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न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा दाम पर बिक रहा परमल

Sat, 19 Oct 2013 09:37 PM IST
फतेहाबाद/ब्यूरो
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सरकारी खरीद एजेंसियाें की ओर से खरीदे जा रहे परमल धान को हरियाणा के जिला फतेहाबाद में निजी शैलर मालिक न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी ज्यादा दाम में खरीद रहे हैं।
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परमल धान का सरकार की ओर से घोषित एमएसपी 1345 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि निजी राइस शैलर 1380-1385 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रहे हैं।

इसका मुख्य कारण परमल धान की कम बिजाई और कम उत्पादन होना है। इसके विपरीत किसान मुच्छल, पुसा 1121 व 1509 धान की किस्म को 200-300 रुपये क्विंटल कम भाव में बेचने पर मजबूर है।

फतेहाबाद जिले में 88 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की बिजाई की गई थी, जिसमें किसानाें ने 40 फीसदी के करीब परमल धान की बिजाई की थी।

इसके बाद मुच्छल, पुसा, 1121, 1509 की बिजाई की गई थी। खराब मौसम के चलते इस बार औसत पैदावार भी कम निकली है।

कृषि विशेषज्ञाें के अनुसार इस बार 80 मन यानी कि 32 क्विंटल प्रति एकड़ ही धान का झाड़ निकल रहा है, जोकि किसानाें की उम्मीद से काफी कम है।

शनिवार तक फतेहाबाद में परमल धान की 2 लाख 22 हजार 107 मीट्रिक टन आवक हुई थी, जो कि पिछले साल से काफी कम है।

सरकार परमल धान को 1345 रुपये में खरीद रही है, जबकि निजी राइस शैलर इसी धान को 1380-1385 रुपये प्रति क्विंटल में खरीद रहे हैं।

राइस शैलर मालिक मजबूरी में ज्यादा दाम देकर धान की खरीदारी कर रहे हैं ताकि उनके कारोबार में असर न पड़े।

इसके विपरीत सरकार द्वारा न खरीदे जाने वाला मुच्छल, पुसा, 1121, 1509 धान की किस्म जिसका बाजार भाव 3200 रुपये प्रति क्विंटल के करीब है।

समय पर धान का उठान न होने और पक्के आढ़तियाें की संख्या कम होने से किसान से यह धान 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल कम के भाव से खरीदा जा रहा है।

एक आढ़ती ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस धान की खरीद इस समय 7-8 व्यापारी करते हैं।

मुच्छल, पुसा, 1121, 1509 धान लेकर आए किसान को बोली के लिए एक सप्ताह का इंतजार करना पड़ता है, जिस कारण औने-पौने दामाें में ही धान बेचने को मजबूर है।

हैफेड की पेमेंट ही समय पर हो रही
सरकार ने परमल धान का भुगतान करने के लिए 72 घंटे का समय निर्धारित किया है। सरकारी खरीद एजेंसियाें की ओर से निर्धारित बीसीपीए को आढ़तियाें को 72 घंटे के भीतर पेंमेंट देनी होती है, लेकिन डीएफएससी, हरियाणा एग्रो, कॉन्फेड और वेयर हाऊस की पेमेंट 6 दिन बाद भी आढ़तियाें को नहीं मिल पा रही है। एक मात्र हैफेड की पेमेंट ही समय पर हो रही है। इस संबंध में बीसीपीए का कहना है कि बीच में आई छुट्टियाें के कारण ही पेमेंट में देरी हो रही है।
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