लोहड़ी पर्व के दिन मौसम ने अचानक करवट ले लिया। कई दिनों से तेज धूप पड़ रही थी। लेकिन आज दिन भर मौसम ठंडा रहा। दिन भर सूर्य देव बादलों में लुकाछिपी का खेल करते रहे। ऐसे मौसम को देखकर किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई। किसानों ने कहा कि फसलों के लिए ठंड अति आवश्यक है। बुधवार को मौसम सुबह-सवेरे से ठंडा रहा। दिन भर ठंडी हवा चलती रही
। बादल छाये रहने के कारण सूर्यदेव के दर्शन नहीं हो सके। बीती रात को डबवाली क्षेत्र में फुहारें भी आई। पारा 24 डिग्री से गिर कर 20 डिग्री पर आ पहुंचा। सुबह-सवेरे ठिठुरन अधिक थी जो लगातार दिन भर जारी रही। लोहड़ी के कारण दिन भर मूंगफली और गर्म पकवानों का सिलसिला जारी रहा। न्यूनतम तापमान में भी दो से तीन डिग्री तक की गिरावट आने से ठंड का अहसास अधिक हुआ। मंगलवार को न्यूनतम तापमान आठ डिग्री था जबकि आज का न्यूनतम तापमान छह डिग्री से भी कम रहा।
मौसम के जानकारों के अनुसार अगले दो दिनों में बरसात होने के आसार हैं। यदि बरसात हुई तो फसलों के लिए घी का काम करेगी। इससे पूर्व पारा 24 और 25 डिग्री के बीच रहने के कारण किसानों की चिंता बढ़ी हुई थी। लोहड़ी के दिन अधिक ठंड पड़ने से किसानों के चेहरों पर चमक आई। किसानों का कहना है कि जनवरी माह में ठंड नहीं पड़ी तो फसलें खराब हो सकती हैं। बरसात के बाद धुंध आने की संभावना है जो फसलों के लिए बहुत ही लाभकारी मानी जाती है। एक दम पारा चार डिग्री गिरने से काफी ठंड महसूस की गई। हालांकि सिरसा में बरसात नहीं हुई पर शीत लहरों के कारण ािदन भी ठंडक बनी रही।
लोगों को आज पहली बार सर्दी के मौसम का अहसास हुआ। मौसम के जानकारों का मानना है कि अब आने वाले दिनों में ठंड बढे़गी और यदि ऐसा होता है तो फसलों की भरपाई हो सकती है। क्योंकि गेहूं और सरसों की फसलें ठंड न पडने से खराब हो जाती है। फुटाव भी कम होता है जिससे उत्पादन पर असर पड़ता है। अब किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मौसम फसलों के अनुकूल रहेगा।