ओढां। यूरिया की किल्लत से किसान परेशान है। किसान ठंड की परवाह किए बगैर यूरिया के लिए पैक्स व सेल प्वाइंटों पर हर रोज चक्कर काट रहे हैं, लेकिन यूरिया नहीं मिल पा रही। स्थिति ये है कि खाद के अभाव में गेहूं की फसल पीली पड़नी शुरू हो चुकी है। किसानों को बिना यूरिया खेत में डाले ही सिंचाई करने पड़ रही है। उनका कहना है कि सीजन के दौरान हर बार यही स्थिति रहती है, लेकिन सरकार इस ओर गंभीर नहीं है। इसके चलते देश का पेट पालने वाला अन्नदाता खाद के लिए घंटों लाइन में लगने को विवश है। किसानों एक स्वर में कहा कि सरकार पर्याप्त खाद होने का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन स्थिति इसके विपरीत है। उन्हें हर बार खाद के लिए परेशान होना पड़ता है।
नहरों में पानी आ गया है। इस समय गेहूं में दूसरी बार सिंचाई चल रही है। सिंचाई के साथ यूरिया की बेहद जरूरत है। अब मजबूरन बिना खाद के ही सिंचाई करनी पड़ रही है। खाद में अभाव में गेहूं में पीलापन आ गया है। पिछले करीब 20 दिन से सेल प्वाइंट पर चक्कर काट रहा हूं। गांव का रकबा करीब 6 हजार एकड़ है। इसके लिए 222 किसानों को मात्र 2-2 बैग ही यूरिया मिली। किसान का इतनी खाद से कैसे काम चलेगा। सरकार को इसका कोई स्थायी समाधान करना चाहिए। -- सुनील सहारण (नुहियांवाली)।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। किसानों को हर बार ही खाद के लिए परेशान होना पड़ता है। ऐसे तो खाद के गोदाम भरे रहते हैं, लेकिन जब सीजन आता है तो किल्लत आ जाती है। सरकार को इस ओर ध्यान देकर किसानों की परेशानी को दूर करना चाहिए। हम खाद के लिए सेल प्वाइंटों के चक्कर काटने को विवश हैं। घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाद नहीं मिल पाती। अगर मिलती है तो महज 1-2 बैग ही। रणवीर सहारण (नुहियांवाली)।
कभी नहरों में पानी नहीं, कभी खाद नहीं व कभी निम्नस्तर का बीज। किसानों को हमेशा से ही परेशान होना पड़ता है। सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। खेत में इस समय यूरिया की बेहद जरूरत है। यूरिया केे अभाव में गेहूं की फसल पीली पड़ रही है। काफी भटकने के बाद भी खाद नहीं मिल रही।- सुखराज सिंह कुंडर (ओढां)।
काफी दिनों के बाद नहरों में पानी आया है। सिंचाई तो हो जाएगी, लेकिन यूरिया के बगैर कैसे काम चलेगा। फसल में पीलापन स्पष्ट नजर आ रहा है। खाद के लिए कई जगहों पर मत्थापच्ची कर चुके हैं। कर्मचारी कहते हैं कि खाद का रैंक लगने वाला है और ये रैंक कब लगेगा इसका पता नहीं। मैं सरकार से यही मांग करता हूं कि किसानों की दुर्दशा को देखकर कोई समाधान निकालें। - हाकम कस्वां (पन्नीवाला मोटा)।
पिछले 15-20 दिनों से यूरिया के लिए परेशान हो रहे हैं। सेल प्वाइंट पर जाते हैं तो जल्द ही रैंक लगने की बात कहकर टरका दिया जाता है। समझ नहीं आ रहा कि एक तरफ तो सरकार ये कह रही है कि खाद पर्याप्त है और दूसरी तरफ खाद है ही नहीं। अगर खाद भेजी जाती है तो किसान को मात्र 1-2 बैग ही मिल पाते हैं। जो बड़े खेतिहर किसान हैं उनका 1-2 बैग से कैसे काम चलेगा। कालाबाजारी करने वाले स्टॉक कर रहे हैं। - सुनील कुमार (नुहियांवाली)।
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जब जरूरत होती है तब खाद नहीं मिल पाती। अब डीएपी की जरूरत नहीं तो डीएपी पर्याप्त मात्रा में पड़ी है। समझ नहीं आ रहा कि खाद की किल्लत आखिर सीजन में आकर इतनी ज्यादा क्यों होती है। समय रहते खाद भेज दी जाए तो किसानों को दिक्कत ही न आए। पिछले करीब दो सप्ताह से खाद के लिए भटक रहा हूं। फसल पीली पड़नी शुरू हो गई है। -- सेवक सिंह (चोरमार)।