सिरसा। गांव बकरियांवाली में ग्रामीण पेयजल और साफ-सफाई समेत विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। गांव में लगभग 13 एकड़ में गांव से महज कुछ दूरी पर कचरा निस्तारण प्लांट लगाया गया है। इससे ग्रामीणों की फसलों से लेकर स्वास्थ्य खराब हो रहा है। प्लांट में कचरा निस्तारण के नाम पर खानापूर्ति हो रही है, प्लांट में कचरे के करीब 70 फीट ऊंचे पहाड़ बन गए हैं। इससे हवा चलने पर गांव में बदबू फैलती है।
इसके चलते गांव में बच्चों सहित बुजुर्गों और युवाओं को सांस से संबंधित बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। इस पर ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों के कार्यालयों में ज्ञापन प्रक्रिया से लेकर धरने प्रदर्शन भी कर लिए, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
शहर से 15 किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव बकरियांवाली के ग्रामीणों का दर्द सुनने पहुंचे संवाददाता ने जाना कि गांव की ओर से जाने वाली सड़क पर कोई स्ट्रीट लाइट नहीं है। इसके कारण सड़कों पर अंधेरा छाने से हादसों का खतरा बना रहता है। ग्रामीण सुभाष, मनीराम, रामस्वरूप ने बताया कि गांव में नहरी पानी न मिलने पर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गांव की नहर में महीने में करीब दो बार पानी आता है। ऐसे में ग्रामीणों को पीने के लिए पानी को या तो स्टोर करके रखना पड़ता है या फिर ट्यूबवेलों का खारा पानी पीना पड़ता है।
धीमा चल रहा कचरा निस्तारण का काम
ग्रामीणों के अनुसार, कचरा प्लांट के कारण खराब हो रही फसलों को बचाने और कचरे के निस्तारण के लिए कई बार अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। वहीं, प्लांट में चहारदीवारी तो बन रही है, लेकिन कचरा निस्तारण का काम धीमी गति से चल रहा है। इसके कारण प्लांट में चारों और कचरा ही कचरा है। निस्तारण के लिए जगह तक ही नहीं है। इस प्लांट में सिरसा शहर का सारा कचरा, इसके साथ आसपास लगने वाले अन्य खंडों से भी कचरा प्लांट में निस्तारण के लिए आता है।
-गांव में कचरा निस्तारण प्लांट के कारण फसलें खराब हो रही है। कई बार अधिकारियों को अवगत करवाने के बाद अब दीवार बननी शुरू हुई है। अब तो कचरे का निस्तारण हो तो बेहतर है, जिससे किसानों की फसलें और ग्रामीणों को बदबू और स्वास्थ्य ठीक हो पाएगा।
- सुभाष, ग्रामीण
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सिरसा से गांव की ओर से आने वाले मुख्य रोड पर दोनों ओर झाड़ियां उगी हैं। इससे ग्रामीणों को कई बार हादसों को शिकार होना पड़ा है। इसकी साफ सफाई होनी चाहिए।
- रवि, ग्रामीण।
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गांव में पेयजल की काफी समस्या है। गांव में बनी एक मात्र नहर में महीने में कभी एक बार तो कभी कभार दो बार पानी आता है। महीने में 10 दिन ही नहर आती है, जिससे गावं के लोग नहर का पानी पीते हैं। नहर की बंदी के कारण ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ता है। -
धोलूराम, ग्रामीण।
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गांव में रात के अंधेरे में कई बार हादसे हुए हैं। मुख्य रोड सहित गांव के अंदर सभी गलियों में स्ट्रीट लाइट का प्रबंध होना चाहिए। जिससे कि गांव में मुख्य सड़कों सहित गलियों में रात के समय में आने जाने वालों को परेशानी न हो।
हीराराम, ग्रामीण।