संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। आध्यात्मिक गुरु पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज ने कहा कि संत और गुरु का जीवन जन कल्याण के लिए होता है। अपने जीवन में ऐसा गुरु रखो जिससे ज्ञान हासिल कर सको, जिससे जीवन में कल्याण हो सके। उन्होंने कहा कि जीवन में जब भी दुख आता है हम भगवान को कोसते हैं, लेकिन दुख हमारे जीवन कोे निखारने के लिए ही आता है।
पंडित प्रदीप मिश्रा मंगलवार को श्री बाबा तारा कुटिया परिसर में सत्संग पंडाल में आयोजित शिव पुराण कथा के तीसरे दिन देशभर से आए श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान गीता मनीषी महामंडलेेश्वर ज्ञानानंद महाराज कथास्थल पर पहुंचे और व्यासपीठ और कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज को नमन किया। ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि जिन पर भगवान शिव की कृपा होती है, उन्हें ही शिवपुराण कथा श्रवण का मौका मिलता है।
कथा वाचन करते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज ने कहा कि संत व गुरु को जिसने पहचान लिया उसकी जिंदगी में चार चांद लग जाते हैं पर इनको जानना कठिन है। इनको जानने के लिए स्वयं को अर्पित करना होगा। पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज ने कहा कि ऋषि, संत, महात्मा, गुरू, साधु और तपस्वी के दर्शन और उनका साथ ऐसे ही नहीं मिलता, सद्कर्म के फल स्वरूप इनका साथ मिलता है। उन्होंने कहा कि जब भी आप भोजन कर रहे तो तो थाली पर कभी रोना नहीं चाहिए, प्रेम और प्रसन्नता के साथ भोजन करना चाहिए। खाना हमें उसी प्रकार का फल, शक्ति देता है जैसा हमारे खाने के समय स्वभाव होता है।
इसके बाद पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज जी ने भजन- लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा, तुम्हें अपना बना बैठे जो होगा सो देखा जाएगा सुनाया तो पंडाल में बैठे श्रद्धालु झूम उठे। उन्होंने कहा कि पत्नी ब्यूटी पार्लर में जाकर सुंदर नहीं बनती और न ही बलवान होती है, जिस दिन पति उसका सम्मान करने लगे और उसे इज्जत दे उसी दिन पत्नी स्वयं को सबसे सुंदर और बलवान मानती है।