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कल सबके घरों में पधारेंगे बप्पा, बाजार में मिट्टी व बिना रंग की मूर्तियों की मांग ज्यादा

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मूर्तिकार सुक्की रानी मूर्ति को रंग करती हुई। संवाद - फोटो : Sirsa
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। शहर में गणपति को अपने घर लाने की तैयारियां जोरों- शोरों से चल रही है। बुधवार को सबके घरों में बप्पा पधारेंगे। इसके बाद लोग 10 दिनों तक विधि- विधान से पूजा-अर्चना के बाद बप्पा को विदाई देंगे। इसके चलते बाजारों में भी गणपति बप्पा की मूर्तियों की मांग बढ़ है। इस बार मिट्टी व बिना रंग की मूर्तियों की मांग ज्यादा है। पिछले कुछ सालों से विसर्जन पर लगी रोक के बाद इस बार गणेश मूर्तियों के ट्रेंड में बदलाव देखने को मिल रहा है। लोगों में मूर्ति विसर्जन को लेकर जागरूकता दिखाई दे रही है। बाजारों में इस बार मिट्टी की बिना रंग वाली मूर्तियों की सबसे अधिक डिमांड है। कारीगरों का कहना है कि मूर्तियां बनाने का काम 5 से 6 महीने पहले ही शुरू हो जाता है। इसके चलते उन्होंने अपना काम पहले ही खत्म कर दिया है, लेकिन डिमांड लोग अब कर रहे हैं। इसके कारण मंाग के हिसाब से लोगों को मूर्तियां नहीं दे पा रहे हैं।
मीडियम साइज वाली मूर्तियों की मांग ज्यादा
इस साल बाल गणेश की मूर्तियों की मांग भी विगत कुछ सालों से कम हुई है। मूर्तिकारों के पास 1 फीट से लेकर 8 फीट तक की मूर्तियां उपलब्ध है। इनका मूल्य 591 से लेकर 15 हजार रुपये तक है। मूर्तिकार भग्गाराम और दिनेेश कुमार ने बताया कि लोग इस बार मीडियम साइज की मूर्तियां लेना पसंद ज्यादा कर रहे हैं। 10 से 12 ऑर्डर मीडियम साइज मूर्ति के ही हैं। वहीं आठ फीट का तो अभी तक एक ही ऑर्डर है। उन्होंने कहा कि कुछ संस्थाओं से उन्हें मूर्तियों का ऑर्डर मिले हैं, जिन्हें तैयार किया जा चुका है। इस बार कई संस्थाओं ने बिना रंग वाली मूर्तियों की मांग की थी। वहीं सिर्फ मिट्टी से बनी मूर्तियों की मांग भी इस बार अधिक है।
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पिछले साल की तुलना में इस बार कम रुझान
हिसार रोड स्थित मूर्तिकार दिनेश कुमार का कहना है कि त्योहार को सिर्फ एक दिन शेष रह गया है, लेकिन शहरवासियों का इस बार कुछ खास रुझान देखने को नहीं मिल रहा है। अभी तक 12 से 13 मूर्तियां ही बिकी है। वहीं 10 के ही ऑर्डर आए हुए हैं। कारीगर का कहना है कि मूर्तियों को बनाने के लिए 5 से 6 महीने पहले ही काम शुरू कर देते हैं। इनको बनाने के लिए 6 लाख रुपये कर्जा लिया था, लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे कर्जा नहीं उतर पाएगा। मूर्तियों को बनाने के लिए लिए सॉक पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। इसे एडवांस में ही बीकानेर से मंगवाना पड़ता है। ये सॉक पाउडर एक प्रकार की रेत की तरह होता है, जो कुछ दिनों में ही पानी में घूल जाता है। वहीं मूर्तियों को बनाने के लिए 10 लोगों की लेबर भी लगती है।
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वर्जन
पिछले 13 साल से इसी जगह पर मूर्तियां बना रहे हैं। इस बार गणपति की मीडियम साइज वाली और मिट्टी से बनी मूर्तियों की मांग ज्यादा है। वहीं इस कुछ लोग बिना रंग की मूर्तियां भी मांग रहे हैं। ज्यादा लोग एक दिन पहले या उसी दिन मूर्ति को खरीदकर लेकर जाते हैं। हमारे पास 600 से लेकर 15 हजार तक की मूर्ति है।
- भग्गाराम, मूर्तिकार, सिरसा।
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