खुले में घूम रहे आवारा पशु जहां लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहे हैं वहीं गांवों में विवाद का कारण भी बनते जा रहे हैं। मंगलवार को इसी मुद्दे को लेकर तीन गांवों के लोग आमने-सामने हो गए। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को जैसे तैसे शांत करते हुए मौअजिज लोगों को थाने में बुलाकर इस मसले को सुलझाने का प्रयास किया जहां घंटों तक आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर चलता रहा। किसी अप्रिय घटना की आशंका के चलते तीन थानों की पुलिस के अलावा अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था तो वहीं एसएचओ, डीएसपी व बीडीपीओ ने लोगों को शांत करते हुए आपसी भाईचारा खराब न करने की अपील करते हुए बीच का रास्ता निकाला।
जानकारी मुताबिक पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव ख्योंवाली के खेतों में खुले में घूमने वाले पशुओं को लेकर ख्योंवाली, ओढां व चकेरियां सहित तीन गांवों के लोग लाठियों से लैस होकर आमने-सामने हो गए हैं। सूचना पाते ही कार्यवाहक एसएचओ अवतार सिंह पुलिस बल सहित मौके पर पहुंचे और तीनों गांवों के लोगों से बातचीत का दौर चलाते हुए शांति बनाए रखने की अपील की। इस दौरान तीनों गांवों के लोग अपने-अपने खेतों की हदों पर डटे रहे। ख्योंवाली के लोगों ने ओढां के लोगों पर उनके खेतों में पशु जबरन घुसाने का आरोप लगाया तो वहीं ओढां के लोगों का कहना था कि उक्त पशु ख्योंवाली के हैं और उनके द्वारा रखा गया घुड़ सवार पशुओं के पीछे घोड़ा दौड़ाकर उनके खेतों की और ओर भगा देता है। उधर चकेरियां के लोगों का कहना है कि उन्हें ओढां व ख्योंवाली के लोगों द्वारा फोन पर सूचना मिली थी कि घुड़ सवार रखवाला पशुओं का एक झुंड उनके गांवों की ओर भगा रहा है। इ सके चलते वे अपने खेतों की सीमा पर पहुंचे थे। इस दौरान आधा दर्जन पशुओं को लोगों ने मौका दिखाने के लिए बंधक बनाकर रखा हुआ था।
गरमाया माहौल
ओढां और ख्योंवाली का रकबा क्षेत्र एक दूसरे के साथ सटा हुआ है। इसके चलते दोनों गांवों के लोग एक दूसरे पर पशु छोड़ने की सूचना पाकर लाठी-डंडे लेकर खेतों में आ धमके। खेत में दोनों गांवों के लोग पुलिस के समक्ष एक दूसरे के रकबा क्षेत्र में पशु छोड़ने का आरोप लगाते रहे। दोनों गांवों के बीच तनातनी के चलते माहौल इस कदर गरमा गया कि लोग अपने-अपने खेतों की हदों में लाठियों से लैस होकर बैठ गए। इसके चलते पुलिस को बातचीत के जरिए काफी पसीना बहाना पड़ा। बताया जा रहा है कि इस दौरान ओढां के लोगों द्वारा गांव से अन्य लोगों को बुलाने की भनक लगने के बाद एसएचओ ने अतिरिक्त पुलिस बल बुलाते हुए उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत करवाया। इसके बाद डीएसपी सत्यपाल यादव, कालांवाली थाना प्रभारी धर्मवीर सिंह, बड़ागुढा थाना प्रभारी यादविंद्र सिंह मौके पर पहुंचे जहां दोनों पक्षों को थाने में बुलाते हुए बातचीत का दौर चलाया, जहां आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच मामला तूल पकड़ता गया लेकिन पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को दूर कर मुख्य व्यक्तियों को अंदर बुलाकर बातचीत का दौर चलाया।
पहले भी चार गांव हो चुके हैं आमने सामने
खुले में घूम रहे पशु गांवों के आपसी भाईचारे पर भी विपरीत असर डाल रहे हैं लेकिन प्रशासन द्वारा इसका कोई ठोस हल न निकाले जाने के चलते लोग एक दूसरे से भिड़ने पर उतारू हैं। इसी मुद्दे को लेकर करीब दो माह पूर्व भी ओढां, जंडवाला जटान, सालमखेड़ा व चोरमार सहित चार गांव आमने सामने हो चुके हैं। जहां मामले को सुलझाने में पुलिस को काफी पसीना बहाना पड़ा था।
रातभर करते हैं खेतों की रखवाली
ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में घूम रहे पशुओं का झुंड लोगों की फसलों पर इस कदर परेशानी का सबब बना हुआ है कि लोग ठंड के मौसम में पूरी-पूरी रात खेतों में गुजारने को विवश हैं। वहीं लोगों ने खेतों की रखवाली के लिए मोटी राशि देकर घुड़ सवार रखे हैं। उक्त घुड़ सवार जब पशुओं को आगे लगाकर दौड़ाते हैं तो पशु एक दूसरे की खेतों की सीमा में घुस जाते हैं जिसके चलते गुस्साए लोग घुड़ सवारों की धुनाई भी कर देते हैं। गोभक्त घुड़ सवारों से पशु भगाने को अनुचित मान रहे हैं तो वहीं किसान इसे अपनी मजबूरी बताकर सरकार व प्रशासन को दोषी ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार इन पशुओं के लिए कोई ठोस खाका तैयार करे तो वे घुड़ सवारों को हटा देंगे।
ये हुआ समझौता
थाने में कई घंटे तक चले आरोप-प्रत्यारोरोपों के बीच फैसला ये हुआ कि जो पशु ख्योंवाली के खेतों में खड़े हैं उन्हें पुलिस की मौजूदगी में वहां से निकाला जाए। उक्त पशु तीनों गांवों में जिस भी गांव में जाएंगे वे उसी गांव के माने जाएंगे। इसके अलावा जो घुड़ सवार रखे हुए हैं वो एक दूसरे गांव की सीमा से करीब 10 एकड़ दूर ही रहेगा। फैसले के बाद जब खेत में मौजूद पशुओं को निकाला गया तो वे ख्योंवाली गांव की ओर चले गए।
प्रशासन को निकालना होगा समस्या का हल :
इस समय खेतों में गेहूं की फसल का सीजन है ऐसे में पशु किसानों के लिए बड़े नुकसान का सबब बनते हैं। फसलों को बचाने के लिए लोग ठंड के मौसम में पूरी पूरी रात खेतों में गुजार रहे हैं। इस समस्या को लेकर जहां गांवों में आपसी भाईचारे में दरार पैदा हो रही है तो वहीं ये पशु मुख्य मार्गाें पर अक्सर हादसे का कारण बनते हैं लेकिन प्रशासन या सरकार द्वारा इस समस्या का कोई ठोस हल नहीं निकाला जा रहा। अगर सरकार या प्रशासन ने इस समस्या का समाधान नहीं किया तो ये मुद्दा कभी भी बड़ी घटना का कारण बन सकता है।
वर्जन
दोनों पक्षों का समझौता करवा दिया गया है जिसमें घुड़सवार व्यक्ति एक दूसरे खेत की सीमा से 10 एकड़ दूर रहेगा और कोई भी व्यक्ति एक दूसरे के खेत में पशु नहीं छोड़ेगा और जो पशु दोनों गांवों के लोगों ने खेत में रोक रखे थे उन्हें छुड़वा दिया गया है।
- दलेराम महला, थाना प्रभारी