सिरसा। लंपी वायरस की चपेट में अब तक जिले की 40 गोशालाएं आ चुकी है। लेकिन पशुपालन विभाग के पास अभी तक वैक्सीन नहीं पहुंची है। वैक्सीन भी वहीं फायदेमंद होगी जहां पशु अभी तक संक्रमित नहीं हुए है। ऐसे में वहां वायरस से बचने के लिए दवा के बजाय परहेज ही कारगर साबित हो सकता है। इसके अलावा फॉगिंग व कीटनाशक का छिड़काव भी पशुपालकों को अपने स्तर पर करना होगा प्रशासन की तरफ से इस मामले में हाथ खड़े हैं। वहीं पशुपालकों में लंपी के बढ़ते मामलों से पशुपालकों में भय बना हुआ है।
जिले में अब तक 1939 पशु लंपी बीमारी से संक्रमित हो चुके है और प्रति दिन इसके आंकड़ों में इजाफ हो रहा है तो वहीं रिकवरी भी तेजी से हो रही है। क्योंकि संक्रमित पशुओं से 1285 पशु इस वायरस से स्वस्थ हो चुके हैं। परंतु वैक्सीन व टीकाकरण में विलंब के चलते विभिन्न सामाजिक संगठन सरकार व प्रशासन खिलाफ नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न गोशाला के सदस्यों ने भी जिला प्रशासन को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा गया है। वहीं अब पशुपालन विभाग के चिकित्सकों पर भी दबाव बनना शुरू हो चुका है। जिसे लेकर गांव-गांव में पशुपालन विभाग की टीम दौरा करने में जुटी हुई है। जिले में करीब 135 गोशालाओं का संचालन हो रहा है। जिनमें चिकित्सकों की टीम दौरा कर चुकी है और इनमें से 40 गोशालाओं में गाय लंपी से संक्रमित मिली है। इस समय पशुपालन एवं डेयरी विभाग की 60 पशु चिकित्सालयों व 168 पशु औषधालयों की टीम लगी हुई है। जो गांव-गांव में जाकर पशुपालकों को संबंधित वायरस से जागरूक भी कर रही है तो वहीं आंकड़े भी एकत्रित कर रहे हैं।
उबालने के बाद दूध में नष्ट हो जाते हैं कीटाणु
पशुपालन विभाग के अधिकारियों डॉ. विद्यासागर बांसल व डॉ. गौरव छाबरा ने बताया कि पशुपालक अफवाहों से बचें व संक्रमित पशु का दूध उबालने के बाद इसमें सभी कीटाणु पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। यह गंभीर बीमारी नहीं है बल्कि वायरस है, जो एक दूसरे पशुओं में फैलता है। इसलिए जितनी तेजी से फैलता है उतनी तेजी से इसकी रिकवरी भी हो रही है।
अब तक हो चुकी 36 पशुओं की मौत
जिले में विभिन्न स्थानों पर करीब 36 गाय की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक गाय की मौत डबवाली व कालांवाली क्षेत्र में हुई है। क्योंकि यहां सबसे अधिक लंपी के मामले सामने आ रहे हैं, जिसके पीछे मुख्य कारण पंजाब के सीमावर्ती होने की वजह से है। क्योंकि पंजाब व राजस्थान में यह वायरस अधिक फैला हुआ है। इसके अलावा 1600 संक्रमित पशुओं में से 1285 पशु स्वस्थ हो चुके हैं।
साफ सफाई व सावधानी से फॉगिंग बेहद जरूरी
इस वायरस से बचने के लिए पशुओं के स्थान पर साफ सफाई बेहद जरूरी है। क्योंकि स्वच्छ स्थान होने से लंपी का संक्रमण कम फैलता है। इसके अलावा फॉगिंग व फिनाइल आदि का छिड़काव निरंतर करने से भी संक्रमण फैलने में कमी आती है। परंतु फॉगिंग के दौरान भी पशुपालकों को सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि इससे पशुओं का दम घुटने का भी डर रहता है। इसलिए खुले स्थान और पशुओं को दूसरे स्थान पर बांधने के बाद ही छिड़काव किया जा सकता है।
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15 दिन पहले हमारे पास दवा की पर्याप्त खेप आ चुकी है। हालांकि वैक्सीन की कई बार डिमांड भेजी गई है। बुखार, फोड़े आदि होने पर संबंधित दवा देकर उनका उपचार किया जा रहा है। जिसका असर भी काफी दिखाई दे रहा है पशुपालकों को वायरस से घबराने की जरूरत नहीं है। इस वायरस से बचने के लिए पशु के स्थान पर साफ सफाई बेहद जरूरी है। कहीं भी पशुपालकों को इसके लक्षण दिखाई दे रहे है तो वे तुरंत विभाग को सूचना दें।
-डॉ. विद्यासागर बांसल, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग, सिरसा।