सिरसा। शहर के बांसल पैलेस में दिव्य ज्योति जाग्रति सामाजिक संस्थान की ओर से महिलाओं को समर्पित विशेष कार्यक्रम तू है नारी का आयोजन रविवार को किया गया। यह कार्यक्रम महिला सशक्तीकरण, जागरूकता और समाज में महिलाओं के योगदान को उजागर करने व अन्य विषयों पर आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में महिलाओं के लिए कई प्रेरणादायक सत्र और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रखी गई हैं। तू है नारी मंच पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। आयोजक संस्था के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं की सामाजिक भूमिका, उनकी शक्ति और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करना है, साथ ही उन्हें नई दिशा और प्रेरणा प्रदान करना भी इसका मुख्य मकसद है।
अभिभावक बनें मार्गदर्शक विशेष सत्र रहा
कार्यक्रम में इंटरेक्टिव सेशन रखा गया, जिसमें विशेषज्ञ वक्ता ने महिलाओं व अभिभावकों के साथ संवाद किया। वहीं अभिभावक बनें मार्गदर्शक विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें माता-पिता को बेटियों के भविष्य निर्माण में उनकी भूमिका के बारे में जागरूक किया।
तू है शक्ति तिमिर से तेजस्विता तक कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण
सांस्कृतिक मंच पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को आकर्षित किया। जबकि एक बेटी की विजय गाथा शीर्षक से प्रस्तुत किया गया नाट्यांश समाज में बेटियों के संघर्ष और सफलता की कहानी को उजागर किया। इसी प्रकार तू है शक्ति तिमिर से तेजस्विता तक कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। जो महिला शक्ति के अंधकार से प्रकाश तक के सफर को दर्शाया।
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इस प्रकार चला कार्यक्रम
- कार्यक्रम में इंटरेक्टिव, अभिभावक बनें मार्गदर्शक
- मनमोहक नृत्य प्रस्तुति
- एक बेटी की विजय गाथा
- तू है शक्ति तिमिर से तेजस्विता तक
- परिवर्तन का उद्घोष, क्रांति से शांति तक
- आकर्षक सेल्फी बूथ एवं प्रदर्शनी आयोजित होंगे
यह आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन और महिला जागरूकता का संदेश देने के उद्देश्य से किया गया। कार्यक्रम न केवल मनोरंजन का माध्यम रहा, बल्कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। सात दिसंबर को होने वाला यह आयोजन शहर में महिला शक्ति और आत्मनिर्भरता के उत्सव के रूप में यादगार बना। इसमें पंजाब के नूरमहल से विशेष रूप से साध्वी बहनें पधारीं। -
संतोष भारती, कोऑर्डिनेटर, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, सिरसा।
सिरसा।शहर के बंसल पैलेस में आयोजित कार्यक्रम में अंतिम नाटक प्रस्तुत करते हुए वॉलंटियर्स। संवाद