सिरसा। नगर परिषद सिरसा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव पर पूरे नगर के साथ साथ जिले भर के लोगों की निगाह लग हुई थी। प्रधान पद जरूर भाजपा को मिला पर भाजपा अपनों से ही हार गई। घर से लेकर 20 पार्षद चले थे पर 17 ने ही वोट दी जबकि तीन ने विरोधी उम्मीदवार की मददकर जीत एक वोट पर लाकर रख दी। असंतुष्टों को मनाने के लिए सरकार की ओर से कई मंत्रियों को भेजा गया पर वहीं ढाक के तीन पात रहे। हुआ वही तो भाजपा नहीं नहीं चाहती थी। भाजपा का ही दूसरा खेमा अपना प्रधान बनाने में कामयाब रहा।
अध्यक्ष उपाध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने मोहरे बिछाने शुरू किए। कुछ आजाद भाजपा की ओर आए पर कांग्रेस और हलोपा ने गठबंधन उम्मीदवार मैदान में उतारने का ऐलान कर दिया था। भाजपा का एक गुट आरएसएस पृष्ठभूमि से जुडे़ प्रदीप रातुसरियां की पत्नी वैशाली को उम्मीदवार बनाना चाहता था पर राहुल सेतिया ने शीलाल सहगल को उम्मीदवार ही घोषित कर दिया क्योंकि भाजपा के आठ पार्षद उनके समर्थक बताए जा रहे थे। तीसरा गुट भी वैशाल के नाम का विरोध कर रहा था। सीएम के पूर्व राजनीतिक सलाहकार वैशाली के पक्षधर थे। 18 नवंबर का चुनाव कराने का ऐलान हुआ तो भाजपा पार्षदों को एक गुट हिमाचल के वुड क्रिक होटल ले गया जहां पर 18 पार्षद एकजुट हुए। जहां पर सीपीएस श्याम सिंह राणा, सिरसा भाजपा प्रभारी संजय भाटिया, विधायक असीम गोयल ने पार्षदों से उनकी राय ली।
इसके बाद भी प्रधान पद को लेकर खेल चलता रहा। हर गुट अपनी अपनी जिद पर अडा़ रहा। बाद में उम्मीदवार के नाम का फैसला भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला पर छोड दिया गया। हाईकमान भाजपा के भीतर पनप रही कलह को शांत कर चुनाव कराना चाहता था। 12 दिसंबर को चुनाव को लेकर राज्यमंत्री कृष्ण बेदी, भाजपा सिरसा प्रभारी संजय भाटिया रविवार रात को ही सिरसा पहुंच गए थे। उन्होंने भाजपा नेताओं से बातचीत कर पर बात सिरे नहीं चढ़ी। एक गुट वैशाली के नाम पर तो दूसरा शीला सहगल केनाम पर अडा रहा। सोमवार सुबह राहुल सेतिया के आवास पर फिर बैठक हुई जिसमें राज्यमंत्री कृष्ण बेदी, भाजपा सिरसा प्रभारी संजय भाटिया, जगदीश चोपडा और पूर्व मंत्री प्रो.गणेशीलाल आदि ने भाग लिया। उम्मीदवार का चयन कर पार्षदों को जानकारी दे दी गई पर इस बीच भाजपा इनेलो को अपने पक्ष मे लाने में कामयाब रही। सांसद चरणजीत सिंह रोडी और विधायक मक्खन सिंगला वोटडालने के लिए राजी हो गए। इनेलो को उपाध्यक्ष पद दिया गया।
भाजपा 18 पार्षदों को बस में लेकर नगर परिषद कार्यालय पहुंची जबकि ममता सैनी, एमपी और एमएलए पहले ही पहुंच चुके थे। मंत्री के साथ आए कर्मचारी भी नगर परिषद में हर स्थित पर नजर रखे हुए थे। भाजपा पूरी तरह से आसावान थी कि दोनो पद उसकी झोली में आएंगे लेकिन प्रधान पद का नतीजा आते ही भाजपा के पैरो तले से जमीन ही खिसक कई। हालांकि प्रधान पद उनके पास ही आया पर हार जीत का फैसला एक ही वोट से हुआ यानि तीन पार्षदों ने क्रास वोट किया। उप प्रधान पद पर और भी बुरी स्थिति हुई जिस पर कांग्रेस ने कब्जा किया। शीला को जिताकर राहुल सेतिया ने अपनी ताकत का अहसास करवा दिया। भाजपा के जिला प्रधान यतिंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा समान रूप से नगर के विकास के लिए कार्य करेगी। क्रास वोटिंग के सवाल पर उन्होंने कहा कि तीन पार्षदों ने क्रास वोटिंग की है, कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसमें क्या कार्रवाई होनी है अपनी पसंद का वोट डालने का सभी को हक होता है।