-6 फीट से ऊपर पहुंचा पानी तो पंप हुए शुरू, किसानों को मिला पानी, धान की फसल को होगा फायदा
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। घग्गर नदी में पानी आने के साथ ही सिंचाई विभाग की मेंटेनेंस विभाग की गतिविधियां तेज हो गई हैं। जल प्रबंधन और वितरण सुनिश्चित करने के लिए दो प्रमुख पंपिंग स्टेशन चालू किए गए हैं। सिद्धमुख और अन्य माइनरों में पानी छोड़े जाने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। अधिकारी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं ताकि जल आपूर्ति सुचारु बनी रहे।
दो दिनों से एसडीओ रोहित कुमार व जेई अंकित यादव लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मीरपुर और झंडा पंप सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है। ये पंपिंग स्टेशन तब चलाए जाते हैं जब घग्गर में पानी का स्तर पांच फीट से ऊपर पहुंच जाता है। इन स्टेशनों का संचालन जल निकासी और वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पानी की उपलब्धता से धान की सिंचाई और बिजाई के काम में तेजी आई है। किसान अब अपनी फसलों के लिए पर्याप्त पानी मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, घग्गर में अभी पानी का स्तर अपेक्षाकृत कम है। मगर, पहाड़ी क्षेत्रों में बरसात होने के कारण लगातार स्तर बढ़ने की उम्मीद है। बाढ़ की चपेट में आने वाले गांवों की पंचायतें सक्रिय हो गई हैं। चोपटा से लेकर रोड़ी के रंगा तक पंचायतें और ग्रामीण पूरी तरह से सतर्क हैं।
पिछले साल भी जुलाई और अगस्त में घग्गर थी उफान पर
आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल भी जुलाई और अगस्त माह में घग्गर उफान पर थी। उस दौरान बारिश भी लगातार हो रही थी। ज्यादा बारिश के कारण स्थिति को बड़ी मुश्किल से कंट्रोल किया गया था। राजस्थान को बड़े स्तर पर पानी दिया गया था। माइनर भी पूरी तरह से भरे हुए थे। हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई थी। किसानों से लेकर प्रशासनिक अमला तक कच्चे तटबंधों से लेकर पक्के तटबंधों को मजबूत करने में लगा था।
पंपिंग स्टेशनों का संचालन और निगरानी
घग्गर में पानी की आवक के साथ ही मीरपुर और झंडा नामक दो महत्वपूर्ण पंपिंग स्टेशन शुरू कर दिए गए हैं। इन स्टेशनों के बाद बीरूवाली पंपिंग स्टेशन की जांच भी की गई है। इसका प्रयोग घग्गर के जलस्तर के हिसाब से किया जाता है। मुख्य कार्य अतिरिक्त पानी को नियंत्रित करना और उसे आवश्यक चैनलों में मोड़ना है।
किसानों को राहत और कृषि पर प्रभाव
सिद्धमुख और अन्य माइनरों में पानी छोड़े जाने से क्षेत्र के किसानों के लिए धान की बिजाई करना मुमकिन हो जाएगा। वहीं, रानियां, ऐलनाबाद व चोपटा जैसे क्षेत्रों में घग्गर का पानी पहुंचने से कपास की फसलों को भी लाभ मिलेगा। किसान अपनी दूसरी फसलों में भी इस पानी का प्रयोग कर पाएंगे।
कोट्स
घग्गर में जलस्तर बढ़ने के साथ ही पंपिंग स्टेशनों को शुरू कर दिया गया है। घग्गर के पानी को माइनरों या कहें कि साथ लगते चैनलों में डाला जा रहा हैं। इसका प्रयोग मुख्य रूप से किसान सिंचाई के लिए करते हैं। घग्गर के जलस्तर के अनुसार ही पंपिंग स्टेशनों को चलाया जाएगा।
-रोहित कुमार, एसडीओ, सिंचाई विभाग