संवाद न्यूज एजेंसी
कालांवाली। गांव कालांवाली को शहरी सीमा में शामिल करने की अधिसूचना को उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है। इस पर ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की है। इसके साथ ही अब नगरपालिका चुनाव का रास्ता भी साफ हो गया है।
सरपंच अजैब सिंह, गुरतेज सिंह सोढ़ी, अमर सिंह नूना, बाबू सिंह, सोनू सिंह, ने बताया कि सरकार ने वर्ष 2022-23 में गांव कालांवाली को शहरी सीमा में शामिल करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था। इसका पंचायत व ग्रामीणों ने विरोध किया था। इसको लेकर पंचायत ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय ने माना कि यह कदम प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों का पालन करने में विफल रहा है और निवासियों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया। इससे गांव के कृषि चरित्र पर काफी असर पड़ा। इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को बदलते हुए अधिसूचना को रद्द कर दिया है।
पंचायत के एडवोकेट बीएस मित्तल ने कहा कि जज सुरेशा ठाकुर व सुदीप्ति शर्मा ने पंचायत के केस नंबर 11697 जो 20 मई 2023 को रजिस्टर किया गया था। इसमें केस आर्डर कर 19 नवंबर 2024 को रिजर्व रखा और 3 दिसंबर को अपना फैसला सुनाया है। इससे अब गांव कालांवाली को शहर में शामिल नहीं किया जाएगा।
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वर्ष 1986 से 2003 तक शहर का हिस्सा रहा गांव कालांवाली
सरपंच अजैब सिंह ने बताया कि इससे पहले गांव कालांवाली 1986 से 2003 तक नगरपालिका का हिस्सा रहा है। इस दौरान गांव में कोई विकास कार्य नहीं हुए। नगरपालिका की आड़ में पंचायती कृषि भूमि हैफेड विभाग को ट्रांसफर कर दी गई। इसके बाद लोगों ने मांग उठाई तो गांव को शहर से बाहर कर पंचायत बहाल की गई। ग्रामीणों नगरपालिका क्षेत्र में शामिल किए जाने के विरुद्ध हैं। अब पंचायत काम करवाएगी और लोगों को भी राहत मिलेगी।
ग्रामीण पहले भी जता चुके थे अपनी नाराजगी
सरकार ने गांव कालांवाली में सरपंच पद के चुनाव होने के बाद 13 जनवरी 2023 की जारी अधिसूचना के तहत 23 फरवरी 2023 तक आपत्ति व सुझाव मांगे थेे। इससे पहले 7 फरवरी 2022 से 21 मार्च 2022 तक आमजन से आपत्ति व सुझाव मांगे गए थे। इसमें गांव कालांवाली के ग्रामीणों ने सरकार व जिला प्रशासन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की थी। उनका कहना था कि नगरपालिका में शामिल होने से ग्रामीणों को ग्रामीण क्षेत्र की विकास योजनाओं से वंचित रहने पड़ेगा। प्रॉपर्टी टैक्स, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज, प्रॉपर्टी खरीदने व बेचने के लिए एनडीसी लेने की परेशानी सहित कई टैक्स का भार बढ़ जाएगा। मनरेगा में मजदूरी कर रहे मजदूरों को भी बेरोजगार रहना पड़ेगा।