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बंसी श्रीकृष्ण के आकर्षण का प्रतीक : व्यास

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कथा व्यास ललित किशोर व्यास को सम्मानित करते हुए ट्रस्ट सदस्य
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सिरसा। कृष्ण की बंसी की लीलाओं का आध्यात्मिक महत्व गहरा और बहुआयामी है। भगवान श्रीकृष्ण की बंसी उनकी दिव्य शक्ति, प्रेम और आकर्षण का प्रतीक है। इसे केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक माध्यम माना जाता है। कृष्ण की बंसी की मधुर धुन गोपियों, जीवों और समस्त सृष्टि को उनकी ओर आकर्षित करती है।
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सेक्टर-20 स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर के 15वें स्थापना दिवस समारोह पर श्रीमद्भागवत महापुराण साप्ताहिक कथा के पांचवें दिन कथाव्यास ललित किशोर व्यास ने भगवान विष्णु के श्रीकृष्ण अवतार की कथा के दौरान उक्त उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह भगवान के प्रति निश्छल भक्ति और प्रेम का प्रतीक है।

गोपियों का बंसी की धुन पर मोहित होकर कृष्ण की ओर दौड़ना जीवात्मा की परमात्मा के प्रति तीव्र लालसा को दर्शाता है। बंसी की धुन आत्मा को जगाने और उसे सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर ईश्वर की ओर ले जाने का प्रतीक है। यह आध्यात्मिक नाद है, जो जीव को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर परम सत्य की ओर ले जाती है।
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उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में उनका जन्म, वासुदेव का यमुना पार करना, पूतना सहित अनेक राक्षसों का वध, माखन चोरी आदि अनेक प्रसंग भक्तों के लिए प्रेरणादायक हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं उनकी अलौकिक शक्ति, चंचलता और प्रेम को दर्शाती हैं। ब्यास जी ने कहा कि श्रीकृष्ण की कथा, लीलाएं हमें गहन आध्यात्मिक संदेश देती है। यह जीव को सिखाती हैं कि सच्चा आनंद और मुक्ति केवल भगवान के प्रति पूर्ण समपर्ण और प्रेम में ही है।

शुक्रवार के मुख्य यजमान प्रमुख उद्योगपति नरेश सेठी, अशोक बंसल, ललित सिंगला व कौशल्या देवी थे। उन्होंने विधि विधान से पूजा अर्चना की। इस अवसर पर ट्रस्ट के पूर्व प्रधान वीके गर्ग, कोषाध्यक्ष दीपक गुप्ता, सचिव ऋषि शर्मा, सह सचिव मेघनाथ शर्मा, बलबीर सिंह बैनीवाल सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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