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तीन छात्र बैठे आमरण अनशन पर

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 चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के विधि विभाग में पिछले दिनों से छात्रों की ओर से किए जाने वाले अनशन रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। शनिवार को एक छात्र का दाखिला रद करने की मांग के लिए तीन छात्रों ने कुलपति कार्यालय के बाहर आमरण अनशन शुरू किया।
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 उन्हें मनाने के लिए आए विभागाध्यक्ष ने विभाग की छवि का वास्ता देकर अनशन समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्र विकास के दाखिले के मामले में न्यायालय के फैसले का इंतजार करो,  वहां से जो भी फैसला आएगा, उसे सही या गलत देखने का काम विश्वविद्यालय प्रशासन का है।

शनिवार को सीडीएलयू के कुलपति कार्यालय के बाहर विधि विभाग के अध्यक्ष जेएस जाखड़ विकास के दाखिले को रद करने की मांग के लिए अनशन पर बैठे विद्यार्थियों से मिलने पहुंचे। जाखड़ आमरण अनशन पर बैठे तीन छात्र साहिल दहिया, जोगेंद्र सिहाग, रमन सैनी सहित अन्य समर्थकों को अनशन समाप्त करने के लिए मनाने आए थे।
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 उन्होंने छात्रों से एक घंटे तक बातचीत करते हुए मनाने की कोशिश की मगर छात्र अपनी जिद पर अड़े रहे। इस समय उन्होंने छात्रों को कई उदाहरण देते हुए बताया कि वे केवल अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। विकास को दाखिला उन्होंने नहीं बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने किया है।

 कोर्ट के आदेश के आधार पर अभी उसे प्रोविजनल दाखिला दिया गया है, अभी उन्हें इस मामले को ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं  है। उन्होंने छात्रों से कहा कि न्यायालय के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए, वे न्यायालय की इज्जत करते हैं, जबकि आप सभी लॉ के विद्यार्थी हो, न्याय प्रक्रिया को भलि भांति जानते हो।  


विभागाध्यक्ष पिछले कई दिनों से विभाग मेें चल रहे घटनाक्रम का दर्द नहीं छुपा पाए। उन्होंने कहा कि उनके ऐसा करने से विभाग की छवि खराब हो रही है। उन्हें लगता है जैसे उनके विभाग के खिलाफ गहरी साजिश चल रही है।

 कुछ बाहरी  लोग षड्यंत्र रचकर विभाग के छात्रों को भड़काकर ऐसा कदम उठाने को मजबूर कर रहे हैं। परीक्षा में मुश्किल से दो सप्ताह का समय है, ऐसे में पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।


विभागाध्यक्ष ने विद्यार्थियों से पूछा कि उनके साथ क्या अन्याय हुआ है तो उनका कहना था कि एक ऐसे विद्यार्थी को दाखिला दे दिया गया है, जो कक्षा में कभी आया ही नहीं। उधर, वे भारी भरकम फीस भरकर दिन रात मेहनत कर रहे हैं, ऐसे में उसे उनके साथ परीक्षाओं में बैठने का मौका नहीं मिलना चाहिए।

 यह बात सुनकर विभागाध्यक्ष ने कहा कि उसे दाखिला मिलने से उनके साथ अन्याय नहीं हुआ है, जो उन्हाेंने सीखा है, वो नहीं सीख पाएगा। जहां तक दाखिले की बात है तो सीडीएलयू प्रशासन का फैसला है, जबकि दोनों पक्षों के पास अपील का मौका है। अभी लंबी लड़ाई है, चलने दो आप लोग अपनी परीक्षाओं पर ध्यान दो। इसके बावजूद छात्र अनशन पर डटे रहे।


विश्वविद्यालय में तीन छात्र आमरण अनशन के साथ-साथ उनकी कक्षा की दर्शना, ममता, राकेश रानी, अमित, संजय सिहाग, सायर अग्रवाल, चिराग मेहता, आनंद, अमन, नवदीप, शकील खान, जगदेव भी अनशन स्थल पर बैठे हुए थे। इन विद्यार्थियों ने कहा कि इस मामले के संदर्भ में उन्होंने बृहस्पतिवार को कुलपति को ज्ञापन सौंपा था मगर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

 इसी कारण उन्हें मजबूरन अनशन पर बैठना पड़ रहा है। विकास को दाखिला देकर सीडीएलयू   ने उनके साथ अन्याय किया है। विकास का दाखिला तुरंत रद किया जाना चाहिए। विकास लगातार दो महीने तक अनुपस्थित रहा, उसे दाखिला दे दिया गया, मगर ऐसे विद्यार्थियों को दाखिला क्यों नहीं दिया जा रहा, जो केवल कुछ दिन कक्षा नहीं लगा पाए।

 उन्होंने कहा कि पहले दी गई परीक्षा में भी उसने धोखाधड़ी का सहारा लिया था, विभाग ने उसका रोल नंबर रोक लिया था, मगर उसने किसी और रोल नंबर को स्कैन कर परीक्षाएं दी थी।

 इस मामले में भी उस पर 420 का केस दर्ज होना चाहिए। इन सभी मामलों पर विश्वविद्यालय अगर लिखित आश्वासन दे दे तो वह अनशन समाप्त कर सकते हैं। सोमवार तक उनकी मांगें नहीं मानी गई तो पूरी कक्षा आमरण अनशन पर बैठेगी।


विधि छात्र विकास के लेक्चर शॉर्ट होने पर 26 सितंबर 2013 को लॉ डिर्पाटमेंट ने उसका नाम काट दिया था। छात्र ने अपना पक्ष रखते हुए खराब स्वास्थ्य की रिपोर्ट जमा करवाई थी। दोबारा दाखिले के लिए विभागाध्यक्ष को पत्र लिखा था, पर दाखिला नहीं मिला।

 इसके बाद उसने वीसी को भी पत्र लिखा, वीसी ने उसे आगे एचओडी को भेज दिया। उसे दाखिला नहीं मिलने के कारण वह नौंवे सेमेस्टर की परीक्षा नहीं दे पाया था। इसके बाद उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसी वर्ष 10 फरवरी को कोर्ट ने विद्यार्थी के हक में फैसला सुनाते हुए विश्वविद्यालय को तुरंत दाखिला देने और एक सप्ताह में प्रवेश का निपटारा करने का आदेश दिया था।

 सीडीएलयू की तरफ से कोई कार्रवाई न होते देख और अपने भविष्य की चिंता के कारण उसे आखिरकार अनशन पर बैठने का फैसला किया। 18 अप्रैल को विकास कुलपति कार्यालय के बाहर अनशन पर बैठ गया। कड़ी जद्दोजहद के बीच उसे पांचवें दिन जाकर दाखिला मिल पाया था।
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