the villagers created a ruckus after the staff was not present and refferes a pregnent women
- फोटो : Sirsa
गर्भवती महिला को डिलिवरी के लिए रोड़ी पीएचसी सेंटर में दाखिल करवाया गया, लेकिन स्टॉफ के न होने पर गुरुद्वारा साहिब की एंबुलेंस से उसे पंजाब के सरदूलगढ़ कस्बे में अस्पताल में दाखिल करवाया गया। लेकिन गर्भवती महिला की स्थिति को देखकर उसे सिरसा रेफर कर दिया गया। सिरसा सिविल अस्पताल पहुंचने के दस मिनट बाद महिला ने मृतक नवजात को जन्म दिया। इस बात की सूचना रोड़ी में पहुंची तो लोगों ने पीएचसी सेंटर के बाहर धरना लगा दिया। सूचना के बाद डिप्टी सिविल सर्जन ने मौके पर पहुंचकर स्टॉफ की लापरवाही पर कार्रवाई करने का भरोसा दिलवाया। तब जाकर आक्रोशित लोगों ने धरना समाप्त किया। वहीं इस मामले को लेकर नौजवान भारत सभा व काफी संख्या में ग्रामीण सोमवार सुबह स्वास्थ्य केंद्र पर एकत्र हो गए। उन्होंने मुख्य गेट को बंद कर सरकार व विभाग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सभा के सदस्यों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि रोड़ी के स्वास्थ्य केन्द्र में स्टाफ की लापरवाही का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी एक जनवरी को भी लापरवाही का ऐसा मामला समाने आया था। करीब डेढ़ माह पूर्व भी नौजवान भारत सभा के सदस्यों ने पीएचसी की लच्चर व्यवस्था को लेकर चिकित्सा अधिकारी को मांग पत्र भी सौंपा था। लेकिन इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग के कान पर जूं तक नहीं सरकी।
रोड़ी निवासी सत्या देवी ने बताया कि रविवार को अपनी बेटी चंद्रकला को प्रसव पीड़ा के चलते शाम चार बजे रोड़ी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लेकर गई थी। स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी स्टाफ नहीं मिला और न ही एंबुलेंस। सत्या देवी के अनुसार उसकी लड़की तकरीबन एक घंटे तक प्रसव पीड़ा से कराहती रही। जिसके चलते उसने अस्पताल में मौजूद चौकीदार को कई बार कहा। जिसके बाद चौकीदार ने आशा वर्कर को सूचना दी लेकिन वह भी नहीं पहुंची। स्टाफ के न पहुंचने व प्रसव पीड़ा बढ़ने के कारण परिजनों ने कुछ मेडिकल संचालकों व लोगों की सहायता से फग्गू गुरुद्वारा की निजी एंबुलेंस बुलाकर प्रसव पीड़िता को सरदूलगढ़ ले गए। परिजनों के मुताबिक चिकित्सक ने प्रसव पीड़िता की हालत को गंभीर बताते हुए उसे सिरसा रेफर कर दिया। परिजन तब महिला को शाम 6 बजे सिरसा ले गए। सत्या देवी ने बताया कि अस्पताल में जब उसकी बेटी की डिलीवरी हुई तो उसने मृतक नवजात को जन्म दिया। सत्या देवी का आरोप है कि इस दौरान महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो चुकी थी। पीएचसी में जिस समय प्रसव पीड़िता को लाया गया उस समय एमओ की ड्यूटी थी। लेकिन उक्त चिकित्सक ड्यूटी पर हाजिर न रहकर बठिंडा अपने घर पर मौजूद रहा। अस्पताल में एमओ के नदारद होने के बाद स्टाफ भी नदारद हो गया। इसलिए किसी अन्य चिकित्सक की स्थाई रूप से डयूटी लगाई जाए। उन्होंने कहा कि पीएचसी में एक महिला चिकित्सक सहित 3 चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। जिनकी पूर्ति की जाए। ड्यूटी चिकित्सक की लापरवाही पर कार्रवाई की मांग, आश्वासन के बाद धरना किया समाप्त पीएचसी पर रोष प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद सिविल सर्जन ने डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. आशा जिंदल को लोगों के बीच भेजा। उक्त चिकित्सक ने जब आक्रोषित लोगों से कारण जानना चाहा तो लोगों ने उन्हें कहा कि इससे पहले यहां कई बार लापरवाही के मामले आ चुके हैं। लेकिन विभागीय अधिकारी महज आश्वासन देकर टरका देते हैं। उन्होंने कहा कि विभाग ने पीएचसी से एंबुलेंस को अन्यत्र जगह भेज रखा है। जिसके चलते आपातकालीन स्थिति में मरीजों को भारी परेशानी से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने डिप्टी सिविल सर्जन से मांग करते हुए कहा कि लापरवाह कर्मचारियों पर एक्शन लेकर उन पर कार्रवाई की जाए। इसके अलावा स्वास्थय केंद्र में स्टाफ की पूर्ति, एंबुलेंस सुविधा बहाल करने व ड्यूटी चिकित्सक पर कार्रवाई करते हुए उसे बर्खास्त करने की मांग की गई। जिसके बाद डिप्टी सिविल सर्जन ने लोगों को समझाते हुए कहा कि उनकी जो भी मांगे हैं उनसे उच्चाधिकारियों को अवगत करवाते हुए उन्हें पूरा करवाने की हर संभव कोशिश की जाएगी। लेकिन इसके लिए उन्हें कुछ समय दिया जाए। उन्होंने एक एंबुलेंस को अस्थाई तौर पर पीएचसी में तैनात करवा दिया। यहां पर करीब 20 दिन में स्थाई तौर पर एंबुलेंस लगा दी जाएगी। तब तक ये एंबुलेंस अस्थाई तौर पर पीएचसी पर तैनात रहेगी। जिसके बाद करीब 2 घंटे बाद लोगों ने धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।