सिरसा। नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में गोलियां चलने के बाद सोमवार को कर्मचारियों ने सुरक्षा को लेकर सीएमओ डॉ. मनीष बांसल व पीएमओ डॉ. संदीप गुप्ता से मिले। कर्मचारियों ने बताया कि रात में ड्यूटी के दौरान बाहर के युवक हथियार लेकर अस्पताल में आते हैं और उन्हें धमकियां तक देते हैं। कई बार लड़ाई झगड़ा हो चुका है, लेकिन सुरक्षा के लिए कोई बंदोबस्त नहीं है। कर्मचारियों ने अस्पताल की सुरक्षा बढ़ाने और चौकी बनाने की मांग की।
सोमवार को नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के स्टाफ सदस्य और अन्य कर्मचारी अस्पताल में एकत्रित हुए। उन्होंने अस्पताल में सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर अस्पताल में सीएमओ डॉ. मनीष बांसल को मांग पत्र भी सौंपा। कर्मचारियों ने बताया कि रात के समय अस्पताल में केवल दो ही सुरक्षा कर्मचारी तैनात रहते हैं। रात में झगड़े और सड़क हादसे में घायल मरीज अधिक पहुंचते हैं। इसके बाद दोनों पक्षों के लोग भी अस्पताल में ही एकत्रित होकर इमरजेंसी वार्ड तक पहुंच जाते हैं। सुरक्षा कर्मचारी जब उनको हटाने का प्रयास करते हैं, तो मरीजों के परिजन भी कर्मचारियों से ही गाली गलौज करते हैं। शनिवार रात को गोलियां चलने के बाद दो स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी इसमें घायल हो चुके हैं। स्टाफ नर्स ने कहा कि कई बार युवक उनको धमकी तक देकर वहां से फरार हो गए। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले एक हथियार बंद युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया था। इस मौके पर सुरक्षा कर्मी हेमंत कुमार, अमित कुमार, कीर्ति, ललिता रानी, तृप्ता, पवन कुमार सहित अन्य स्टाफ उपस्थित था।
अस्पताल में चौकी खुलवाने की उठाई मांग
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अमित कुमार, हेमंत कुमार, ललिता रानी व अन्य स्टाफ ने कहा कि नागरिक अस्पताल में सुरक्षा के लिए एक चौकी खुलवाई जाए और कर्मचारियों को नियमित रूप से तैनात किया जाए। इमरजेंसी गेट पर मरीजों की जांच करने के बाद ही किसी को अंदर जाने दिया जाए। इसके बाद सीएमओ ने उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक से इस मामले में बातचीत किए जाने का आश्वासन दिया।
स्वास्थ्य विभाग के ही एंबुलेंस कर्मचारी को नहीं मिला इलाज, किया रेफर
एंबुलेंस कर्मचारी प्रदीप कुमार के पांव पर गोली के छर्रे लगने के बाद शनिवार को उसकी जांच कर भेज दिया गया। सोमवार को फिर से कर्मचारी को डॉक्टरों ने इलाज के लिए बुलाया था, लेकिन उसे अग्रोहा रेफर कर दिया। प्रदीप कुमार ने रोष जताते हुए कहा कि उन्हें ही अस्पताल में सही तरह से इलाज नहीं दिया जा रहा, तो अन्य मरीजों को किस तरह का इलाज मिल सकेगा। उसेे निजी अस्पताल से डॉक्टरों ने इलाज देने के लिए बुलाया था। लेकिन जांच करने के बाद जनरल सर्जन न होने की जानकारी देकर रेफर कर दिया।
स्वास्थ्य कर्मचारी बोले : फ्रिज के पीछे और फर्श पर बैठकर बचाई थी जान
नागरिक अस्पताल में तैनात सुरक्षा कर्मचारी ने बताया कि रात को युवक काफी संख्या में एकत्र हो गए थे। इसके बाद उसने डॉक्टर को मामले की शिकायत पुलिस को देने को कहा था। डॉक्टर ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद उक्त युवकों ने डॉक्टर के सामने ही हथियार निकाल लिए और मारपीट करनी शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस को दी तो करीब आधे घंटे बाद ही पुलिस अस्पताल में पहुंच पाई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर 13 पर दर्ज किया है मामला
शहर थाना पुलिस ने घायल जतिन के पिता राजकुमार के बयान पर सात नामजद सहित 13 के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। हमलावर अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर है। एसपी डॉ. अर्पित जैन ने आरोपियों को पकड़ने के लिए तीन टीमें बनाई गई है। शहर थाना प्रभारी धर्मवीर ने बताया कि आरोपियों को पकड़ने के लिए छापा कार्रवाई की जा रही है।