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दिल्ली आंदोलन में शहीद किसानों को दी श्रद्धांजलि

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नमन करते हुए किसान। - फोटो : Sirsa
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तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को बरनाला रोड स्थित भगत सिंह स्टेडियम में पक्का मोर्चा धरनास्थल पर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में गैर राजनीतिक संगठन, सभी किसान संगठनों के अलावा सामाजिक संस्थाएं, बुद्धिजीवी, साहित्यकार भी पहुंचे। वहीं श्रद्धांजलि समागम को लेकर प्रशासन ने अलर्ट किया हुआ था। डिप्टी सीएम और बिजली मंत्री की कोठी की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड लगाकर उन्हें बंद कर दिया गया। वहीं किसानों ने बिजली निगम द्वारा जानबूझकर रात्रि को ट्यूबवेल की बिजली सप्लाई देने पर 23 दिसंबर को बिजली मंत्री के घेराव की घोषणा की।
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जानकारी के अनुसार रविवार सुबह 11 बजे से शहीद भगत सिंह स्टेडियम में पक्का मोर्चा किसानों के धरने पर कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन में शामिल किसानों की मौत पर जिले के किसान श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। मौके पर सर्वप्रथम शहीद हुए सभी किसानों को पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इस अवसर पर फिजियोथेरेपिस्ट एसोसिएशन ऑफ हरियाणा व एनएचएम कर्मचारी संघ हरियाणा की ओर से डॉ. जगतदीप सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीनों ही कानून असंवैधानिक हैं। कृषक, उपज, वाणिज्य और व्यापार कानून की धारा 13 के अनुसार केंद्र सरकार या किसी अधिकारी की ओर से दोषी पाए जाते हैं, तो इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। प्रशासनिक अधिकारी को न्यायपालिका का अधिकारी बना दिया, जोकि मुमकिन नहीं हैं। प्रशासनिक अधिकारी केवल और केवल प्रशासनिक कार्य देख सकता है न कि न्यायपालिका। बिल तो जून में आते हैं और कानून अक्तूबर में बनते हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जमाखोरी की जो छूट दी गई है वो किसानों के हित में नहीं है। वो सिर्फ और सिर्फ बड़े उद्योगपतियों के लाभ के लिए हैं।
मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से देश के एक बड़े बिजनेसमैन को 2018 तक 21 एग्रो कंपनियों का मालिक बना दिया गया, जिससे साफ है कि सरकार पूंजीपतियों को ही लाभ देना चाहती है। उन्होंने बताया कि निजी कंपनी की ओर से कई स्थानों पर साइलो बनाए जा चुके हैं, जहां ये किसानों से फसलें खरीद कर स्टोर करेंगे और फिर उसे महंगे दामों पर बेचकर कालाबाजारी करेंगे, जिससे आम जनता त्रस्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों की एक ही मांग है कि जब तक ये कानून वापस नहीं लिए जाते, वे पीछे नहीं हटेंगे। उनका मोदी सरकार से एक ही सवाल है कि और कितने किसानों की लाशों से गुजरकर वे इन कानूनों को वापस लेने का ऐलान करेंगे। किसानों की समस्या का समाधान ही शहीद हुए किसानों को सच्ची श्रद्धांजलि है।
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किसान नेता लखा सिंह बोले- जानबूझकर रात्रि शिफ्ट में दी जा रही बिजली सप्लाई
किसान नेता लखा सिंह अलीकां ने कहा कि सरकार ने किसानों को आंदोलन से दूर रखने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए है। पंजुआना फीडर के तहत आने वाले गांवों में ट्यूबवेल की बिजली सप्लाई रात को की जा रही है। जबकि बिजली निगम को पता है कि किसान आंदोलन में भाग लेने के लिए दिल्ली गए हुए है। लेकिन जानबूझकर रात्रि शिफ्ट में ही बिजली सप्लाई दी जा रही है। जिससे कि घरों में बच्चों या बुजुर्गों को ठंड में खेतों में जाकर गेहूं की फसल को पानी लगाना पड़ रहा है। इसलिए 23 दिसंबर को जिले के किसान बिजली मंत्री रणजीत सिंह की कोठी का घेराव करेंगे। इसलिए इस दिन ज्यादा से ज्यादा किसान सिरसा पहुंचें।

आंदोलन में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देते किसान।- फोटो : Sirsa

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