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Sirsa News: अब तक पराली जलाने पर सिरसा के 80 किसानों पर एफआईआर

Mon, 02 Dec 2024 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। पराली प्रबंधन के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों की तैयारी कारगर साबित नहीं हो रही है। 30 नवंबर तक हरसेक से 188 स्थानों पर आग की सूचना मिली। विभाग ने इन सभी सूचनाओं के परीक्षण का दावा किया। इस आधार पर कुल मिली सूचनाओं में से करीब 53 सूचनाएं सही पाई गईं। विभाग को अन्य स्रोतों से भी 27 सूचनाएं मिलीं। ऐसे में किसानों पर कुल 80 एफआईआर दर्ज की गई है।

जिले में कृषि विभाग को 15 नवंबर तक 160 स्थानों पर पराली जलने की सूचना मिल चुकी थी और 67 किसानों पर मामले दर्ज हो चुके थे। 15 नवंबर के बाद तेजी से सामने आने लगे। इन मामलों ने कृषि विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी। इस कारण प्रशासन ने रात को निरीक्षण के लिए भी दल गठित किए, लेकिन देरी से बनाई गई टीमों का कोई फायदा नहीं हुआ। प्रशासन की ओर से आखिरी दौर में किए गए प्रयास नाकाफी साबित हुए।
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अदालत के आदेशों पर कार्रवाई के बहाने इस साल किसानों पर पहली बार एफआईआर दर्ज की जा रही है। डीएपी खाद वितरण के लिए व्यवस्था बनाने में जुटे कृषि विभाग के अधिकारी पराली प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह से बनाना भूल गए। ऐसे हालत तब हुए जब सवा लाख एकड़ भूमि पर अतिरिक्त धान की बिजाई की गई थी। इसे किसानों को मशीनरी मुहैया न करवा पाने का खामियाजा भी माना जा रहा है।

30 नवंबर तक मिली सूचना - 188



नॉन फायर सूचना मिली - 130

अन्य स्रोतों से मिली सूचना - 27



कुल दर्ज मामले - 80

तिथिवार मिलीं सूचनाएं



19 नवंबर - 17

20 नवंबर - 07



23 नवंबर - 20

24 नवंबर - 09



25 नवंबर - 13

26 नवंबर - 12



इन 6 दिनों में मिलीं 64 सूचनाएं



पराली जलाने पर एक ही गांव के किसानों पर मामला दर्ज



सूचना मिलने के आखिरी दिन कृषि विभाग की ओर से मल्लेकां गांव में गश्त के लिए बड़ी टीम भेजी थी। इस दौरान उन्होंने खेतों में आग जलती देखी। मौके पर जांच के बाद पता चला कि यह आग जसविंद्र कौर पत्नी जसकरण जीत सिंह के खेतों में लगी थी। दूसरे मामले में गांव अलीपुर टीटूखेड़ा में किसान हरबिंद्र सिंह पुत्र स्वर्ण सिंह के दो एकड़ खेतों में धान की पराली जली मिली। हरसेक से भी घटना के सबूत मिले। इसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई।
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कोटस

पराली जलाने के ज्यादातर मामले नवंबर के आखिरी दो सप्ताह में सामने आए। पराली प्रबंधन के लिए विभाग ने हरसंभव प्रयास कर किसानों को जागरूक किया था। हमारी 290 टीमें गांवों में सक्रिय थीं। - डाॅ. सुखदेव कंबोज, उप निदेशक, कृषि विभाग।



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