सरकार के खिलाफ खड़ा हुआ हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ
-सरकार पर प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं की समस्याओं को दूर नहीं करने का आरोप लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया है और उसपर प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं की समस्याओं को दूर नहीं करने का आरोप लगाया है। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर एक माह में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वह ठोक कदम उठाएंगे। इसके लिए वह सड़क पर भी उतरने से पीछे नहीं हटेंगे।
देवडू रोड पर ऋषिकुल वर्ल्ड एकेडमी में मीटिंग बुलाई गई, जिसमें जिलेभर के 200 स्कूल संचालकों ने भाग लिया। वहां हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ सोनीपत के प्रधान अजमेर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार खुद बच्चों को शिक्षा देने में विफल साबित हो रही है, जबकि अच्छी शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रयास कर रही प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं का सहयोग करने की जगह व्यवस्था को बिगाड़ने का काम कर रही है। प्रधान अजमेर सिंह ने बताया कि सरकार ने वर्ष 2014 के चुनाव से पहले निजी विद्यालयों से वायदा किया था कि जितनी समस्याएं आ रही थी, उन सभी समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। लेकिन प्रदेश सरकार एवं शिक्षा विभाग की गतिविधि इससे उल्टा हो गई। हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ के पूर्व अध्यक्ष बिजेंद्र मान ने बताया कि शिक्षा विभाग की मनमानी के कारण शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि 134ए के तहत गत पांच वर्षों से जिन गरीब परिवारों के विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाया हुआ है, सरकार द्वारा उनकी फीस आज तक नहीं दी गई। अगर सरकार शिक्षा का ढांचा सुधारना चाहती है तो तुरंत यह फीस निजी विद्यालयों को दी जाए।
यह परेशानियां आ रहीं सामने
-स्कूल 10 वर्षों से भी अधिक समय से शिक्षा देने का कार्य कर रहे हैं, उन्हें दोबारा से मान्यता लेने के लिए दबाव बनाकर पैसे एकत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।
-प्रदेश में करीब 5 हजार विद्यालयों की मान्यता के मामले शिक्षा विभाग के पास करीब 15 सालों से लंबित पड़े हैं, लेकिन विभाग मान्यता देने में असमर्थ रहा है। हर साल एक साल के लिए अस्थाई मान्यता देकर विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है।
-10 साल से पुरानी बसों को प्रदूषण का बहाना बनाकर रद्द किया जा रहा है। जबकि स्कूल बसों की सीमा वर्ष अनुसार की जगह हरियाणा परिवहन की नीति 8 लाख किलोमीटर के अनुसार तय की जानी चाहिए।
-शिक्षण संस्थानों पर प्रोपर्टी टैक्स लगाया हुआ है।
-स्कूली बसों पर विद्यार्थी यात्री कर लगाया हुआ है।
-134ए में पिछले 5 सालों से प्रदेश सरकार द्वारा गरीब परिवारों के विद्यार्थियों का प्रवेश दिलाया हुआ है, जिसकी फीस शिक्षा के अधिकार के नियम के अनुसार प्रदेश सरकार को स्वयं देनी होती है जो अभी तक नहीं दी गई।
-प्रत्येक दिन कोई न कोई ऐसा पत्र शिक्षा विभाग द्वारा ईमेल या व्हाट्सअप पर भेज दिया जाता है, जिसका उद्देश्य सरकारी आंकड़ों को पूरा करना होता है, जबकि बच्चों की शिक्षा से कोई संबंध नहीं होता।