सोनीपत। स्वास्थ्य विभाग की ओर से शुक्रवार को जिला कारागार व नागरिक अस्पताल में लगाए लगाए गए जांच शिविर में 14 काला पीलिया के मरीजों की पुष्टि हुई है। इसमें 12 मरीज अकेले जिला कारागार से हैं। इन सभी मरीजों के सैंपल कार्ड जांच में पॉजिटिव आने से विभाग अलर्ट हो गया है और इनके सैंपल वायरल लोड जांचने के लिए खानपुर कलां स्थित महिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जांच के लिए भेज दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर जागरूकता अभियान के तहत जगह-जगह जांच शिविर लगा रहा है। सोनीपत में खानपुर कलां स्थित भगत फूल सिंह राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में हेपेटाइटिस-बी और सी के मरीजों के सैंपल की मुफ्त जांच की जाती है। वायरल लोड जांच के बाद जिला नागरिक अस्पताल से निशुल्क दवाएं मरीज को दी जाती हैं। हेपेटाइटिस के मरीजों को एक बार में तीन माह की दवा दी जाती है। कोर्स पूरा होने के तीन माह बाद भी जांच जरूरी है। यह खतरनाक बीमारी मां से बच्चे में भी आ सकती है। इसलिए समय पर उपचार लें और इसके प्रकोप को आगे बढ़ने से रोकें। जिन मरीजों का लीवर खराब हो जाता है, उनको छह माह की दवा दी जाती है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में जिले में 1 जुलाई 2023 से 30 जून 2024 के दौरान हेपेटाइटिस-सी के 402 और हेपेटाइटिस-बी के 79 मरीज मिले हैं।
हेपेटाइटिस की पहचान
पीलिया रहना, बार-बार उल्टी आना, लीवर पर सूजन, अपच व भूख न लगना
हेपेटाइटिस-बी के मरीजों को हर साल कराना होता है टेस्ट
हेपेटाइटिस-बी एक संक्रमित बीमारी है। यह संक्रमित रक्त चढ़ाने, संक्रमित सूई का इस्तेमाल करने और असुरक्षित यौन संबंधों के कारण एक-दूसरे में फैलता है। हेपेटाइटिस बी के लक्षण जल्द नहीं दिखते हैं। लीवर पर असर दिखने के बाद इसके लक्षण सामने आते हैं। इसके बाद जांच करवाई जाती है। इसके मरीजों को हर साल टेस्ट करवाना होता है।
वर्जन
हेपेटाइटिस का इलाज संभव है। एक साल में हेपेटाइटिस-सी के 402 और हेपेटाइटिस-बी के 79 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से हेपेटाइटिस-सी के 98 और हेपेटाइटिस-बी के 12 मरीज पूर्ण रूप से ठीक हो चुके है। लोगों को समय-समय पर इसकी जांच कराते रहना चाहिए। हरियाणा सरकार हेपेटाइटिस-सी व बी के संक्रमण को रोकने के लिए प्रयासरत है। सभी जेलों में सैंपल लिए जा रहे हैं। जो कार्ड टेस्ट में संक्रमित मिलता है, उसका वायरल लोड कराया जाता है। इससे संक्रमण की सटीक जानकारी मिलती है और मरीज को उपचार शुरू किया जाता है। यह समूह में नशा करने, असुरक्षित यौन संबंध, बार्बर शॉप, एक सुई का दूसरों पर प्रयोग करने से फैलता है।
- डॉ. स्वराज चौधरी, उप सिविल सर्जन, सोनीपत