मुरथल विवि पुरातत्व विभाग के साथ प्राचीन धरोहरों का करेगा संरक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि मुरथल का वास्तुकला विभाग जिले की प्राचीन धरोहरों का संरक्षण करेगा। विभाग ने ऐतिहासिक इमारतों की ड्राइंग तैयार की है। विवि पुरातत्व विभाग के साथ मिलकर प्राचीन धरोहरों के संरक्षण का कार्य करेगा। वास्तुकला विभाग के प्रो. विजय शर्मा व प्रो. शैलजा शिखरवार के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक इमारतों को चिन्हित किया। शहर के कामी रोड स्थित दशहरा मैदान में जर्जर स्थिति में पहुंच चुके पांडव कुआं व डाक बंगला का एक संरक्षण ड्राइंग व डिजाइन विद्यार्थियों ने तैयार किया है। इसके साथ ही प्रांगण की सुंदरता को बढ़ाने के लिए मुख्य द्वार, फव्वारे व एक वाटिका का प्रस्ताव तैयार किया है। यहां पौराणिक विशेषता को देखते हुए आने वाले सैलानियों के लिए पार्किंग व्यवस्था व टूरिस्ट सुविधाओं से संबंधित आधारभूत ढांचे का डिजाइन तैयार किया है।
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प्राचीन मुख्य द्वारों को पुन:निर्माण करवाया जाएगा
प्रो. विजय शर्मा ने कहा कि प्राचीन सोनीपत नगर के चार द्वार थाना दरवाजा, लाल दरवाजा, साबर दरवाजा व कुम्हार दरवाजा भी होते थे, जो कि अब विलुप्त हो चुके हैं। इन मुख्य द्वारों को पुनर्निर्माण करने के लिए डिजाइन का प्रारूप तैयार किया है। मुख्य द्वारों से म्यूजियम तक जाने का संरक्षण व प्लान भी विद्यार्थियों ने तैयार कर लिया है। वीसी प्रो. अनायत ने कहा कि प्राचीन इमारतों के वास्तुकला में पर्यावरण संरक्षण का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता था। वर्तमान समय के वास्तुकारों को प्राचीन वास्तुकला पद्धतियों को ध्यान में रखकर आज के भवनों के डिजाइन तैयार करने चाहिए। जिससे हम एक स्वस्थ वातावरण बनाने में योगदान प्रदान कर सकें।