ऑनलाइन बिक्री में बेतहाशा बढ़ोतरी ने शहर के बाजारों में कारोबार को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। लोकल कारोबार में कमी आने से दुकानदारों में निराशा का भाव है। दुकानदारों का कहना है कि ऑनलाइन कारोबार में कई जोखिम हैं, लेकिन बाजार में बैठे दुकानदारों का भरोसेमंद काम होता है। स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सरकार गंभीरता से कोई पॉलिसी बनाएं।
दुकानदारों का कहना है कि विशेष प्रकार के उत्पाद के लिए ऑनलाइन बाजारों की ओर ग्राहक जरूर जाता है। इनका नुकसान व्यापारियों को हो रहा है। ज्यादातर लोग सस्ते सामान के चक्कर में ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। गुणवत्ता की गारंटी जो दुकानदार दे सकता है, वह ऑनलाइन से नहीं मिल सकती है।
ऑनलाइन बाजार के कारण स्थानीय व्यापारियों का काम कम हो गया है। लोगों को समझना पड़ेगा कि ऑनलाइन व ऑफलाइन में क्या फर्क समझना पड़ेगा। ग्राहकों को समझना होगा कि ऑनलाइन व्यापार में सबसे डंप सामान बेचता है। बात करें इलेक्ट्रॉनिक व्यापार की तो इसमें मोटर, सामान आदि का बहुत फर्क होता है। -
राकेश राणा, इलेक्ट्रॉनिक दुकानदार।
स्थानीय मार्केट को ऑनलाइन ने बिल्कुल खत्म कर दिया है। ऑनलाइन व्यापार बढ़ने का सबसे बड़ा कारण सस्ता सामान है। ऑनलाइन में ग्राहकों को सस्ते का लालच दिया जाता है। इसके कारण ग्राहक ऑनलाइन सामान खरीदने में ज्यादा आकर्षित होते है। जो क्वालिटी और गारंटी ग्राहकों को ऑफलाइन में मिलता है, वो ऑनलाइन में नहीं मिलेगा। - नीतिश जग्गा, इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी।
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व्यापारी समाज पुरजोर से विरोध किया जा रहा है। ऑनलाइन व्यापार से ग्राहक को कोई फायदा नहीं है। ग्राहकों को समझना होगा कि अगर स्थानीय व्यापारी के पास पैसा आएगा तो कहीं न कहीं वह पैसा हमारे शहर में आएगा। जिसका टैक्स भी व्यापारी भरेगा। अगर व्यापारी टैक्स भरेगा तो शहर का विकास होगा। - हीरा लाल शर्मा, प्रधान, व्यापार मंडल। फोटो- 37
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ग्राहकों के बढ़ते ऑनलाइन शॉपिंग के रुझान के कारण हर दुकानदार आर्थिक मंदी सहित टर्नओवर की कमी से जूझ रहा है। सबसे बड़ी समस्या ग्राहकों के लिए त्योहारी सीजन में कितना स्टॉक करके रखे यह तय नहीं हो पा रहा है। छोटे खुदरा व्यापारी ऑनलाइन खरीदारी के कारण प्रतिस्पर्धा से संकट में हैं। - बंसीलाल सोनी, सराफा व्यापारी। फोटो- 40