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Sirsa News: ग्रामीण बोले- आश्वासन पर धरना स्थगित, पर नहीं करेंगे किसी पार्टी का प्रचार

Mon, 01 Apr 2024 11:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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सिरसा। लघु सचिवालय में दो माह से गांव धिंगतानियां और सलारपुर भंभूर खरीफ चैनल के निर्माण को लेकर धरने पर डटे 15 गांवों के किसानों के पास सोमवार को भाजपा जिलाध्यक्ष निताशा सिहाग व वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश चोपड़ा पहुंचे। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि लोकसभा चुनावों के बाद खरीफ चैनल का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। भाजपा नेताओं के आश्वासन पर किसानों ने अपना धरना मई माह तक स्थगित कर दिया।
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किसानों ने कहा कि भले ही उन्होंने अपना धरना मई माह तक स्थगित कर दिया है पर वह किसी पार्टी का प्रचार नहीं करेंगे। पूर्व में सांसद से उन्हें धोखा मिल चुका है। किसानों ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सांसद उनके गांव तक में नहीं आई। किसान संघर्ष समिति के सचिव जगरूप सिंह ने साफ किया कि उनका धरना समाप्त नहीं हुआ, उसे केवल स्थगित किया गया है।
किसानों ने किया था बीजेपी उम्मीदवार के विरोध की घोषणा
धरनारत 15 गांवों के किसानों ने ऐलान कर दिया था कि लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार का विरोध किया जाएगा। प्रत्याशी को गांव में घुसने तक नहीं देंगे। इसके अलावा बीजेपी नेताओं का सामाजिक बहिष्कार करेंगे। बता दें कि गांव खाजा खेड़ा, रंगड़ी खेड़ा, टीटू खेड़ा, रामनगरिया, धिंगतानियां, मोडिय़ा खेड़ा, नानक पुर, नटार, रंगडी खेड़ा, ढाणी जस्सा राम, चौबुर्जा व भंभूर के गांव धरने पर बैठे थे।
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2019 में जारी हो चुका था बजट
संघर्ष समिति के सचिव जगरूप सिंह चौबुर्जा का कहना है कि धिंगतानिया व भंभूर-सलारपुर खरीफ चैनल के निर्माण की घोषणा 2019 में की गई थी। घोषणा के बाद अब तक चैनल का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया। चैनल के निर्माण के लिए बजट राशि जारी हो चुकी है लेकिन आगे कुछ नहीं हुआ। धरनारत किसानों कहना है कि दोनों खरीफ चैनल के निर्माण से 15 गांवों के किसानों को फायदा होगा।

30 लाख प्रति एकड़ देने का वादा किया

संघर्ष कमेटी सचिव जगरूप सिंह का कहना है कि धिंगतानियां खरीफ चैनल के लिए 54 करोड़ 6 लाख का बजट और भंभूर-सलारपुर खरीफ चैनल के लिए 12 करोड़ 26 लाख रुपये का बजट जारी हुए काफी समय हो चुका है। चैनल के निर्माण के लिए किसान अपनी जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन सरकार कलेक्टर रेट पर जमीन लेना चाहती है। ग्रामीण चाहते हैं कि सरकार मार्केट रेट पर जमीन की खरीद करे। अब सरकार ने 30 लाख रुपये प्रति एकड़ देने का वादा किया है।
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