आग से पेंट फैक्टरी के तीन प्लाट 291, 292 व 293 के बाद उसके पिछले हिस्से में बनी फैक्ट्रियों तक आग पहुंच गई। जिससे अतुल्य मेडिकल फैक्टरी के पहले फ्लोर पर आग लग गई। फैक्टरी के कर्मियों ने वहां रखे डिब्बे उठाकर बाहर पहुंचाए। आग से पिछले हिस्से में प्लाट नंबर 309, 310, 311 व 312 में नुकसान हुआ है।

छह माह पहले ही आया था विरेंद्र राम
फैक्टरी में आग लगने के बाद से लापता विरेंद्र राम बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है। वह छह माह पहले ही पेंट फैक्टरी में काम करने के लिए आया था। उसके गांव रणधीर झा इस फैक्टरी में लंबे समय से काम कर रहा था। वही उसे लेकर आया था। दिल्ली के समयपुर बादली में रह रही विरेंद्र राम की बेटी ममता ने बताया कि उसके पिता को रणधीर लेकर आया था। फैक्टरी से तीन शवों के अवशेष मिलने के बाद ममता के साथ उनके पति व चाचा की आंखों से भी आंसुओं की धारा फूट पड़ी। वहीं रणधीर के भाई सुधीर झा की आंखों से भी आंसू छलक रहे थे। उधर, परिजनों ने हादसे का शिकार हुए कर्मियों के लिए मुआवजे की मांग की है।

सात माह घर रहने के बाद लौटा राकेश
हादसे में जान बचाने के लिए छत से कूदे राकेश ने बताया कि वह पेंट फैक्टरी में मिक्सर पर काम करता था। उसने बताया कि वह छह साल पहले फैक्टरी में काम करने के लिए आया था। उसने यहां पांच साल तक काम किया। बाद में वह सात माह तक अपने घर बिहार में रहा। अब दो माह से वह वापस फैक्टरी में काम करने के लिए आया था। अब वह हादसे में उसके दोनों पैर व हाथ टूट गए।
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क्षतिग्रस्त पाइप से बर्बाद होता रहा पानी
आगजनी पर काबू पाने में लगी फायरब्रिगेड की कई गाडिय़ों के पाइप क्षतिग्रस्त थे। जिससे उनमें से पानी सड़क पर बहकर ही बर्बाद होता रहा। आगजनी पर काबू पाने में प्रेशर बढ़ाते ही जगह-जगह फटे पाइप से पानी की बौछार सड़क पर ही गिरने लगती थी।
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