संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। भाजपा सांसद सुनीता दुग्गल ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा करते हुए कहा कि हम आज जो बिल लेकर आए हैं। इस पर सभी दलों को मिलकर महिला आरक्षण बिल पर आगे आना चाहिए। प्रधानमंत्री ने जो संकल्प लिया है, उसे पूर्ण किया है। यह अमृतकाल है, जिसमें हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं। सांसद ने कहा कि राजनीति में महिलाओं को आगे आना चाहिए। महिलाओं को राजनीति में ओहदा मिलना चाहिए। भाजपा में महिलाओं को बड़े-बड़े पद मिले हैं।
सांसद ने कहा कि मुझे अफसोस इस बात का है कि हम नारी को देवी मानते हैं, देवी जैसा सम्मान नहीं देते। सांसद ने कुछ पंक्तियां सुनाते हुए कहा कि हमें पंख तो देते हैं, लेकिन उड़ने नहीं देेते। हमारी बेटी बुलबुल है, पिंजरे में रहती हैं। आज हम सुकून महसूस कर रही हैं। 27 सालों से चली आ रही कवायद पूरी हुई है। यह एक ऐतिहासिक बिल है। इसलिए मैं हिंदुस्तान की महिलाओं को बधाई देती हूं। सांसद ने कहा कि मेरी माता जी अस्पताल में दाखिल हैं और वह मुझे बोलते हुए जरूर देख रही हैं। मां प्रकृति ने कोई भेदभाव नहीं किया है। हम दो बहनें और दो भाई हैं। हम किसी भी मामले में कम नहीं है। आज मुझमें जो आत्मविश्वास है, वो मेरी मां से मिला है।
सांसद ने कहा कि हरियाणा में आज बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा गूंज रहा है। लिंगानुपात के मामले में उन्होंने कहा कि 2014 में जहां बेटियों की संख्या 871 थीं, आज 933 है। हमारे मंत्रिमंडल में 12 महिलाएं हैं। उन्होंने हरियाणा से सुचित्रा कृपलानी, सुषमा स्वाराज, सुमित्रा महाजन के साथ साथ मातंनी हाजरा का उदाहरण दिया।
सभापति के रोकने पर सांसद बोलीं - महिलाओं को होगी तकलीफ
सांसद का समय पूर्ण होने पर जब सभापति ने उन्हें रोकना चाहा, तो सांसद ने कहा कि सभापति महोदय, मुझे बोलने का समय दिया गया है। महिलाओं का बिल है। मुझे बोलने से रोकेंगे तो महिलाओं को तकलीफ होगी। उन्होंने सभा में मौजूद महिला सांसदों की ओर इशारा से समझाते हुए कहा कि महिलाओं के लिए यह बिल लाया गया है। महिलाओं को इसमें बढ़चढ़ कर भाग लेना चाहिए। कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि कृपया मुझे यह बताएं कि वह महानुभव कौन है, जिन्होंने महिला बिल के विरुद्ध में वोट किया है। सांसद ने अभिनेता अमिताभ बच्चन की कविता सुनाकर अपना भाषण समाप्त किया।