चोपटा। नाथूसरी चोपटा क्षेत्र के करीब 25 गांवों से होकर गुजरने वाले हिसार घग्गर ड्रेन सेमनाले के बार-बार ओवरफ्लो और जगह-जगह रिसाव होने से ग्रामीणों ने बुधवार को नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों ने प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की जिलाध्यक्ष संतोष बेनीवाल की अगुवाई में ग्रामीणों ने ड्रेन के मुहाने पर जाकर धरना शुरू कर दिया है।
धरने पर बैठीं जिला अध्यक्ष सरपंच संतोष बेनीवाल का आरोप है कि हिसार घग्गर ड्रेन में लगातार पानी की मात्रा बढ़ती जा रही है। इससे आसपास के गांवों के लोगों को टूटने का डर सता रहा है। संबंधित विभाग व जिला प्रशासन की ओर से पानी निकासी के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।
धरने पर गांव दड़बा कलां, गुड़िया खेड़ा, रुपाणा, शक्कर मंदोरी, नाथूसरी चोपटा, कागदाना सहित कई गांवों के ग्रामीण जिला अध्यक्ष के साथ धरने पर बैठे। मांगे राम बैनीवाल, सुनील कुमार, ओमप्रकाश, पवन, सुंदर, धोलू, राजपाल भांभू सहित कई लोगों ने सिंचाई विभाग व जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया है। इस दौरान संतोष बेनीवाल ने कहा कि ड्रेन के अंतिम छोर पर पानी निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। महज ट्रैक्टरों की सहायता से पानी निकासी की जा रही है। अंतिम छोर पर पड़ी बिजली की मोटर प्रयोग नहीं की जा रही। इसके कारण पानी निकासी प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है। शुरुआती गांवों में ड्रेन के टूटने का खतरा मंडरा रहा है। कई जगह रिसाव के चलते सैकड़ों एकड़ फसल जल मग्न हो चुकी है।
ग्रामीण अपने स्तर पर बचाव कार्य में भी लगे
संतोष बेनीवाल ने बताया कि ग्रामीण अपने स्तर पर बचाव कार्य में भी लगे हुए हैं। ड्रेन के अंतिम छोर पर पानी निकासी व्यवस्था सही की जाए तो पीछे पानी का दबाव कम हो जाएगा। इस संबंध में उन्होंने संबंधित विभाग व जिला प्रशासन के अधिकारियों से कई बार बात की, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने मंगलवार रात को उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि अगर जल्दी कोई समाधान नहीं होता है तो वह ग्रामीणों के साथ धरना शुरू कर देंगी। किसी भी अधिकारी ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई। ऐसे में अब जब तक पानी निकासी की बेहतर व्यवस्था नहीं बनती है, तब तक धरना जारी रहेगा।
20 एकड़ फसल डूब चुकी
बता दें कि सार घग्गर ड्रेन के अंतर्गत सिरसा जिले के शक्कर मंदोरी, शाहपुरिया, तरकां वाली, माखोसरानी, नाथूसरी चोपटा, दड़बा कला, रुपाणा खुर्द, निरबाण, गुड़िया खेड़ा ढूकड़ा, माधो सिंघाना, मौजू खेड़ा सहित कई गांव आते हैं। मोडिया खेड़ा और गुड़िया खेड़ा के बीच रिसाव होने से 20 एकड़ धान की फसल पूरी तरह पानी में डूब गई। इसी प्रकार शक्कर मंदोरी, और शाहपुरिया के आसपास भी लगातार टूटने का खतरा बना हुआ है। सिरसा भादरा रोड पर नाथूसरी चोपटा और दड़बा कलां के बीच टूटने का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सेमनाला टूट जाता है तो हजारों एकड़ में खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी और गांवों में भी पानी घुसने का खतरा बना हुआ है।