अमर उजाला ब्यूरो
गोहाना।
बिचपड़ी गांव में बुटाना डिस्ट्रिब्यूटरी टूटने से करीब दो हजार एकड़ भूमि जलमग्न हो गई। जिससे किसानों की गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि नहर टूटने की बार-बार सूचना देने के बाद भी सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। इस दौरान विभाग के अधिकारियों के खिलाफ रोष जताया। साथ ही उन्होंने तुरंत विशेष गिरदावरी कराकर 50 हजार रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि मोगा लगाने में गड़बड़ी होने कारण नहर टूटी है।
गांव में शुक्रवार रात करीब 12 बजे बुटाना डिस्ट्रिब्यूटरी टूटने से करीब दो हजार एकड़ जमीन जलमग्न हो गई। रात को जब गांव के लोगों को नहर टूटने की सूचना मिली तो काफी संख्या में लोग टूटी नहर को बंद करने के लिए खेतों की ओर दौड़ पड़े। लेेकिन कटाव इतना बड़ा था कि उसे पाट पाना कठिन था।
किसान, रामफल, जगदीश, आजाद पूनिया, विजय, अजय, कप्तान, नरेंद्र, जसबीर आदि ने बताया कि गशनिवार को ही डिस्ट्रिब्यूटरी का पानी बंद होना था, लेकिन रात को ही पटरी टूट जाने के कारण उनकी करीब दो हजार एकड़ फसल जलमग्न हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि नहर टूटने की सूचना बार-बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी गई, लेकिन कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। किसानों ने नहर टूटने से खराब हुई फसलों की अविलंब गिरदावरी कराने व खराब हुई फसलों का 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देने की मांग की है।
मोगा निर्माण में घटिया सामग्री लगाने से टूटी नहर
किसानों ने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग द्वारा कुछ दिन पहले नहर में मोगा लगाया गया था। जिसमें घटिया निर्माण सामग्री लगाई गई है। जैसे ही नहर में पानी छोड़ा गया, मोगा वाली जगह से नहर टूट गई। उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की है।
मोगा के साथ की गई है छेड़छाड़
गांव बिचपड़ी के पास बुटाना डिस्ट्रिब्यूटरी टूटने के पीछे मोगा के साथ छेड़छाड़ करने का मामला नजर आ रहा है। किसी ने या तो चोरी करने का प्रयास किया है या फिर जान बुझकर नहर को तोड़ने की कोशिश की गई है। मामले की जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट बनाकर जल्द से जल्द सरकार के पास भेजी जाएगी।
नवतेज सिंह, कार्यकारी अभियंता सिंचाई विभाग