बडागुढ़ा। बडागुढ़ा खंड के तत्कालीन ग्राम सचिव द्वारा 7 गांवों में पंचायती फंड और 15वें वित्त आयोग की लाखों रुपये की राशि डकारने के मामले में खंड कार्यालय के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा इस बात की है कि इतना बड़ा घोटाला ग्राम सचिव अकेले नहीं कर सकता। ग्राम सचिव द्वारा ग्राम पंचायत के फंड और विकास कार्यों की करीब 82 लाख रुपये की राशि हड़पने की भनक क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी को नहीं लगी या फिर इसमें किसी अधिकारी की मिलीभगत है।
बडागुढ़ा खंड के तत्कालीन ग्राम सचिव जयसिंह पर अपने कार्यकाल के दौरान गांव पक्का शहीदां, कमाल, रोहण, फग्गु, रोड़ी, सुरतिया, कुरंगावाली में ग्राम पंचायत के फंड और 15वें वित्त आयोग की 82 लाख से ज्यादा की राशि का गबन करने पर बडागुढ़ा थाना में 2 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। फिलहाल ग्राम सचिव गांव पक्का शहीदां, कमाल और रोहण के पंचायती फंड में 24 लाख के गबन के मामले में न्यायिक हिरासत में है। आरोपी ग्राम सचिव ने फरवरी 2021 से दिसंबर 2022 के दौरान प्रशासक अवधि में ऑडिट न होने का फायदा उठाते हुए पंचायतों के खाते साफ कर दिए। जितनी भी राशि फंड में आती रही वह बिना किसी रिकॉर्ड के लाखों रुपये हजम करता रहा। घोटाला तब सामने आया, जब नई पंचायतों का गठन हुआ।
अधिकारियों की मिलीभगत तो नहीं...
पंचायती फंड के लाखों रुपये के घोटाले को लेकर तत्कालीन पंचायत अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अगर ग्राम सचिव द्वारा पंचायती भूमि को पट्टे पर देने के बाद राशि पंचायत खाते में जमा नहीं करवाई तो उसकी जांच करने की जिम्मेदारी भी बीडीपीओ और पंचायत अधिकारी की होती है। ऐसे में 2 वर्ष में बीडीपीओ और पंचायत अधिकारी द्वारा घोटाले की इस राशि को लेकर कोई सवाल क्यों नहीं खड़े किए। ये अधिकारी इस मामले में आंखें क्यों मूंदे बैठे रहे। वित्त आयोग की राशि किसी फर्म को या विकास कार्य में खर्च करने के लिए डिजिटल मोड से दी जाती है। जिसमें डोंगल बीडीपीओ और ग्राम सचिव का भी लगता है। यानी किसी भी राशि को जारी करने से पहले बीडीपीओ द्वारा चैक किया जाता है। ऐसे में जब डोंगल से लाखों रुपये की राशि खातों से निकाली गई तो बीडीपीओ द्वारा इस मामले की जांच क्यों नहीं की गई। ऐसे में ग्राम सचिव के साथ-साथ कई कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पुलिस द्वारा आरोपी ग्राम सचिव से 24 लाख में से मात्र 10 हजार रुपये की ही रिकवरी करना बताया जा रहा है।