डबवाली। अगर आप किसी को मकान किराये पर देते हैं या देने की योजना बना रहे हैं तो सतर्कता बरतने की जरूरत है। इन दिनों एक नया ‘’रेंट स्कैम’’ सामने आया है। इसमें ठग आपके एड्रेस का इस्तेमाल करके जीएसटी फ्रॉड कर सकते हैं।
पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने रेंट स्कैम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस स्कैम में ठग पहले ईमानदार किरायेदार बनकर कानूनी तरीके से रेंट एग्रीमेंट कराते हैं। सिक्योरिटी डिपॉजिट करते हैं। कुछ दिनों बाद वह बिना किसी विवाद के मकान खाली कर देते हैं। जिससे मकान मालिक को कोई शक नहीं होता। मकान मालिक को लगता है कि उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है, जब उसके पते पर जीएसटी का नोटिस आता है।
दरअसल, वह किरायेदार वहां अपना फर्जी जीएसटी अकाउंट रजिस्टर करवा लेता है। भारी टैक्स लायबिलिटी छोड़कर फरार हो जाता है। पहले किरायेदारों से जुड़े ज्यादातर फ्रॉड किराया न चुकाने, सिक्योरिटी डिपॉजिट न करने या मकान खाली न करने तक सीमित थे। यह स्कैम सीधे सरकारी टैक्स और कानूनी दांव-पेंच से जुड़ा है। जिससे निकलना मकान मालिकों के लिए मुश्किल हो सकता है। इस स्कैम में किराएदार के बारे में पता लगाना भी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि वह फर्जी डॉक्यूमेंट्स देकर मकान किराये पर लेता है और बाद में फरार हो जाता है।
उन्होंने बताया कि रेंट स्कैम से बचने के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। मकान मालिकों को सही डॉक्यूमेंट्स की जांच, पुलिस वेरिफिकेशन और रेंट एग्रीमेंट पर खास ध्यान देना चाहिए। किसी भी किरायेदार को बिना पूरी जांच-पड़ताल के घर देना जोखिम भरा हो सकता है।
थोड़ी सी सतर्कता आपको बड़े कानूनी और फाइनेंशियल झंझट से बचा सकती है। मकान किराये पर देने से पहले नीचे ग्राफिक में दी गई इन बातों का ध्यान जरूर रखें। किरायेदार का पुलिस वेरीफिकेशन जरूर कराएं। उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड व पिछले एड्रेस की जानकारी लें। किरायेदार की नौकरी या बिजनेस की पूरी जानकारी वेरीफाई करें। रेंट एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से किरायेदार के अधिकार व जिम्मेदारियां लिखें। रेंट एग्रीमेंट में ये लिखें कि इस पते का इस्तेमाल बिजनेस या जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए नहीं किया जा सकता।