गांव जोधपुरिया निवासी एक गर्भवती महिला ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दिया। एंबुलेंस गर्भवती महिला को लेकर सामान्य अस्पताल परिसर पहुंचती तब तक फार्मासिस्ट प्रभात ने एंबुलेंस में ही सफलतापूर्वक डिलीवरी करवा दी। उक्त महिला ने लड़की को जन्म दिया है और सामान्य अस्पताल में दाखिल जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
जोधपुरिया निवासी शीशपाल की पत्नी आरती गर्भवती थी। सोमवार सुबह प्रसव पीड़ा होने लगी तो परिजन उसे खारिया स्थित पीएचसी में दाखिल करवाने गए। कुछ देर बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी तो उसे सिरसा रेफर कर दिया गया। सिरसा से एंबुलेंस खारिया पहुंची और प्रसव पीड़ा से जूझ रही आरती को लेकर सिरसा सामान्य अस्पताल की ओर रवाना हुई। आरती की प्रसव पीड़ा ज्यादा तेज हो गई और फार्मासिस्ट प्रभात के लिए एंबुलेंस में ही डिलीवरी करवाना जरूरी हो गया। ऐसा नहीं होता तो जच्चा-बच्चा दोनों की जान को खतरा हो सकता था।
एंबुलेंस में मौजूद आरती की रिश्तेदार महिलाओं ने भी सहयोग किया और एंबुलेंस में डिलीवरी करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इतने में एंबुलेंस दर्द से कराह रही आरती को लेकर सामान्य अस्पताल परिसर पहुंच गई। इसके बाद 12 बजकर 27 मिनट पर आरती ने एंबुलेंस में लड़की को जन्म दिया। फार्मासिस्ट प्रभात ने बताया कि खराब सड़कों पर हिचकोले खाती एंबुलेंस में आरती की प्रसव पीड़ा काफी अधिक बढ़ गई थी। जच्चा-बच्चा की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती थी और इसलिए एंबुलेंस में ही इमरजेंसी डिलीवरी करनी पड़ी। गर्भवती महिला ने लड़की को जन्म दिया है।
तीसरी डिलीवरी में ज्यादा समय नहीं लगता
सामान्य अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुभाषिणी ने बताया कि पहले बच्चे में गर्भवती को करीब 12 घंटे तक प्रसव पीड़ा होती है। दूसरे या तीसरे बच्चे में गर्भवती को प्रसव पीड़ा होने के कुछ देर बाद ही बच्चा हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की डिलीवरी में ज्यादा वक्त नहीं लगता। आरती ने तीसरे बच्चे को जन्म दिया है और फार्मासिस्टों को इमरजेंसी से निपटने के लिए पूरी ट्रेनिंग व जानकारी प्राप्त है।