संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। नागरिक अस्पताल में पुलिस हिरासत से भागे हुए दो बंदियों को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषी करार दिया है। दोषियों की न्यायिक हिरासत अवधि करीब ढाई वर्ष होने के चलते न्यायालय ने इसे सजा के लिए पर्याप्त मानते हुए अंडरगोन कर दिया। बंदियों को शरण देने के तीन आरोपियों को न्यायालय ने बरी कर दिया है।
गांव कुत्ताबढ़ निवासी सोनू व बठिंडा निवासी काका के खिलाफ वर्ष 2021 में डबवाली थाने में जानलेवा हमला करने का मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने सोनू व काका को जेल भेज दिया। 8 अगस्त 2022 को जेल में सोनू व काका की तबीयत खराब हो गई। दोनों को जेल प्रशासन द्वारा सिरसा नागरिक अस्पताल भेजा गया।
नागरिक अस्पताल में दोनों की निगरानी के लिए पुलिस ने गारद लगाए। 9 अगस्त 2022 को हवलदार राजबीर बीमार होने के कारण शाम को अपने घर और जसविंदर सिंह सरकारी क्वार्टर पर चला गया। सोनू व काका की सुरक्षा के लिए हवलदार कृष्ण अकेला मौजूद था।
देर रात करीब एक बजे सोनू ने हवलदार कृष्ण से कहा कि उसे पेशाब आया है। कृष्ण ने सोनू की हथकड़ी खोली और उसे शौचालय में ले गया। इसके बाद कृष्ण सोनू को हथकड़ी लगाने लगा तो उसने जोर से धक्का मारा। इसके बाद सोनू व काका ने हवलदार कृष्ण पर हमला कर दिया और उसकी जेब से चाबी निकालकर अपनी हथकड़ी खोल ली। पुलिस को दिए बयान में हवलदार कृष्ण कुमार ने बताया था कि सोनू व काका ने उसे जान से मारने की नीयत से उसका गला दबा दिया, जिससे वह बेहोश हो गया। इसके बाद सोनू व काका खिड़की का शीशा तोड़कर नागरिक अस्पताल से भाग गए।
एसपी ने पुलिस हिरासत से भागे सोनू व काका को पकड़ने के लिए पुलिस टीमों का गठन कर दिया। इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था।
शरण देने पर तीन युवकों को किया था गिरफ्तार
सोनू व काका को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने दोनों को शरण देने के आरोप में बूटा सिंह निवासी फाजिल्का पंजाब, मनजीत सिंह निवासी फरीदकोट पंजाब व राकेश निवासी मंडी डबवाली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उक्त तीनों को गिरफ्तार किया था।
साबित नहीं हुआ हमला व छीना झपटी का आरोप
इस मामले का निपटारा करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवजीत ने आरोपी सोनू व काका को पुलिस कर्मी से मारपीट करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने व पुलिस हिरासत से फरार होने का दोषी करार देकर अंडरगोन कर दिया। सोनू व काका पर धारा जानलेवा हमला व छीनाझपटी का आरोप साबित नहीं हुआ। वहीं, दोषियों को शरण देने के आरोपी बूटा सिंह, मनजीत सिंह व राकेश को सबूत के अभाव में न्यायालय ने बरी कर दिया।