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श्रद्धा, समर्पण और विश्वास ही निरंकारी मिशन का उद्देश्य : माता सुदीक्षा

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श्रद्धा, समर्पण और विश्वास ही निरंकारी मिशन का उद्देश्य : माता सुदीक्षा
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अमर उजाला ब्यूरो
गन्नौर/सोनीपत। सद्गुरु माता सुदीक्षा ने कहा कि श्रद्धा, समर्पण व विश्वास ही निरंकारी मिशन का मुख्य उद्देश्य है। इस परम भावना के चलते ही कहा जा सकता है कि मिशन का भविष्य उज्ज्वल है। सत्संग में आना महज कोई रस्म पूरी करना नहीं होता। यहां आकर ज्ञानी लोग एक-दूसरे से मिलते हैं और अच्छे भावों को अपने जीवन में ग्रहण करते हैं। सत्संग में जब गुरु आध्यात्मिक अनुभव से बोलते हैं तो उनके हर शब्द और कर्म से हमें प्रेरणा मिलती है। इसलिए वहां एकाग्रचित होकर गुरु के शब्दों को आत्मसात करना चाहिए।
वे निरंकारी मिशन के 71वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के दूसरे दिन गन्नौर व समालखा के बीच संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर संगत को मानव सेवा का संदेश दे रही थीं। समागम में देश-विदेश से चार लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं। इससे पहले सद्गुरु माता सुदीक्षा को खुले वाहन में मंच तक लाया गया। माता सुदीक्षा ने कहा कि मानव जीवन में मर्यादा को अपनाकर अनुशासन में रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्संग के दौरान मोबाइल का प्रयोग कर कुछ साधक रिकार्डिंग करने लग जाते हैं, यह सही नहीं है। इससे हमारा ध्यान सत्संग से हट जाता है। मानव को चाहिए कि वह संतों की वाणी सुनकर उसे अपने जीवन में अपनाएं। जब मानव प्रत्येक संत में निरंकार प्रभु का रुप देखकर अपने पास बैठे संत को नमन करते हैं तो उनका आशीर्वाद मानव को अवश्य मिलता है। अगर मनुष्य सत्संग से दूर होने लगता है तो संत भक्ति-भाव, समर्पण एवं विश्वास से उसे फिर से सत्संग से जुड़ने की प्रेरणा देते हैं। सद्गुरु माता सुदीक्षा ने कहा कि जब एक दीपक बुझ जाता है तो उसे भी जले हुए दूसरे दीपक से फिर से प्रज्ज्वलित किया जा सकता है।
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सेवादल की रैली रही आकर्षण का केंद्र
समागम स्थल पर रविवार को सेवादल के सदस्यों ने रैली निकालकर एकता का संदेश दिया। देश-विदेश से आए सेवादल के हजारों सदस्यों ने वर्दी पहनकर रैली में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने शारीरिक व्यायाम व मिशन के संदेश पर आधारित शारीरिक करतब प्रस्तुत कर लोगों को आकर्षित किया। साथ ही मानव सेवा ही सबसे बड़ी सेवा को लेकर मिशन का संदेश भी दिया। उन्होंने मानव सेवा को ईश्वर और सद्गुरु के प्रति भक्ति भाव प्रकट करने के प्रभावी साधन के रुप में दर्शाया। माता सुदीक्षा ने सेवादल रैली को आशीर्वाद देते हुए कहा कि सेवादल मिशन की आन, बान और शान है। निरंकारी राजमात, बाबा हरदेव सिंह जी और हजारों भक्तों ने मिशन की सेवा करने के लिए सेवादल की वर्दी पहनी है। सेवादल ने सदा मर्यादा एवं अनुशासन का पालन किया है।
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