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Sirsa News: टीबी मुक्त हो रहे गांव, जिले के 55 गांव में एक भी मरीज नहीं

Sun, 23 Mar 2025 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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 गांव में मरीजों की स्क्रीनिंग करते हुए चिकित्सक। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। जिले में टीबी मुक्त 2025 अभियान के तहत व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए लोगों को जागरूक कर रही है। बीते वर्ष 7 ग्राम पंचायत टीबी मुक्त स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज थी। अब इनका आंकड़ा बढ़कर 55 तक पहुंच गया है। इन गांवों में कोई टीबी का मरीज सामने नहीं आया।

जिले में 100 दिन के विशेष अभियान के दौरान अब तक 1 लाख 20 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। जहां स्क्रीनिंग के दौरान 5150 के करीब मरीजों के संभावित टेस्ट किए गए। वहीं, जिले भर से करीब 200 टीबी मरीजों की पहचान की गई, जिनका वर्तमान में नागरिक अस्पताल में इलाज जारी है।
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नागरिक अस्पताल में 1800 मरीजों का उपचार चल रहा है, जबकि करीब 1000 के करीब मरीज निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। वहीं, इस वर्ष के तीन महीनों में 400 के करीब मरीज निजी अस्पतालों से व 524 मरीज नागरिक अस्पताल में हैं। जिले में विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले भर के 2000 के करीब मरीजों को ''निक्षय पोषण योजना'' के तहत पौष्टिक आहार की सहायता प्रदान की जा रही है। जिससे उनकी रिकवरी तेज हो सके।



क्या है निक्षय पोषण योजना

टीबी मरीजों को स्वस्थ रखने और उनकी रिकवरी को तेज करने के लिए सरकार निक्षय पोषण योजना के तहत 1000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता देती है, ताकि मरीज पौष्टिक आहार ले सकें।

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टीबी के लक्षण और बचाव

चिकित्सकों के अनुसार, लगातार दो हफ्ते से अधिक खांसी, बुखार, वजन घटना और रात को पसीना आना टीबी के मुख्य लक्षण हैं। टीबी से बचाव के लिए बीसीजी का टीका, साफ-सफाई, संतुलित आहार और संक्रमित व्यक्ति से दूरी रखना जरूरी है। अगर किसी को टीबी के लक्षण महसूस हों तो वह नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में मुफ्त जांच करवा सकता है। टीबी मरीजों को सरकार द्वारा मुफ्त दवा और इलाज की सुविधा दी जाती है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि सिरसा को 2025 तक टीबी मुक्त बनाया जाए। इसके लिए हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।



ये तय किए गए हैं मापदंड

टीबी मुक्त ग्राम पंचायत बनने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मापदंड भी तय किए हैं। इसके अनुसार एक हजार जनसंख्या पर कम से कम 30 सैंपल। गांव में एक हजार जनसंख्या पर टीबी के मरीजों की संख्या शून्य हो या फिर एक मरीज हो। गांव में मिले टीबी के मरीजों का ट्रीटमेंट रेट 100 प्रतिशत हो। पूर्व में आए कुल टीबी मरीजों में से 62 प्रतिशत का सीबी नॉट टेस्ट करवाया गया हो। तलाशे गए सभी टीबी मरीजों को पोषण स्पोर्ट किट दी गई हो।
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कोट्स

टीबी को खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समय पर टीबी की पहचान और इलाज से यह पूरी तरह ठीक हो सकती है। विभाग की टीमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में जागरूक करने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं।डाॅ. प्रतीक गोयल, जिला क्षय रोग अधिकारी सिरसा।
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