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चाइल्ड वेलफेयर फंड में अनियतिताओं पर तीन स्कूलों के प्रिंसिपल अंडर रूट सात के तहत होंगे चार्जशीट

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सीएम विंडो के माध्यम से आए आदेश। - फोटो : Sirsa
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सिरसा के तीन सरकारी स्कूलों में चाइल्ड वेलफेयर फंड में अनियमितताओं को लेकर तीन प्रिंसिपल को चार्जशीट किया जा रहा है। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में शिकायतकर्ता व आरटीआई एक्टिविस्ट करतार सिंह को सीएम विंडो पर जांच रिपोर्ट का जवाब देते हुए इस शिकायत को वापस लेने का आग्रह किया है। सीएम विंडो पर आए शिक्षा निदेशालय के जवाब अनुसार राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिरसा के प्रिंसिपल सही राम, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल रुपावास के प्रिंसिपल जगदेव सिंह, बडागुढ़ा के प्रिंसिपल बलदेव सिंह को अंडर रूल सात के तहत चार्जशीट किया जा रहा है। इसलिए अब इस शिकायत का निपटारा किया जाए। मुख्यालय के इन आदेशों के बाद जिला शिक्षा विभाग ने शिकायतकर्ता व प्रिंसिपल करतार सिंह से शिकायत को डिस्पोज ऑफ करवाने के लिए बीते दिनों उनके हस्ताक्षर करवा लिए है। तीनों प्रिंसिपल के खिलाफ डिप्टी डीईओ आत्म प्रकाश, कालांवाली के तत्कालीन प्रिंसिपल अनिल गुप्ता व शिक्षा विभाग के सेक्शन ऑफिसर अनिल कुमार ने जांच की थी। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में तीनों स्कूलों में फंड खर्च करने में अनियमितताएं मानी थी। हालांकि बडागुढ़ा स्कूल प्रिंसिपल ने चाइल्ड वेलफेयर फंड से पांच लाख चार हजार रुपये खर्च किए थे। यह सामान स्कूल में साइकिल स्टैंड और मरम्मत पर खर्च किया गया। लेकिन नियमानुसार इस फंड से स्कूल सालाना 25 हजार रुपये तक खर्च कर सकता है। लेकिन स्कूल ने पांच लाख चार हजार रुपये खर्च कर दिए।
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ये था मामला
राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिरसा व राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल रुपावास ने बिना टेंडर किए जुलाई 2018 में लाखों रुपये का सामान चाइल्ड वेलफेयर फंड से खरीदा था। राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिरसा ने चाइल्ड वेलफेयर फंड से तीन लाख 63 हजार 545 रुपये की खरीद की। स्कूल प्रिंसिपल के पास इतनी पावर नहीं थी कि वह इतना सामान एक ही समय में बिना टेंडर कॉल किए खरीद कर लें। खरीद के बाद स्कूल ने मामले की पोल खुुलने के भय से रिकार्ड से छेड़छाड़ की। 19 जुलाई 2018 को सामान खरीदने के लिए प्रिंसिपल के पास डिमांड दिखाई गई। स्कूल ने हरियाणा उद्योग कार्पोरेशन पानीपत की फर्म को 21 जुलाई 2019 को ऑर्डर दिया। 24 जुलाई 2018 को सामान की खरीद दिखाई गई। लेकिन विभाग के एक स्टाफ सदस्य ने अध्यापकों द्वारा दिखाई गई डिमांड पर हस्ताक्षर करने के साथ नौ अगस्त 2018 की तिथि लिख दी। जिस पर मामले की पोल खुल गई। वहीं पानीपत की फर्म ने स्कूल को तीन जुलाई 2018 तिथि की कोटेशन भेज दी अर्थात स्कूल ने डिमांड अभी क्रेट ही नहीं की और फर्म ने सामान की कोटेशन 16 दिन पहले भेज दी। राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल सिरसा ने हरियाणा उद्योग कार्पोरेशन फार्म को भुगतान करने के लिए एक ही दिन में फर्म के नाम पर पांच चेक काटे। ताकि किसी भी प्रकार का आब्जेक्शन न हो। सिरसा मॉडल ने लेक्चरर स्टैंड, टेबल वुडन, डिस्प्ले बोर्ड, बुक शेल्फ, अलमारी, चेयर, ग्रीन बोर्ड, वुडन टेबल सहित कई सामान खरीदा था।
रूपावास स्कूल ने खरीदा था दो लाख 13 हजार 987 रुपये का सामान
राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल रूपावास ने दो लाख 13 हजार 987 रुपये का सामान खरीदा। उसमें से 25 जुलाई को जो आर्डर दिए थे, उनके इनवोइस बिल नंबर 936 और 937 दिए गए है। जबकि 27 जुलाई 2018 को दिखाए गए बिलों में इनवोइस नंबर उपरोक्त दोनों बिलों से पहले है। अर्थात पहले जो सामान खरीदा गया था, उनका इनवोइस नंबर की सीरीज बाद में है। जबकि बाद में खरीदे गए सामान की इनवोइस नंबर पहले हैं। रुपावास स्कूल ने 12 डस्टबीन 26760, दो काटन दरी 14676 रुपये में, एक डिस्पले स्टाफ स्टेटमेंट 11670 रुपये में, एक मेडिकल किट 11227 रुपये में, एक न्यूज पेपर स्टैंड 15327 रुपये में, एक डिस्पले बोर्ड 7776 रुपये में, 6 लेक्चरर स्टैंड 71220 रुपये में, पांच ग्रीन बोर्ड 55330 रुपये में खरीद की थी।
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ये थे नियम
विभागीय नियमों अनुसार 500 रुपये की खरीद तक कोटेशन की जरूरत नहीं होती। यदि 500 से लेकर 49,990 रुपये तक सामान खरीद के लिए कोटेशन की जरूरत होती है। इसके लिए टेंडर कॉल की जाती है।
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सीएम विंडो के माध्यम से चार्जशीट की सूचना आई है। अभी आदेश नहीं पहुंचे।
- राजेश चौहान, डीईओ, सिरसा।
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