जिस महिला सरपंच को भ्रष्टाचार के आरोप में सीएम ने जनता दरबार में किया था सस्पेंड, प्रमुख सचिव के आदेश से बहाल हुई
भ्रष्टाचार की शिकायत पर सीएम ने दिए थे आदेश, डीसी ने किया था सस्पेंड
अंकित चौहान
सोनीपत। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने जनता दरबार में आदेश देकर जिस सरपंच को सस्पेंड कराया था, उसे पंचायती एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने बहाल कर दिया है। किलोहड़द गांव की उस सरपंच पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे, जिसपर सीएम ने डीसी को तुरंत आदेश देकर उसे सस्पेंड करा दिया था। डीसी के आदेश के खिलाफ सरपंच ने प्रमुख सचिव के यहां अपील डाली थी, जिसपर सरपंच की बहाली हो गई है।
यह था पूरा मामला
सीएम मनोहर लाल खट्टर ने सोनीपत में अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान 17 नवंबर को हैबीबेट क्लब में जनता दरबार लगाया था। वहां काफी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे और सीएम के सामने सीधे समस्या रखी गई थी। वहां किलोहड़द गांव के हरिचंद ने सीएम को बताया था कि गांव के विकास कार्यों में सरपंच की ओर से धांधली की गई है और पहले एसडीएम की जांच रिपोर्ट में यह साफ हो चुका है कि वहां गबन हुआ है। इसके बावजूद छह महीने से मामले को लटकाया हुआ है, इसमें कार्रवाई नहीं हो रही। इसपर सीएम के तेवर काफी तल्ख हो गए थे और भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई नहीं करने पर अफसरों की क्लास लगाई गई थी। इसके साथ ही सीएम ने डीसी केएम पांडुरंग को आदेश दिए थे कि सरपंच अजित कौर को तुरंत सस्पेंड किया जाए। जिसपर डीसी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सरपंच के सस्पेंड के आदेश जारी कर दिए थे।
प्रमुख सचिव के दरबार में पहुंचा मामला
डीसी केएम पांडुरंग ने सरपंच को सस्पेंड करने का आदेश जारी किया तो यह मामला पंचायत एवं विभाग विभाग के प्रमुख सचिव के दरबार में पहुंच गया। जहां सरपंच की ओर से सस्पेंड करने की कार्रवाई को गलत बताया गया। सरपंच अजित कौर की ओर से कहा गया कि विकास कार्यों में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। इस मामले में सुनवाई के बाद प्रमुख सचिव ने सरपंच को बहाल कर दिया।
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किलोहड़द की सरपंच को सस्पेंड करने के आदेश जारी किए गए थे। लेकिन सरपंच को अब बहाल कर दिया गया है और इस बारे में इससे ज्यादा जानकारी हमारे पास नहीं है।
-समशेर नेहरा, डीडीपीओ