सिरसा। सीहोरवाले कथावाचक व आध्यात्मिक गुरु पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज ने कहा कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया एक लोटा जल और एक बेलपत्र सारे दुखों का नाश करता है।
शिवलिंग पर चढ़ाया गया बेलपत्र उठाकर उसे धोकर फिर से शिवलिंग पर चढ़ा देना, ऐसा करने से 26000 नदियों में स्नान करने, गंगासागर में स्नान करने, चारों धाम की यात्रा से मिलने वाले पुण्य से लाख गुना पुण्य मिलता है।
एक बेल पत्र का दान सवा मन सोना दान करने से भी हजारों गुना बड़ा है। बेल पत्र सभी बीमारियों की औषधि है। शिव के प्रति अटूट आस्था होनी चाहिए। वे मंगलवार को श्री बाबा तारा कुटिया परिसर में आयोजित श्री गुरु शिव पुराण कथा के दूसरे दिन देशभर से आए श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। सबसे पहले पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज, गोपाल कांडा, गोबिंद कांडा और परिवारजनों ने पूजा अर्चना की। कांडा बंधुओं ने पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज से आशीर्वाद लिया।
ओम नम: शिवाय का जाप करने के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज ने कहा कि साधु, संत, तपस्वी जिस धरा पर बैठकर भगवान शिव का अखंड जाप करते, पूजन करते है वो धरा कभी साधारण नहीं हो सकती। बाबा तारा ने इस भूमि पर भक्ति की है। संत का जन्म विश्व कल्याण के लिए होता है। जो सच्चे मन से शिव का स्मरण करता है उसके सारे संकट दूर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि संत और बसंत एक जैसे है, संत के जीवन में आने से जीवन बदलता है तो बसंत के आने से प्रकृति बदलती हैं। जो समय भक्ति में दिया जाता है, वह कभी व्यर्थ नहीं जाता, उसका लाभ जरूर मिलता है। उन्होंने कहा कि जिससे प्रेम करो उससे धन की चाह मत करो, प्रेम केवल समय चाहता है, प्रेम की सबसे बड़ी कीमत समय ही होता है। शिव भक्ति और गुरु भक्ति में दिया समय काल भी आगे बढ़ा देता है। व्यक्ति को पता होना चाहिए कि कोई उसका मालिक भी है जो हर संकट से उसे बाहर निकाल लेगा।
यह भी होना चाहिए की मेरा परमात्मा और मेरा गुरु मेरे साथ है। भगवान शिव के 21 अवतार हुए है।उन्होंने कहा कि शिवपुराण में कही पर इस बात का उल्लेख नहीं है कि शिव लिंग पर सोने और चांदी के बेलपत्र चढ़ाने से ज्यादा लाभ या पुण्य मिलता है।
शिवपुराण में 24 हजार श्लोक है कही भी ऐसी बात नहीं मिलती, ये सब खाने- कमाने का चक्कर होता है। इससे बचना चाहिए और केवल और केवल बेलपत्र ही चढ़ाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सात दिन की शिवपुराण कथा के श्रवण का लाभ तीन माह बाद मिलेगा । व्यासपीठ के बेल पत्र में इतनी शक्ति होती है कि असाध्य रोग ठीक हो जाते है।
ऐसे अनेक पत्र पढ़कर सुनाए जिन्होंने एक लोटा जल चढ़ा और बेलपत्र का सेवन किया और सारे रोग दूर हो गए। उन्होंने कहा कि लोगों के भीतर से भ्रम को दूर करना उसे बाहर निकालना ही शिवपुराण है।