कालांवाली। विधानसभा चुनाव में इस बार कालांवाली हलके में त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा रहा है। जहां इंडियन नेशनल लोकदल के मुख्य नेताओं के सक्रिय होने के चलते इनेलो प्रत्याशी का चुनाव रफ्तार पकड़ता दिख रहा है, वहीं निवर्तमान विधायक कांग्रेस के शीशपाल केहरवाला को सांसद कुमारी सैलजा के दौरे से फायदा हुआ है। भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र देसुजोधा को किसान आंदोलन का नुकसान हो रहा है, लेकिन सरकार की नीतियों और युवाओं को मिली नौकरी से उनको भरोसा है कि साइलेंट वोटर और भाजपा समर्थक उनके साथ हैं। वे भी पूरे जोश-शोर से जुटे हुए हैं।
कालांवाली विधानसभा क्षेत्र इनेलो-अकाली दल का गढ़ रहा है। इसका बड़ा कारण यह है कि इलाका पूरी तरह से पंजाब क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पंजाब की राजनीति का असर इस क्षेत्र पर पड़ता रहा है। पिछले तीन चुनाव की बात करें तो यहां से दो बार इनेलो-अकाली गठबंधन के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है, जबकि एक बार यह सीट कांग्रेस के हाथ में आई है।
कांग्रेस से 2019 में जीत हासिल कर चुके शीशपाल केहरवाला एक बार फिर से मैदान में हैं। भाजपा से राजेंद्र देसुजोधा जोर आजमा रहे हैं, तो इनेलो के मास्टर गुरतेज, आम आदमी पार्टी से जसदेव सिंह निक्का व गुरजंट सिंह तिगड़ी जजपा से हाथ आजमा रहे हैं।
दो साल से लोगों की बीच जा रहे हैं देसुजोधा
भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र देसुजोधा इससे पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन वह इस सीट से जीत नहीं पाए। हालांकि राजेंद्र सिंह देसूजोधा का भी कालांवाली हलके में काफी नाम है। उन्होंने भाजपा में रहते हुए हलके के गांवों में विकास भी करवाया है। वह पिछले दो साल से लगातार हलके के हर शहर व गांव में डोर टू डोर अभियान चलाकर जनसंपर्क कर चुके हैं।
चौटाला परिवार हुआ सक्रिय
इनेलो के मास्टर गुरतेज सिंह कालांवाली की जंगीर सिंह काॅलोनी में रहते हैं। सिख और लोकल चेहरा होने का भी उन्हें काफी लाभ मिल रहा है। इसके अलावा चौटाला परिवार के सक्रिय होने का भी फायदा मिल रहा है। इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने यहां पर दौरा किया है। आदित्य चौटाला भी उनके समर्थन में आ चुके हैं। कांता चौटाला लगातार यहां पर सक्रिय हैं।
सिरसा के साथ लगते गांव में मजबूत नजर हा रहे हैं केहरवाला
कांग्रेस के शीशपाल केहरवाला यहां से निवर्तमान विधायक हैं। कुमारी सैलजा के आने से उनके चुनाव प्रचार में कुछ उछाल आया है। शीशपाल केहरवाला शहर के अलावा सिरसा के साथ लगते हलके के गांवों में मजबूत नजर आ रहे हैं।
सत्ता के खिलाफ ही गिरे हैं वोट
हलके के पिछले तीन बार के चुनाव देंखे तो पता चलता है कि यहां पर सत्ता के खिलाफ ही वोट गिरे हैं। कालांवाली शहर व सभी गांवों में सत्ता के खिलाफ काफी रोष देखा जा रहा है। किसान आंदोलन में यहां के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया है। इसका चुनाव पर भी असर पड़ने से इन्कार नहीं किया जा सकता। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय तो सभी प्रत्याशी हलके में अपने-अपने कार्यालय खोलते हैं, लेकिन चुनाव के बाद दिखाई भी नहीं देते। इसलिए विधायक ऐसा होना चाहिए, जोकि जनता को काम होने पर अपने हलके में ही हर समय उपलब्ध मिले। जनता को अपने काम करवाने के लिए सिरसा न जाना पड़े।
पिछले तीन प्लान का रिकाॅर्ड
साल विजेता हारे
2009 चरणजीत सिंह रोड़ी डॉ. सुशील इंदौरा
इनेलो-अकाली दल कांग्रेस
2014 बलकौर सिंह शीशपाल केहरवाला
इनेलो-अकाली दल कांग्रेस
2019 शीशपाल केहरवाला राजेंद्र देसुजोधा
कांग्रेस इनेलो
कालांवाली विधानसभा क्षेत्र में जातिगत समीकरण
जातिगत समीकरण
जाति
प्रतिशत
वोटर्स
जट्ट सिख 28
47640
अरोड़ा खत्री
5
8507
जाट
4
6805
वैश्य महाजन
4
6805
ब्राह्मण
2
3402
खाती
3
5104
कुम्हार
4
6805
कम्बोज
10
17014
मजहबी सिख
14
23820