अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मां-बेटी की संघर्ष की कहानी
मां ने मजदूरी कर बेटी को हॉकी किट दिलाई, बेटी ने भूखे पेट प्रैक्टिस कर देश को मेडल दिलाया
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। महिलाएं अगर कुछ करने की ठान तो उनको मंजिल तक पहुंचने से कोई रोक नहीं सकता है। ऐसी ही सोनीपत के वेस्ट रामनगर में रहने वाली सावित्री देवी और उनकी बेटी नेहा गोयल के साथ हुआ जिन्होंने जिंदगी में संघर्ष कर मुकाम हासिल किया है। जिस सपने को मां-बेटी ने मिलकर देखा था, उस सपने को पूरा करके बेटी देश का नाम रोशन करने में लगी है। नेहा ने तब हॉकी खेलने का सपना संजोया जब घर में खाने को रोटी तक नहीं थी। बेटी के भविष्य के लिए सावित्री देवी ने दूसरों के घरों में झाडू़ लगाया जब इससे भी गुजारा नहीं हुआ तो फैक्टरी में मजदूरी कर चमड़ा काटकर बेटी को हॉकी की किट दिलवाई। बेटी ने भूखे पेट तक प्रैक्टिस करके भारतीय महिला हॉकी टीम तक पहुंची। नेहा गोयल के गोल के सहारे ही देश ने कई मेडल जीते हैं, जिनमें एशियन गेम्स व एशियन चैंपियनशिप के मेडल भी शामिल है। वेस्ट रामनगर में रहने वाली सावित्री देवी के पति लगभग 17 साल पहले घर छोड़कर चले गए थे। जिसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनके सिर पर आ ग। इस दौरान उनकी छोटी बेटी नेहा गोयल जो तब 9 साल की थी तब घर के पास ही चलने वाली हॉकी एकेडमी में लड़कियों को खेलता देखकर खुद भी खेलने की इच्छा जताई। तब सावित्री देवी के लिए बेटी को हॉकी की प्रैक्टिस कराने के साथ ही किट व अन्य सामान दिलाने के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं थी। इसके बावजूद सावित्री ने बेटी को हॉकी खिलाने का जज्बा दिखाया और वह मजदूरी करने के साथ ही सुबह आसपास के घरों में जाकर काम करती थी। उससे मिलने वाले रुपये से सावित्री देवी ने बेटी को हॉकी खेलने भेजना शुरू कर दिया। जिसके बाद बेटी नेहा गोयल का संघर्ष शुरू हुआ और वह अपनी मां की मेहनत को बेकार नहीं जाने देना चाहती थी। नेहा शुरुआत में भूखे पेट ही प्रैक्टिस में दस घंटे तक लगी रहती थी। जिसका परिणाम यह हुआ है कि गोयल इस समय भारतीय महिला हॉकी टीम की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल है। नेहा गोयल के सहारे ही देश को पिछले साल एशियन चैंपियनशिप व एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल मिला है।
बेस्ट प्लेयर का अवॉर्ड भी जीता
नेहा गोयल ने हॉकी में जिस तेजी से मुकाम हासिल किया कि उसने 14 साल की उम्र में जूनियर नेशनल खेलने के बाद 2011 में जूनियर एशिया कप खेला और उसमें देश को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उसी साल खेले गए अंडर-21 अंतरराष्ट्रीय लाल बहादुर शास्त्री कप में भी नेहा गोयल को जगह मिली और उसमें न्यूजीलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों को हराकर देश चैंपियन बना। इसमें नेहा को बेस्ट प्लेयर का अवॉर्ड भी मिला। वर्ष-2016 में हुए साउथ एशियन गेम्स में देश को चैंपियन बनाने में नेहा गोयल का अहम योगदान रहा। रेलवे ने तीन साल पहले ही उसकी प्रतिभा को देखते हुए खेल कोटे से नौकरी दी।