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किसी ने वैदिक प्लास्टर तो किसी ने बागवानी के क्षेत्र में कमाया नाम

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किसी ने वैदिक प्लास्टर तो किसी ने बागवानी के क्षेत्र में कमाया नाम
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। हरियाणा की खेती के सहारे देशभर में ऐसे ही अलग पहचान नहीं बनी है, बल्कि यहां के किसानों व पशुपालकों ने मेहनत व लग्न के दम पर कुछ अलग करके दिखाया है। इसलिए ही राष्ट्रपति के हाथों हरियाणा के किसानों को कृषि रत्न पुरस्कार मिला है। किसी ने जमीन से उठकर पहचान बनाई तो किसी ने उच्च शिक्षित होने के बावजूद खेती को अपनाकर नाम कमाया। खेती की नई तकनीक के बदौलत वह अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा चुके हैं। अब यह दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनने लगे हैं।
पीएचडी करने वाले डॉ. शिवदर्शन मलिक ने गोबर का वैदिक प्लास्टर बनाया
राष्ट्रपति से दो बार सम्मानित हो चुके मूलरूप से गांव मदीना फिलहाल भारत कॉलोनी रोहतक निवासी डॉ. शिवदर्शन मलिक गोबर से वैदिक प्लास्टर, टाइल, मोबाइल स्टैंड व गमले बनाते है। अपनी प्रारंभिक शिक्षा गुरुकुल से करने वाले डॉ. शिवदर्शन मलिक ने बाद केमिस्ट्री से पीएचडी तक की उच्चतर शिक्षा ग्रहण की। वह इससे पहले वर्ष 2005 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से सम्मानित हो चुके हैं। बुजुर्गों की सीख को उन्होंने वर्तमान परिदृश्य में सार्थक कर दिखा दिया है। वह कहते है कि गोबर से बने वैदिक प्लास्टर में ही नमी को पूरी तरह से खत्म करने की शक्ति है। देशी गाय के गोबर से बने वैदिक प्लास्टर की मांग लगातार बढ़ रही है। यह प्लास्टर पर्यावरण के लिए तो लाभदायक है कि भवन निर्माण कार्यों में खर्च होने वाले पानी की मात्रा को भी करीब 90 फीसदी तक कम कर देता है। वहीं, ग्रामीण स्तर पर गौवंश पालन करने वाले लोगों के लिए यह आमदनी का जरिया बनता जा रहा है। डॉ. शिवदर्शन ने बताया कि प्लास्टर के निर्माण में देशी गाय का गोबर, जिप्सम, चिकनी मिट्टी, ग्वार गम व नींबू रस का इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें पशुपालकों से 4 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से गोबर खरीदा जाता है। इससे उनकी आमदनी बढ़ती है। साथ ही इससे वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
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पारंपरिक खेती छोड़ बागवानी से तीन लाख प्रति एकड़ कमा रहे शिवशंकर
राष्ट्रपति से पुरस्कृत हुए हिसार के गांव प्रभुवाला के किसान शिव शंकर ने दिखा दिया है कि किसान अगर कुछ करने की ठान लें तो अपनी आमदनी को आठ से दस गुना तक बढ़ा सकता है। वर्तमान में प्रति एकड़ ढाई लाख रुपये तक कमाने वाले किसान शिव शंकर अब किसानों को बागवानी अपनाने और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए प्रेरित करने में लगे हुए हैं। दूर दराज के किसान भी अब उनके खेत में आकर उनके खेतीबाड़ी की जानकारी ले रहे हैं। शिव शंकर ने बताया कि उन्होंने 2005 में पारंपरिक तरीके से खेती शुरू की थी। जिसमें गेहूं व नरमा की खेती करते थे। आमदमी नाममात्र होने पर किसान समूह से जुड़ गए। जहां पर उन्हें पता लगा कि पारंपरिक खेती की बजाए बागवानी से ज्यादा आमदनी हो सकती है। जिसके बाद आधुनिक खेती शुरू की। शिव शंकर ने बताया कि खेती में सिंचाई में भारी खर्च होता था। उन्होंने पारंपरिक सिंचाई की बजाय टपका सिंचाई शुरू की। उन्होंने बागवानी को अपनाया। जिसमें अमरूद, किन्नू, मालटा, आडू, अनार, बेर, खजूर, खरबूजा की खेती शुरू की। जिसमें
दो से तीन लाख रुपये प्रति एकड़ कमा रहे हैं।
पशुपालन के शौक को व्यवसाय में बदलकर हरियाणा रत्न बनी नीतू
महेंद्रगढ़ के गांव गुढ़ा की रहने वाली नीतू यादव को शुरू से ही पशुपालन का शौक था। उनका यह शौक बाद में इस कदर उनका जुनून बन गया कि 6 पशुओं से डेयरी खोलने वाली नीतू अब 200 पशुओं की मालकिन है। उनकी डेयरी में रोजाना 2 हजार लीटर दूध का उत्पादन होता है। कई जगहों पर सम्मानित हो चुकी नीतू यादव को 7 फरवरी, 2018 को कोचिन में भी सम्मानित किया गया था। इसके अलावा वह हिसार के कृषि विश्वविद्यालय में भी सम्मानित हो चुकी हैं। नीतू ने बताया कि उसने अपने पति पवन के साथ मिलकर 2008 में काम शुरू किया था। शुरुआत में लोग बोलते थे कि साल भर में पशुओं को मंडियों में छोड़ देंगे। लेकिन उन्होंने लोगों के तानों को सकारात्मक रूप से लेते हुए अपने काम पर ध्यान दिया। दस साल में ही उनके यहां पशुओं की संख्या 200 को पार कर गई। नीतू बताती हैं कि उनकी डेयरी में करीब 150 गाय हैं। साथ ही करीब 10 भैंस हैं और अन्य बछड़े और कटड़े हैं। उनके यहां गायों की लगभग हर एक किस्म है।
खेती को उद्योग से जोड़कर किसानों को सूट-बूट में देखना चाहते है दिनेश
हरियाणा कृषि रत्न पाने वाले सोनीपत के गांव मनौली के प्रगतिशील किसान दिनेश कुमार किसानों को सामाजिक प्रतिष्ठा दिलाने के साथ ही सूट-बूट वाले किसान बनाना चाहते हैं। स्वीट कॉर्न, पॉली हाउस और केले की खेती कर नए आयाम स्थापित करने के लिए पुरस्कृत हुए दिनेश ने बताया कि राष्ट्रपति ने उनसे पूछा कि आप तो सूट-बूट में हैं और किसान नहीं लगते। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि सर मेरा मकसद ही यह है कि किसान भी सूट-बूट वाले बनें। दिनेश ने पॉली हाउस की साइंस को समझ कर ऑर्गेनिक खेती की, जिससे आमदमी कई गुना बढ़ गई। स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने वाले दिनेश ने स्वीट कॉर्न की खेती की शुरुआत वर्ष 2001 में की थी। धान व गेहूं की फसल उगाने वाले क्षेत्र में स्वीट कॉर्न की शुरूआत की। जिससे एक एकड़ वाला किसान भी साल में 4 लाख रुपये का फायदा लेने लगा। साथ ही केले के बारे में उन्होंने बताया कि जी-9 केला उत्तर भारत में सही तैयार नहीं होता। इसके लिए उन्होंने पहले तो केले की इस किस्म के लिए समय तय किया। इसके बाद आर्टिफिशियल सिंचाई, देसी उपाय के तहत दवाई, पानी और धुआं दिया। इसी वजह से 10 से 20 प्रतिशत अधिक पैदावार हासिल की। दिनेश ने बताया कि किसान को सामाजिक प्रतिष्ठा नहीं मिलती। उन्होंने अपना उदाहरण दिया कि स्नातक होते हुए नौकरी नहीं की और जब शादी के लिए रिश्ते वाले घर आते थे तो उन्हें जब यह बताया जाता कि लड़का खेती-बाड़ी ही करता है तो वह संकोच करने लगते। किसान को पेशे के तौर पर नहीं देखा जाता, जिसके कारण सामाजिक प्रतिष्ठा भी नहीं है। जिसके बाद से किसान की सामाजिक प्रतिष्ठ बढ़ाने में लगा हूं।
बासमती धान की सीधी बिजाई से मांगेराम ने बचाया पानी
राष्ट्रपति से पुरस्कृत हुए यमुनानगर के रामनगर निवासी मांगेराम सैनी ने बासमती धान में पानी की बचत के लिए धान की सीधी बिजाई तकनीक को अपनाकर किसानों को नई प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि आठ साल पहले धान की सीधी बिजाई करनी शुरू की थी। जिसके बाद सिंचाई का खर्च काफी कम हो गया। इसके बाद आसपास के 150 किसानों को धान की सीधी बिजाई के लिए प्रेरित कर इस तकनीक से जोड़ा। इससे उनकी आमदमी भी बढ़ गई। इसके साथ ही पराली का बेहतर ढंग से प्रबंधन शुरू किया। इससे बचत हुई तो अन्य किसानों को भी सिखाया। इससे खेती में मुनाफा बढ़ गया है और गुणवत्ता भी बेहतर हो गई है। सरकार ने अब 1 लाख रुपये का ईनाम देकर सम्मानित किया है। इससे आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि बासमती धान की सीधी बिजाई करने से खर्च कम हुआ और आमदनी भी दो गुना तक बढ़ गई।
सब्जी उत्पादन कर सतीश ने तीन गुना तक बढ़ाई आमदनी
गुरुग्राम के गांव मकड़ौला निवासी सतीश सब्जी उत्पादन कर अपनी आमदनी बढ़ाकर अन्य किसानों के लिए नजीर बन गए। सतीश बताते हैं कि वह पहले पारंपरिक खेती करते थे। जब मुनाफा नाम मात्र का होता था। तब उसने सब्जियों की खेती करनी आरंभ की। सब्जी की फसल में काफी समय होने लगा था। लेकिन कई प्रकार की बीमारियां और गुणवत्ता की कमी की वजह से लाभ नहीं हो पा रहा था। फिर बेंबो सेटरिंग सिस्टम से टमाटर व कई अन्य प्रकार की सब्जियां उगानी शुरू की। बांस की स्टेकिंग बनाकर टमाटर व खीरा उत्पादन किया। इससे एक तरफ जहां उत्पादन बेहतर हुआ, वहीं सब्जियों की गुणवत्ता में भी बढ़ोतरी हुई। टपका सिंचाई प्रणाली अपनाने के बाद खेती से मुनाफा और अधिक बढ़ गया। अब सरकार ने हरियाणा कृषि रत्न अवार्ड से सम्मानित किया है। इससे आसपास के किसानों का भी हौसला बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि किसानों को चाहिए कि वह आधुनिक खेती को अपनाए। इससे वह अपनी आमदमी बढ़ाने के साथ ही अन्य किसानों को भी प्रेरित कर सकेंगे।
जैविक उत्पाद और सूक्ष्म सिंचाई ने भूपेंद्र को बनाया उन्नत किसान
राष्ट्रपति से पुरस्कृत हुए रेवाड़ी जिला के भाडावास गांव के किसान भूपेंद्र सिंह को समग्र खेती विधि द्वारा जैविक उत्पाद व उत्तम जल प्रबंधन के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने भूपेंद्र ने बताया कि वह बचपन से ही खेती कर रहे हैं। शिक्षा ज्यादा ग्रहण नहीं कर पाने के चलते वह खेती से जुड़ा था। आमदनी नाम मात्र की होने के चलते उसने जैविक उत्पाद व मछली पालन को भी अपनाया। वर्ष 2000 में गेहूं की थ्रेसिंग के हाथ कटने के बाद वह दिव्यांग हो गया। उसके बाद तो उसने जीवन को पूरी तरह से बदल लिया। मछली पालन के साथ ही खेती में टपका सिंचाई को अपनाया। जिससे उनकी आमदनी बढ़ती चली गई। इससे पहले भी गुरुग्राम, सूरजकुंड व रोहतक में आयोजित एग्रो समिट में सम्मानित हो चुके हैं। उनकी पत्नी व बेटे ने उन्हें सदैव सहयोग दिया।
विधायक रवींद्र मच्छरौली खुद श्रेष्ठ कुक्कट चिकस उत्पादक बने, लोगों को दिया नया व्यवसाय
समालखा के विधायक व मच्छरोली गांव निवासी रवींद्र ने कुक्कट चिकस (मुर्गीदाना) उत्पादन को व्यवसाय के रूप में अपना कर अन्य किसानों को नई प्रेरणा दी। वह कहते है कि इससे किसान कम खर्च में अच्छी आमदमी ले सकता है। किसान को चाहिए कि वह आधुनिक खेती की तरफ आगे बढ़े। इससे किसान समाज के लिए अग्रणी की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि वह भी पहले पारंपरिक खेती करते थे। इससे महज गुजर-बसर ही हो पाता था। बाद में उन्होंने आधुनिकता की तरफ कदम बढ़ाया। कुक्कट चिकस का उत्पादन शुरू किया तो शुरुआत में ज्यादा आमदनी हो सकी। जिसके बाद उन्होंने इसके बारे में गहराई से जांच की। जिससे उनकी आमदनी लगातार बढ़ती चली गई। अब वह अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं।
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मत्स्य पालन में धर्मपाल को मिली पहचान
रोहतक के गांव चिड़ी निवासी किसान धर्मपाल को मत्स्य पालन के लिए राष्ट्रपति ने एक लाख का पुरस्कार दिया। धर्मपाल पहले पारंपरिक खेती करते थे। जब उन्हें इससे कोई फायदा नहीं हुआ तो वह मत्स्य पालन में हाथ आजमाने लगे। इसके बाद उन्होंने इसे व्यवसाय के रूप में अपनाया। जिसके बाद वह लगातार इससे आमदनी करते चले गए।
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